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रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध से सरकार और स्टेकहोल्डर्स दोनों को हुआ भारी नुकसान!

ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 में रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने से सरकार और स्टेकहोल्डर्स दोनों को अल्पकालिक व दीर्घकालिक नुकसान हुआ है। हालांकि, सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम मानती है, जबकि उद्योग जगत दीर्घकालिक हानि का दावा करता है। आंकड़े बताते हैं कि आम बजट 2026 और उससे ठीक पहले आए आर्थिक सर्वे भी केंद्र सरकार के बढ़ते वित्तीय घाटे की ओर इशारा कर चुके हैं, इसलिए बेहतर तो यह होता कि मोदी सरकार ऐसे द्विपक्षीय हानिप्रद फैसले लेने से पहले इससे जुड़े उद्योग जगत व अन्य स्टेक होल्डर्स से उन्मुक्त हृदय से बातचीत के बाद ही किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचती।

जहां तक सरकार को नुकसान की बात है तो सरकार को सालाना ₹15,000-20,000 करोड़ जीएसटी (GST) राजस्व का सीधा नुकसान हुआ, क्योंकि रियल मनी सेक्टर 86% राजस्व का स्रोत था। वहीं, इस क्षेत्र में सक्रिय 400+ कंपनियों के बंद होने से कॉर्पोरेट टैक्स और FDI (₹25,000 करोड़) प्रभावित हुए। वहीं, जहां तक स्टेकहोल्डर्स को हानि की बात है तो रियल मनी गेम्स सेक्टर में 2 लाख नौकरियां (प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से) खतरे में हैं, जिसमें डेवलपर्स, मार्केटर्स और फिनटेक शामिल हैं। जिससे 50 करोड़ गेमर्स अवैध ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स की ओर मुड़ सकते हैं, जिससे धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग बढ़ने के आसार प्रबल हैं। 

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हालांकि, सरकार ने अपने निर्णय के बचाव में तर्क दिया है कि 45 करोड़ लोगों को ₹20,000 करोड़ का नुकसान हुआ था, जबकि नए प्रतिबंध से ई-स्पोर्ट्स ($1-2 बिलियन) मजबूत होगा। इस प्रकार लंबे समय में नया राजस्व (टूर्नामेंट्स, स्पॉन्सरशिप) नुकसान की भरपाई करेगा। 
 
बताया जाता है कि जिस तरह से ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 को अगस्त 2025 में संसद के दोनों सदनों से मात्र दो दिनों में पारित किया गया, वह त्वरित निर्णय है, जिसने 'रियल मनी गेम्स' पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जो अर्थव्यवस्था पर कई दुष्प्रभाव डाल चुका है और आगे भी पड़ेगा।

जहां तक नौकरियों पर प्रभाव की बात है तो इससे लगभग 2 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं, क्योंकि 400 से अधिक कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं। इंडस्ट्री बॉडीज के अनुसार, $25 अरब डॉलर के सेक्टर का बड़ा हिस्सा रियल मनी गेमिंग था, जिसका अचानक अंत होने से मानव संसाधन संकट पैदा हो गया। वहीं, जहां तक सरकारी राजस्व हानि की बात है तो सरकार को सालाना ₹20,000-25,000 करोड़ रुपये के टैक्स रेवेन्यू का नुकसान हो सकता है, जिसमें जीएसटी (GST) प्रमुख है। इससे डिजिटल इकोसिस्टम जैसे फिनटेक, विज्ञापन और कंटेंट क्रिएशन प्रभावित हुए हैं। 

दिलचस्प तो यह कि सरकार के तुगलकी फैसलों का असर भारत में होने वाले विदेशी निवेश पर भी पड़ेगा। इसलिए जहां तक निवेश प्रभाव की बात है तो देश में होने वाले ₹25,000 करोड़ के विदेशी निवेश (FDI) पर असर पड़ा है, क्योंकि नीतिगत अनिश्चितता से निवेशक पीछे हट रहे हैं। आखिर इसके त्वरित पारित होने से परामर्श की कमी ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में विश्वास कमजोर किया। वहीं, जहां तक अन्य जोखिम की बात है तो उपभोक्ता अवैध ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स या ग्रे मार्केट की ओर मुड़ सकते हैं, जिससे धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग बढ़ सकता है।  हालांकि ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन समग्र आर्थिक नुकसान प्रमुख चिंता है। 

यही वजह है कि ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 पर सरकार ने उद्योग संगठनों को स्टेकहोल्डर मीटिंग्स, संसदीय बहस और आधिकारिक बयानों के माध्यम से आश्वासन दिए। जिसमें मुख्य फोकस रियल मनी गेमिंग प्रतिबंध के बावजूद स्किल-बेस्ड सेक्टर की सुरक्षा और विकास पर था। इसलिए संक्रमणकालीन समर्थन देते हुए सरकार ने 6-12 महीने का ट्रांजिशन पीरियड घोषित किया, जिसमें प्रभावित कंपनियों को लाइसेंस कन्वर्जन और रिस्किलिंग फंड की सुविधा दी गई। साथ ही FIFA और अन्य बॉडीज को आश्वस्त किया कि ई-स्पोर्ट्स को पूर्ण संरक्षण मिलेगा। 

जहां तक निवेश व नीतिगत सुरक्षा की बात है तो केंद्रीय बोर्ड की स्थापना से नियामक स्पष्टता का वादा किया गया, FDI को प्रोत्साहन के लिए टैक्स इंसेंटिव्स बढ़ाए। वहीं खेल मंत्रालय ने स्टार्टअप्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट्स का ऐलान किया, जो ₹500 करोड़ का है। जहां तक कानूनी निपटारा की बात है तो सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं पर सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि अधिनियम व्यवसाय स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि जुआ रोककर स्वस्थ इकोसिस्टम बनाता है। इससे उद्योग का अधिकांश विरोध शांत हुआ। 

यही वजह है कि ई-स्पोर्ट्स उद्योग ने ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 पर मुख्य रूप से चिंता जताई, लेकिन पूर्ण विरोध कम था। दरअसल ई-स्पोर्ट्स प्लेयर्स वेलफेयर एसोसिएशन (EPWA) ने बिल पारित होने से ठीक पहले पीएम मोदी को पत्र लिखकर स्किल-बेस्ड गेम्स और चांस-बेस्ड गेम्स के बीच अंतर न करने पर आपत्ति दर्ज की। क्योंकि इनकी प्रमुख चिंताएं निम्नलिखित हैं- पहला, एसोसिएशन ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से खिलाड़ियों की आजीविका (कोचिंग, स्ट्रीमिंग, टूर्नामेंट आयोजन, कंटेंट क्रिएशन) खतरे में पड़ जाएगी। दूसरा, आर्थिक रूप से कमजोर गेमर्स के अवैध प्लेटफॉर्म्स की ओर मुड़ने और भारत की वैश्विक ई-स्पोर्ट्स प्रतिष्ठा को नुकसान का डर जताया। 

यह बात अलग है कि ईपीडब्ल्यूए के विरोध का स्वरूप सिर्फ विरोध पत्र के रूप में सीमित रहा, न कि मुकदमेबाजी; बल्कि उन्होंने बिल का स्वागत किया लेकिन सभी गेम्स को एकसमान मानने के खिलाफ आग्रह किया। साथ ही 450 मिलियन गेमर्स वाले उद्योग को बचाने के लिए स्टेकहोल्डर परामर्श की मांग की। बाद में अधिनियम के ई-स्पोर्ट्स को मान्यता देने वाले प्रावधानों से अधिकांश चिंताएं कम हुईं। 

हालांकि ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 से संबंधित ई-स्पोर्ट्स प्लेयर्स वेलफेयर एसोसिएशन (EPWA) की चिंताओं पर सरकार ने औपचारिक लिखित जवाब सार्वजनिक रूप से तो नहीं दिया। लेकिन, बिल पारित होने के बाद जारी आधिकारिक बयानों और प्रावधानों से स्पष्ट होता है कि सरकार ने इनका अप्रत्यक्ष संज्ञान लिया। जहां तक उद्योग जगत की चिंताओं का समाधान की बात है तो EPWA द्वारा उठाई गई स्किल गेम्स और चांस गेम्स के अंतर की मांग को अधिनियम ने स्वीकार किया, ई-स्पोर्ट्स को राष्ट्रीय खेल का दर्जा देकर प्रतिबंध से बाहर रखा। 

खेल मंत्रालय ने पत्र के बाद स्टेकहोल्डर मीटिंग्स में आश्वासन दिया कि खिलाड़ियों की आजीविका प्रभावित नहीं होगी। चूंकि यह नीतिगत कदम है, इसलिए सरकार ने ट्रेनिंग अकादमियां और छात्रवृत्तियों की योजना तेज की, जो EPWA की आर्थिक चिंताओं का प्रत्युत्तर मानी जा रही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत लंबित याचिकाओं पर केंद्र ने कहा कि अधिनियम उद्योग को बढ़ावा देगा, नुकसान नहीं। इससे EPWA की अधिकांश आपत्तियां शांत हुईं। 

देखा जाए तो ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 को पारित होने के तुरंत बाद कई विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आई हैं। इससे जुड़े मुख्य विवाद इसके त्वरित पारित होने, रियल मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध और परिभाषाओं की अस्पष्टता पर केंद्रित हैं। 
 
जहां तक नए नियम से प्रभावित होने वाले उद्योग संगठनों की बात है तो उन्होंने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमें ठोक दिए हैं। गेमिंग इंडस्ट्री की प्रमुख बॉडीज जैसे FIFS और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं, और दावा किया कि अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। वे तर्क देते हैं कि स्किल-बेस्ड गेम्स को जुआ घोषित करना मनमाना है और पर्याप्त स्टेकहोल्डर परामर्श की कमी थी। 

इसलिए इस नए अधिनियम की संवैधानिक वैधता विवाद छिड़ गया है। क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम को मनी बिल के रूप में पेश न करने और लोकसभा में त्वरित बहस (केवल 2 दिन) पर सवाल उठाए, जो विधायी प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन मानते हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 तक कई याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, लेकिन स्थगन नहीं दिया। वहीं राज्य सरकारों के मामले अलग हैं। खासकर कई राज्य जैसे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने अपने पुराने प्रतिबंधों के साथ संघर्ष का हवाला देकर हाई कोर्ट में चुनौती दी, क्योंकि अधिनियम केंद्र-राज्य समन्वय को अनिवार्य बनाता है। ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ प्रवर्तन पर PIL भी लंबित हैं। 

इसप्रकार ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 की त्वरित पारित होने से कई चुनौतियां और सीमाएं उजागर हुई हैं। यह रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन कार्यान्वयन में अस्पष्टताएं बनी हुई हैं। जहां तक कार्यान्वयन चुनौतियां की बात है तो केंद्रीय बोर्ड की स्थापना में देरी और राज्यों के साथ समन्वय की कमी से नियमों का पालन मुश्किल हो रहा है। वहीं, ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं, क्योंकि वैश्विक प्रवर्तन सीमित है। 

जहां तक आर्थिक सीमा की बात है तो एंरियल मनी सेक्टर के नुकसान की भरपाई ई-स्पोर्ट्स से तुरंत नहीं हो पा रही, जिससे 2 लाख नौकरियां प्रभावित हैं। लिहाजा, निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है, क्योंकि नीतिगत स्पष्टता की कमी बनी हुई है। जहां तक कानूनी व नियामक कमियां की बात है तो स्किल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स की परिभाषा अस्पष्ट होने से विवाद बढ़ सकते हैं, जबकि अपील प्रक्रिया धीमी है। लिहाजा लंबे समय में अवैध जुआ को रोकने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे का अभाव प्रमुख बाधा है। 

गौरतलब है कि ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 ई-स्पोर्ट्स को स्किल-बेस्ड प्रतियोगिताओं के रूप में मान्यता देता है, जिससे इसे रियल मनी गेमिंग से अलग कर आधिकारिक खेल का दर्जा मिला। यह अधिनियम राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के तहत ई-स्पोर्ट्स को मुख्यधारा का खेल बनाता है। बताया जाता है कि वर्तमान अधिनियम ई-स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को आधिकारिक खेल का दर्जा देकर आर्थिक विकास को गति देगा। इससे निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी, हालांकि रियल मनी गेमिंग बैन के बाद शुरुआती संक्रमण चुनौतीपूर्ण रहेगा। 

जहां तक निवेश वृद्धि की बात है तो ई-स्पोर्ट्स को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत मान्यता से FDI और स्पॉन्सरशिप आकर्षित होगी, जो इंडस्ट्री को $1-2 बिलियन तक बढ़ा सकती है। वहीं विशेषज्ञ इसे अनिश्चितता दूर करने वाला कदम मानते हैं, जिससे इनोवेशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, जहां तक रोजगार सृजन की बात है तो ट्रेनिंग अकादमियां और रिसर्च सेंटर्स से हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर कोचिंग, इवेंट मैनेजमेंट और टेक डेवलपमेंट में। इस प्रकार लंबे समय में यह रियल मनी सेक्टर के नुकसान की भरपाई कर 50,000+ जॉब्स जोड़ सकता है। 

जहां तक राजस्व लाभ की बात है तो सरकारी समर्थन से टूर्नामेंट्स, ब्रॉडकास्टिंग और मर्चेंडाइज से नया राजस्व स्ट्रीम बनेगा, जिसमें GST संग्रह भी शामिल है। भारत को ग्लोबल ई-स्पोर्ट्स हब बनाने से निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वहीं, जहां तक आधिकारिक मान्यता की बात है तो ई-स्पोर्ट्स को अब क्रिकेट या फुटबॉल जैसी पारंपरिक खेलों के बराबर एक्सपोजर और वैधता मिलेगी, जिससे खिलाड़ियों को स्पॉन्सरशिप और सरकारी समर्थन आसानी से उपलब्ध होगा। वहीं सभी राज्यों में एकसमान नियम लागू होने से क्षेत्रीय असमानताएं दूर होंगी। 

जहां तक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बात है तो केंद्रीय खेल मंत्रालय ट्रेनिंग अकादमियां, रिसर्च सेंटर और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म स्थापित करेगा, जो टैलेंट विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे। इससे भारत को ग्लोबल ई-स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा मजबूत होगी। वहीं जहां तक आर्थिक व नीतिगत लाभ की बात है तो नई गाइडलाइंस से निवेश, इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भागीदारी बढ़ेगी, जबकि रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध से फोकस शुद्ध स्किल गेम्स पर शिफ्ट हो गया। उद्योग विशेषज्ञ इसे अनिश्चितता दूर करने वाला मील का पत्थर मानते हैं। 

स्पष्ट है कि ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक खेल का दर्जा देकर नए रोजगार क्षेत्र खोलेगा। यह स्किल-बेस्ड गेमिंग को रियल मनी गेम्स से अलग कर टैलेंट पूल को आकर्षित करता है। जहां तक ट्रेनिंग और कोचिंग भूमिकाएं की बात है तो केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा स्थापित ट्रेनिंग अकादमियां कोच, मेंटॉर और स्काउट्स की मांग बढ़ाएंगी, जिससे हजारों नौकरियां पैदा होंगी। साथ ही युवा खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्तियां और सरकारी योजनाएं इन पदों को स्थायी बनाएंगी। जबकिं इवेंट व इंफ्रास्ट्रक्चर जॉब्स की दृष्टि से राष्ट्रीय ई-स्पोर्ट्स प्राधिकरण टूर्नामेंट आयोजकों, इवेंट मैनेजर्स और टेक स्पेशलिस्ट्स के अवसर सृजित करेगा। 

वहीं रिसर्च सेंटर्स से कंटेंट क्रिएटर्स, डेवलपर्स और लॉजिस्टिक्स स्टाफ को रोजगार मिलेगा। साथ ही सहायक क्षेत्रों में वृद्धि होने से ब्रॉडकास्टिंग, स्पॉन्सरशिप मैनेजमेंट और मर्चेंडाइज से मार्केटिंग, एनालिटिक्स और फाइनेंस प्रोफेशनल्स की भर्ती बढ़ेगी। इसप्रकार लंबी अवधि में 50,000+ जॉब्स जुड़ने का अनुमान है, जो रियल मनी सेक्टर के नुकसान की भरपाई करेंगे। 

बताया गया है कि ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 के भविष्य के कार्यान्वयन की योजना चरणबद्ध तरीके से तैयार की गई है। यह केंद्रीय बोर्ड की स्थापना, डिजिटल प्लेटफॉर्म एकीकरण और ई-स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। जहां तक चरणबद्ध कार्यान्वयन की बात है तो 2026 तक केंद्रीय ऑनलाइन गेमिंग नियामक बोर्ड (COGRB) पूर्ण रूप से कार्यरत होगा, जो लाइसेंसिंग, अनुपालन निगरानी और अपील प्रक्रिया संभालेगा। वहीं राज्यों के साथ समन्वय समितियां गठित हो रही हैं, जो स्थानीय नियमों को अधिनियम के अनुरूप बनाने का लक्ष्य रखती हैं। 

साथ ही डिजिटल व तकनीकी एकीकरण की दृष्टि से DIGIYUVA पोर्टल के माध्यम से सभी प्लेटफॉर्म्स का KYC, आयु सत्यापन और ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग अनिवार्य होगा। जबकि AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम 2026-27 तक तैनात किया जाएगा, जो अवैध गतिविधियों पर नजर रखेगा। ई-स्पोर्ट्स विकास योजनाएं के मुताबिक, खेल मंत्रालय ₹1,000 करोड़ के फंड से 50 ट्रेनिंग अकादमियां स्थापित करेगा, साथ ही राष्ट्रीय ई-स्पोर्ट्स लीग को वार्षिक आयोजन का दर्जा देगा। लंबी अवधि में वैश्विक टूर्नामेंट्स के लिए सब्सिडी और टैक्स छूट सुनिश्चित की जाएगी। 

ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम, 2025 ई-स्पोर्ट्स उद्योग के लिए विशेष प्रावधानों के माध्यम से आधिकारिक मान्यता और संरचित विकास सुनिश्चित करता है। यह स्किल-आधारित गेम्स को जुए से अलग कर राष्ट्रीय खेल नीति में शामिल करता है। इसके आधिकारिक पंजीकरण प्रक्रिया निम्नवत है- ई-स्पोर्ट्स टाइटल्स और इवेंट्स का केंद्रीय ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी (COGA) द्वारा अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा, जो खेल मंत्रालय के अधीन काम करेगी। इसके माध्यम से केवल कौशल-आधारित गेम्स को मान्यता मिलेगी, सट्टेबाजी वाले बाहर रहेंगे।

जहां तक इंफ्रास्ट्रक्चर व प्रशिक्षण की बात है तो खेल मंत्रालय 50 ट्रेनिंग अकादमियां, रिसर्च सेंटर्स और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म स्थापित करेगा, जिसमें छात्रवृत्तियां और कोचिंग शामिल हैं। साथ ही नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के तहत राज्य-स्तरीय एकसमान नियम लागू होंगे। साथ ही आर्थिक प्रोत्साहन के तहत सरकारी सब्सिडी, स्पॉन्सरशिप सुरक्षा और मीडिया अधिकारों से उद्योग को वैश्विक हब बनाने का लक्ष्य है। जबकि नियम तोड़ने पर जुर्माना होगा, लेकिन अनुपालन से FDI और ब्रांड निवेश को प्राथमिकता मिलेगी। 

- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

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