ब्रिटेन ने मुस्लिम तुष्टीरण में भारत को भी पीछे छोड़ दिया है और इसका सबसे बड़ा सबूत ब्रिटेन की संसद में महिलाएं चिल्ला चिल्ला कर बता रही हैं। वायरल हुई तस्वीरें कुछ समय पहले की हैं लेकिन एक बार फिर जिंदा हो गया है क्योंकि ब्रिटेन में यह महिला प्रधानमंत्री बन सकती है। यह महिला कश्मीरी मूल की है लेकिन पाकिस्तानी है। दरअसल कुछ समय पहले ब्रिटेन की संसद में वोटिंग हुई कि देश में हजारों छोटी-छोटी बच्चियों के साथ यौन शोषण करने वाले पाकिस्तानी अभी भी खुले घूम रहे हैं। क्या सरकार को उन पर एक्शन नहीं लेना चाहिए? क्या इन पाकिस्तानियों के खिलाफ इंक्वायरी ऑर्डर नहीं करनी चाहिए? इस सवाल पर ब्रिटेन के सांसदों ने अपना वोट डाला लेकिन जो नतीजे आए वह आपके होश उड़ा देंगे।
364 सांसदों ने कहा कि पाकिस्तानी मुस्लिमों के खिलाफ जांच नहीं होनी चाहिए। जबकि 111 सांसदों ने कहा कि जांच होनी चाहिए। राइट 161 टू लेफ्ट 364 यानी लगभग पूरी ब्रिटेन की संसद मुस्लिम वोटों और तुष्टीरण के चक्कर में पाकिस्तानी मुस्लिमों पर खामोश बैठ गई। ब्रिटिश पार्लियामेंट को अपनी देश की छोटी-छोटी बच्चियों तक पर तरस नहीं आया और आप इसे ब्रिटेन के लोगों का दुर्भाग्य ही कहिए कि उन पर शबाना महमूद नाम की इस पाकिस्तानी महिला को प्रधानमंत्री के तौर पर थोपा जा सकता है। दरअसल ब्रिटेन को ग्रूमिंग गैंग्स ने बर्बाद कर रखा है। ग्रूमिंग गैंग्स वो होते हैं जो छोटी बच्चियों का शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण करते हैं। ब्रिटेन में चलने वाले इन ग्रूमिंग गैंग्स में 90% लोग पाकिस्तानी हैं। 2013 में पता चला कि पाकिस्तान के ये ग्रूमिंग गैंग्स ब्रिटेन की 1400 से ज्यादा बच्चियों का यौन शोषण कर चुके थे। लेकिन उसके बाद एक इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया कि पाकिस्तान के यह लोग 40 हजार से ज्यादा ब्रिटिश बच्चियों का यौन शोषण कर चुके थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के 50 से ज्यादा शहरों में पाकिस्तान के यह ग्रूमिंग गैंग्स काम कर रहे थे और अभी भी कर रहे हैं।
बहरहाल ब्रिटेन की बच्चियों को बर्बाद करने वाले पाकिस्तानियों को अब नई ताकत मिलने जा रही है क्योंकि ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद अब प्रधानमंत्री बन सकती हैं। अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कुर्सी खतरे में है। ऐसे में पीओके में पैदा हुई शबाना महमूद बड़ा खेल कर सकती है। मुस्लिम वोटर्स को खुश करने के लिए लेबर पार्टी शबाना महमूद को प्रधानमंत्री बना सकती है। यह ब्रिटेन की उन हजारों बच्चियों और उनके परिवार वालों के मुंह पर तमाचा है।
Continue reading on the app
सब इंडिया यूएस डील की बात करते रहे और भारत ने ना सिर्फ यूएस बल्कि यूके ईयू गल्फ कंट्रीज सभी से डील साइन कर ली। भारतीय इकॉनमी के लिए एक और डील भी हुई है। एक छोटे से देश के साथ लेकिन यह डील बहुत बड़ी है। भारत और चिली के बीच एक नया कॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है। यह समझौता 2007 के प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाकर बनाया जा रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और भारत को क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई सुरक्षित करना है।
फाइनेंसियल ईयर 2024-25 में भारत चिली का व्यापार 3.7 बिलियन डॉल से ज्यादा रहा। भारत चिली से ज्यादातर कॉपर और मिनरल्स मंगाता है। भारत चिली को फार्मासटिकल्स, टेक्सटाइल्स और ऑटो पार्ट्स भेजता है। पुराने रिश्तों की अगर बात करें तो भारत और चिली के रिश्ते 1956 से हैं। 2005 में पीटीए पर बातचीत शुरू हुई थी। 2007 में यह लागू हो गया था। 2017 में इसे और भी बढ़ाया गया। 2019 में एक स्तरी ग्रुप ने सीईपीए बनाने की सलाह दे दी। 2025 में इस पर बातचीत और भी तेज हो गई। अप्रैल 2025 में एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया गया। मई 2025 में पहला राउंड नई दिल्ली में हुआ। दिसंबर 2025 तक कई राउंड्स पूरे हो गए। जनवरी 2026 में मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बातचीत फाइनल स्टेज में है। फरवरी 2026 तक अभी साइनिंग नहीं हुई है। डील जल्द ही हो सकती है।
सीईपीए में होगा क्या-क्या?
इस एग्रीमेंट में शामिल होगा टेरिफ कम या खत्म करना, सर्विसेस ट्रेड, डिजिटल इकॉनमी रूल्स, इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन, एमएसएमई सपोर्ट, क्रिटिकल मिनरल्स कॉरपोरेशंस और इससे जॉब्स बढ़ सकती हैं। सप्लाई चेन मजबूत होगी।
भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स जरूरी क्यों है?
चिली के पास है लिथियम जो कि वर्ल्ड में सेकंड लार्जेस्ट अमाउंट में है। कॉपर चिली इसका टॉप प्रोड्यूसर है। इसके अलावा कोबाल्ट भी चिली के पास है। यह भारत के लिए जरूरी है क्योंकि यह ईवीज, बैटरीज, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल्स, डिफेंस में इस्तेमाल होते हैं। भारत चाइना पर डिपेंडेंस कम करना चाहता है। इसीलिए चिली से डायरेक्ट सप्लाई चाहता है।
Continue reading on the app