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Jeffrey Epstein Island Scandal: क्या मानव अवशेषों को गलाने के लिए मंगवाया गया था 330 गैलन Acid?

जेफ्री एपस्टीन... यह नाम जब भी सामने आता है, अपने साथ काले रहस्यों की एक नई परत लेकर आता है। हाल ही में सार्वजनिक हुई 'एपस्टीन फाइल्स' ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सोशल मीडिया से लेकर जांच एजेंसियों तक के कान खड़े कर दिए हैं। मामला जुड़ा है एक रसीद से, जिसमें 330 गैलन सल्फ्यूरिक एसिड (गंधक का तेजाब) की खरीद का जिक्र है।

लेकिन चौंकाने वाली बात सिर्फ तेजाब की मात्रा नहीं, बल्कि इसकी टाइमिंग है। क्योंकि ये तेज़ाब ठीक उसी दिन पहुंचा तेजाब, जब FBI ने दबिश दीदस्तावेजों के मुताबिक, 12 जून 2018 को एपस्टीन के निजी द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' पर 55-55 गैलन के 6 ड्रम सल्फ्यूरिक एसिड पहुंचाए गए। हैरानी की बात यह है कि यह वही तारीख थी जब FBI ने आधिकारिक तौर पर एपस्टीन के सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क की जांच शुरू की थी। जैसे ही यह खबर बाहर आई, इंटरनेट पर थ्योरीज़ की बाढ़ आ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह महज इत्तेफाक था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश?

सबूत मिटाने की कोशिश या वाटर फिल्टर?

इस खुलासे ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है। इस इत्तेफाक ने संदेह पैदा कर दिया है और सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का दावा है कि इतनी भारी मात्रा में तेजाब का इस्तेमाल सबूतों या 'मानव अवशेषों' को ठिकाने लगाने के लिए किया जा सकता था। एक यूजर ने तो यहाँ तक लिखा, "इतने तेजाब का इस्तेमाल सिर्फ बॉडी को डिजॉल्व करने के लिए ही होता है।"
 

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दूसरी तरफ, फाइलों में मौजूद कुछ पुराने ईमेल (2013 के आसपास के) एक अलग कहानी बताते हैं। रसीद में जिक्र है कि यह एसिड द्वीप पर लगे RO प्लांट (वॉटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम) के रख-रखाव के लिए था। पानी का pH लेवल ठीक करने और उसे साफ करने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल तकनीकी रूप से आम बात है।

रहस्य जो अब भी बरकरार है

भले ही कागजों पर इसे 'वॉटर ट्रीटमेंट' का हिस्सा बताया गया हो, लेकिन लोग इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि जिस दिन फेडरल एजेंसियां जाल बिछा रही थीं, उसी दिन इतने ड्रम तेजाब की डिलीवरी क्यों हुई? क्या यह सच में पानी साफ करने के लिए था, या द्वीप पर मौजूद किसी 'गंदे राज' को हमेशा के लिए मिटाने की तैयारी थी?
 

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बता दें कि जेफ्री एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की तस्करी और एक बड़ा सेक्स रैकेट चलाने का आरोप था। 2019 में जेल में उसकी संदिग्ध मौत हो गई, लेकिन उसके पीछे छूटे सबूत आज भी दुनिया को डरा रहे हैं। अमेरिकी न्याय विभाग अब तक लाखों पन्ने, हजारों वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक कर चुका है, जिनमें बड़े-बड़े रईसों और राजनेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।

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पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को उचित सम्मान नहीं देता: Pak रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा कबूलनामा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अब तक के अपने सबसे कड़े बयान में अमेरिका पर इस्लामाबाद का अपने रणनीतिक हितों के लिए शोषण करने और फिर उसे शौचालय के कागज से भी बदतर बताकर त्याग देने का आरोप लगाया है। संसद में बोलते हुए आसिफ ने कहा कि 1999 के बाद, विशेष रूप से अफगानिस्तान के संबंध में, वाशिंगटन के साथ फिर से गठबंधन करने के पाकिस्तान के फैसले ने देश को स्थायी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने अमेरिकी समर्थन प्राप्त करने की कोशिश को एक गंभीर गलत निर्णय बताया, जिसके परिणाम पाकिस्तान दशकों बाद भी भुगत रहा है।

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आसिफ ने कहा कि 1999 के बाद, विशेषकर अफगानिस्तान संघर्ष में, अमेरिका का साथ देने के पाकिस्तान के फैसले ने गहरा और दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने स्वीकार किया कि देश ने खुद को ऐसे युद्धों में घसीटने दिया जो वास्तव में कभी उसके अपने नहीं थे। उन्होंने इस लंबे समय से चले आ रहे दावे को खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका धार्मिक कर्तव्य पर आधारित थी। उनके अनुसार, लोगों को जिहाद के नाम पर एक भ्रामक कहानी के तहत लामबंद किया गया, जिसने पाकिस्तान के भीतर उग्रवाद और अराजकता को ही बढ़ावा दिया। 

एक चौंकाने वाले खुलासे में, मंत्री ने कहा कि इन युद्धों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली में भी बदलाव किए गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि विदेशी हितों से प्रेरित संघर्षों में शामिल होने को उचित ठहराने के लिए वैचारिक परिवर्तन किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1980 के दशक में सोवियत विरोधी युद्ध धर्म के बारे में नहीं, बल्कि अमेरिकी भू-राजनीतिक लक्ष्यों के बारे में था। फिर भी पाकिस्तान ने सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह से इसकी कीमत चुकाई।
 

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आसिफ ने पूर्व सैन्य नेताओं को भी नहीं बख्शा। उन्होंने जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज़ मुशर्रफ पर अल्पकालिक लाभ के लिए पाकिस्तान को बाहरी युद्धों में घसीटने का आरोप लगाया, जिसके चलते वैश्विक शक्तियों के चले जाने के बाद भी देश को आतंकवाद, कट्टरता और आर्थिक नुकसान से जूझना पड़ा। 9/11 के बाद, पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ़ मोर्चा खोलकर आतंकवाद के खिलाफ़ अमेरिकी युद्ध का समर्थन किया। लेकिन जब वाशिंगटन ने अंततः अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला ली, तो पाकिस्तान हिंसा और अस्थिरता से जूझता रह गया।

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चरनोई भूमि को लेकर दायर जनहित याचिका को झटका, हाई कोर्ट ने हटाई रोक,इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना को राहत

नीमच जिले की गौचर/चरनोई भूमि को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। वादी जगदीश कुमावत की ओर से दायर जनहित याचिका में कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को लगाया गया स्टे आदेश निरस्त कर दिया है, जिससे राज्य सरकार की इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना को बड़ी … Wed, 11 Feb 2026 14:14:33 GMT

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