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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से टैरिफ की प्रभावी दर कम होकर 12-13 प्रतिशत रहने का उम्मीद : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय निर्यात पर टैरिफ की प्रभावी दर कम होकर 12-13 प्रतिशत होने की उम्मीद है, बशर्ते रेसिप्रोकल टैरिफ की दर 18 प्रतिशत पर बरकरार रहे। यह जानकारी एक रिसर्च रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी 40-45 प्रतिशत है, जिस पर टैरिफ जीरो है और सेक्शन 232 के तहत लगने वाले टैरिफ को मिला दिया जाए तो प्रभावी टैरिफ की दर 12 प्रतिशत से कुछ ऊपर रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पहले चरण में सेक्शन 232 के तहत भारतीय निर्यात पर टैरिफ पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। ऐसे में सेक्शन 232 के तहत भारतीय ऑटोमोबाइल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लोहा, स्टील और एल्युमिनियम पर करीब 25 प्रतिशत टैरिफ जारी रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने से अधिक श्रम उपयोग वाले क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसमें टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण जैसे सेक्टर शामिल है।

भारत द्वारा अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान अगले पांच वर्षों में खरीदने पर बोफा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह करीब 100 अरब डॉलर का सालाना सामान खरीदने का लक्ष्य है। मौजूदा समय में भारत का आयात बिल करीब 750 अरब डॉलर का है और इसमें अमेरिकी सामानों की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है। इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अमेरिका से ज्यादा आयात का भारत के चालू खाते पर काफी सीमित असर होगा, क्योंकि भारत अन्य देशों विशेषकर रूस की जगह अमेरिका से ऊर्जा खरीद करेगा।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सेवाओं के निर्यात में सुधार से चालू खाता अधिशेष को बढ़ावा मिल सकता है, और दिसंबर 2025 तक चालू खाता अधिशेष में रहने का अनुमान है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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वैज्ञानिक जांच में खरा उतरा पतंजलि शहद, Elsevier के अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

पतंजलि ने दावा किया है कि उसके शहद पर किया गया वैज्ञानिक अध्ययन अब वैश्विक मंच पर प्रकाशित हो चुका है. यह शोध Elsevier के प्रतिष्ठित जर्नल Applied Food Research में छपा है. कंपनी के अनुसार यह उपलब्धि उसकी गुणवत्ता और शुद्धता के दावे को मजबूत करती है.

पतंजलि का कहना है कि वह अपने हर उत्पाद में गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. इसी प्रतिबद्धता के तहत शहद के विभिन्न नमूनों की जांच कराई गई.

आचार्य बालकृष्ण का बयान

इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि अपने वादों पर कायम रहती है. कंपनी का उद्देश्य देश को मिलावट से मुक्त करना है. उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य उत्पादों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय बाजार में संदेह की नजर से देखा जाता है. लेकिन यह शोध दिखाता है कि भारत में भी उच्च स्तर का वैज्ञानिक अनुसंधान संभव है. उन्होंने इसे केवल पतंजलि की सफलता नहीं, बल्कि पूरे भारतीय एफएमसीजी उद्योग के लिए गर्व का विषय बताया है. 

शहद की शुद्धता पर क्या कहता है शोध? 

कंपनी के अनुसार अध्ययन में यह पाया गया कि पतंजलि शहद में बाहरी शर्करा, सिंथेटिक सिरप या अवांछित रासायनिक अवशेष नहीं मिले. इससे आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन प्रक्रिया की सख्त निगरानी का संकेत मिलता है. कच्चे माल की खरीद से लेकर अंतिम पैकेजिंग तक हर चरण पर गुणवत्ता जांच की जाती है.

25 बैचों की उन्नत तकनीकों से जांच

पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि इस अध्ययन में शहद के 25 अलग-अलग बैचों की जांच की गई. परीक्षण के लिए HPLC, HPTLC और UHPLC जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ. रिपोर्ट के अनुसार सभी बैच FSSAI द्वारा निर्धारित मानकों पर खरे उतरे. 

साथ ही बैच-टू-बैच गुणवत्ता में समानता भी देखी गई. डॉ. वार्ष्णेय ने कहा कि सुरक्षित और शुद्ध उत्पाद देना कंपनी की प्राथमिकता है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर वैश्विक परीक्षण मानकों को अपनाया जाता है.

पतंजलि शहद मापदंडों पर किस प्रकार खरा उतरा

पतंजलि शहद का दावा है कि यह भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित मापदंडों और 100 से अधिक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है. कंपनी के अनुसार, पतंजलि शहद 100% शुद्ध, प्राकृतिक और बिना गर्म किया हुआ (raw) है, जो मधुमक्खियों के अमृत से निर्मित है और FSSAI परीक्षणों को सफलतापूर्वक पास करता है. 

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