नेपाल: काठमांडू एयरपोर्ट के आसपास एक महीने तक विरोध-प्रदर्शनों पर रोक
काठमांडू, 12 फरवरी (आईएएनएस)। काठमांडू प्रशासन ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और उसके आसपास के क्षेत्रों में पांच से अधिक लोगों के किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन पर शुक्रवार से एक महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
जिला प्रशासन कार्यालय (डीएओ), काठमांडू ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि कुछ समूह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे परिसर में प्रदर्शन की योजना बना रहे थे। इसके मद्देनजर हवाई अड्डे के पूरे परिसर और आसपास के इलाकों में भूख हड़ताल, धरना, घेराव, रैली, प्रदर्शन और पांच से अधिक लोगों की सभा पर रोक लगाई गई है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में एयरपोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर पूरे एयरपोर्ट परिसर तक की सभी सड़कें, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल क्षेत्र, पार्किंग क्षेत्र और हवाई अड्डे की परिधि के भीतर आने वाले सभी स्थान शामिल हैं।
डीएओ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। प्रशासन के अनुसार, “भूख हड़ताल, धरना, घेराव, रैली और प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम उग्र भीड़ द्वारा तोड़फोड़, आगजनी और अन्य अवांछनीय गतिविधियों को जन्म दे सकते हैं। इससे झड़प, हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है, जिससे आवश्यक सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन, सार्वजनिक संपत्ति और शांति-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।”
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वह नेपाल के संविधान के तहत नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण और बिना हथियार सभा करने तथा विरोध कार्यक्रमों में भाग लेने के अधिकार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह अधिकार अन्य क्षेत्रों में लागू रहेगा।
डीएओ ने प्रदर्शन आयोजकों से अन्य स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने से पहले पूर्व सूचना देने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि किसी सरकारी, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो कानून के अनुसार क्षति का आकलन कर उसकी भरपाई आयोजकों से ही वसूली जाएगी।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बोर्ड ऑफ पीस के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा भारत: विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता उन्हें मिला है। फिलहाल भारत उसके हरेक पहलू पर नजर बनाए हुए है और उसकी समीक्षा कर रहा है। उन्होंने गुरुवार को ये बातें एमईए की नियमित ब्रीफिंग में कहीं।
एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा, हमारे पास अमेरिकी सरकार की तरफ से निमंत्रण आया है। हमसे आप बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को कहा गया है। हम प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का निरंतर समर्थन किया है। हमारे प्रधानमंत्री ने उन सभी पहलों का समर्थन किया है जो गाजा समेत पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।
वहीं, इस्लामाबाद ने गुरुवार को ऐलान किया कि वो यूएस बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में हिस्सा लेने (19 फरवरी को प्रस्तावित) वाशिंगटन जाएगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ यूएस में होने वाली बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग में शामिल होंगे, उनके साथ उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी होंगे।
पाकिस्तान उन 14 देशों में से एक है जिन्होंने 22 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे।
डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला बोर्ड ऑफ पीस शुरुआत में एक सीमित उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसे पहले वैश्विक नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में तैयार किया गया, जिसका मुख्य मकसद गाजा युद्धविराम योजना की निगरानी करना बताया गया था। लेकिन कथित तौर पर ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं इस बोर्ड को लेकर बढ़ गईं। ट्रंप ने इसका दायरा बढ़ाते हुए कई देशों को न्योता भेजा। संकेत दिया गया है कि भविष्य में यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित न रहकर एक वैश्विक संघर्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
--आईएएनएस
केआर/
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