सिर्फ पपीता ही नहीं, बीज और पत्ते भी हैं लाभकारी, आयुर्वेद से जानें लाभ
नई दिल्ली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। हर फल के अपने गुण होते हैं, और पपीता एक ऐसा फल है जिसमें बुखार से लेकर रक्त को शुद्ध करने और त्वचा को निखारने की शक्ति होती है।
यही कारण है कि पपीते और पपीते की पत्तियों को आयुर्वेद में औषधि का स्थान दिया गया है और इसे ‘अमृतफल’ कहा गया है। पपीते और उसकी पत्तियों में इतनी शक्ति होती है कि ये शरीर के तीनों दोषों को संतुलित रखने में मदद करते हैं और पाचन सुधारने में भी सहायक हैं।
पपीता एक ऐसा फल है जो हर मौसम में आसानी से मिल जाता है और इसमें पाया जाने वाला पपैन एंजाइम पेट और आंतों के लिए लाभकारी होता है। यह पाचन को सुधारने, शरीर को शुद्ध रखने और पोषक तत्वों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिर्फ पपीता ही नहीं बल्कि पपीते के पत्ते और बीज भी लाभकारी होते हैं और आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। पत्तियों और बीजों का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है लेकिन दवा की तरह काम करता है।
अगर आप स्किन से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं तो पपीते का सेवन और लेप दोनों ही त्वचा के लिए लाभकारी होते हैं। इसके लिए पपीते के गूदे में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह स्किन को टाइट करने और दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इसके सेवन और लेपन से चेहरे पर अलग ही निखार आता है। इसके अलावा, अगर बुखार की वजह से कमजोरी महसूस हो रही है, रक्त में अशुद्धता बढ़ गई है या प्लेटलेट्स कम हो गई हैं, तब पपीते के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से लाभ मिलेगा। पत्तों से बना काढ़ा रक्त को शुद्ध करता है और बीमारियों को कम करता है।
बुखार की वजह से अगर रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है तो रोजाना पपीते का सेवन करना चाहिए। पपीते में मौजूद विटामिन सी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही इसके पत्तों का रस भी पी सकते हैं। इसके साथ अगर तेजी से बाल झड़ रहे हैं तो पपीते के बीजों का पेस्ट बालों को मजबूती देने में मदद करता है और रूखेपन से भी राहत मिलती है। हफ्ते में 1 बार बालों पर पेस्ट लगाना अच्छा रहेगा।
मासिक धर्म में दर्द की परेशानी आम हो चुकी है। गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि की वजह से मासिक धर्म के समय दर्द की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में पपीते का सेवन दर्द में राहत देता है।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जापान के संसदीय चुनाव में ताकाइची की ऐतिहासिक जीत, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने दी बधाई
सोल, 9 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को संसदीय चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत की बधाई दी। ली ने उम्मीद जताई कि उनकी लीडरशिप में जापान विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।
रविवार को हुए संसदीय चुनाव में ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को 465 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में दो-तिहाई बहुमत मिला। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद ली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बधाई संदेश पोस्ट किया।
ली ने लिखा, मैं आपको चुनाव में जीत के लिए दिल से बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि आपके नेतृत्व में जापान और तरक्की करेगा।
ली ने कहा कि सोल और टोक्यो ने जनवरी में जापान के नारा में हुई शिखर वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के अगले 60 साल को आकार देने की दिशा में पहला कदम उठाया था और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर बल दिया था।
ली ने कहा, मुझे उम्मीद है कि दोनों देश विश्वास और दोस्ती के आधार पर संबंधों को व्यापक और गहरा करेंगे, और कहा कि वह निकट भविष्य में शटल डिप्लोमेसी के अगले दौर के माध्यम से ताकाइची का दक्षिण कोरिया में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
जापानी प्रधानमंत्री के पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद, दोनों नेताओं ने पिछले अक्टूबर में ग्योंगजू में एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन फोरम के मौके पर शिखर वार्ता की थी।
बाद में उन्होंने पिछले महीने नारा, जो ताकाइची का गृहनगर है, में शटल डिप्लोमेसी के नाम से जाने जाने वाले नेता-स्तरीय एक्सचेंज प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर दूसरा शिखर सम्मेलन किया था।
नारा में हुई बातचीत के दौरान, ली और ताकाइची ने सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। ली ने अपने गृहनगर एंडोंग में अगला शिखर सम्मेलन आयोजित करने का विचार भी रखा था।
ली ने जापान के साथ कूटनीति के लिए दो-तरफा दृष्टिकोण अपनाने का वादा किया है, जिसमें भविष्य-उन्मुख सहयोग का विस्तार किया जाएगा, साथ ही जापान के 1910-45 के कोरिया पर औपनिवेशिक शासन से उत्पन्न अनसुलझे युद्धकालीन मुद्दों को भी संबोधित किया जाएगा।
--आईएएनएस
केआर/
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