विश्व का पहला 20-मेगावाट का अपतटीय पवन जनरेटर-सैट सफलतापूर्वक ग्रिड से जुड़ा
बीजिंग, 6 फरवरी (आईएएनएस)। चाइना थ्री गॉर्जेस ग्रुप के अनुसार, दक्षिणी चीन के फुच्येन प्रांत के समुद्री क्षेत्र में विश्व के पहले 20-मेगावाट के अपतटीय पवन जनरेटर-सैट का सफल कमीशनिंग पूरा हो गया है और इसे ग्रिड से जोड़ दिया गया है।
यह पहली बार है जब चीन ने समुद्र में 20-मेगावाट की अति-क्षमता वाले पवन जनरेटर-सैट को सफलतापूर्वक स्थापित और कमीशन किया और उसे ग्रिड से जोड़ा है। यह अति-क्षमता वाले पवन जनरेटर-सैट के लिए चीन की अनुसंधान, विकास, निर्माण, अपतटीय निर्माण और संचालन क्षमताओं में एक नया मील का पत्थर है।
यह 20-मेगावाट का अपतटीय पवन जनरेटर-सैट तट से 30 किलोमीटर से अधिक दूर और 40 मीटर से अधिक गहरे पानी में स्थापित किया गया है। इसके केंद्र की ऊंचाई 174 मीटर है, जो 58 मंजिला इमारत के बराबर है। इम्पेलर का व्यास 300 मीटर है, और इसका स्वीप क्षेत्र 10 मानक फुटबॉल मैदानों के बराबर है।
निर्धारित परिचालन स्थितियों के तहत, यह पवन जनरेटर-सैट प्रतिवर्ष 8 करोड़ किलोवाट-घंटे से अधिक बिजली उत्पन्न करता है, जो लगभग 44,000 घरों की वार्षिक बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने और लगभग 22,000 टन मानक कोयले के स्थान पर उपयोग करने के लिए पर्याप्त है।
यह पवन जनरेटर-सैट चीन में स्वतंत्र रूप से विकसित एयरफॉइल ब्लेड का उपयोग करता है। हल्के डिजाइन और डिजिटल बुद्धिमत्तापूर्ण एकीकरण के माध्यम से, प्रति मेगावाट वजन उद्योग के औसत की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक कम हो गया है।
पवन ऊर्जा संग्रहण और बिजली उत्पादन दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे गहरे समुद्र में चीन की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए तकनीकी और उपकरण संबंधी सहायता उपलब्ध होती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Bangladesh Violence: ढाका में फिर हिंसा के बाद बवाल, चुनाव से 6 दिन पहले यूनुस के घर के बाहर कर्माचरियों का प्रदर्शन
Bangladesh Violence: बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर राजनीतिक तनाव और हिंसा की आग में झुलस गई है. आम चुनाव में अब महज़ छह दिन बचे हैं, और ऐसे समय में भड़की हिंसा ने सरकार से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है. शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर सरकारी कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन ने अचानक उग्र रूप ले लिया, जिससे हालात बेकाबू हो गए.
वेतनमान लागू करने की मांग पर सड़क पर उतरे कर्मचारी
यह प्रदर्शन नौवें राष्ट्रीय वेतनमान को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर किया गया था. देशभर से आए सरकारी कर्मचारी पहले शहीद मीनार पर एकत्र हुए और फिर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सरकारी आवास ‘जमुना’ की ओर मार्च करने लगे. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार उनकी आजीविका से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज कर रही है.
प्रतिबंध के बावजूद आगे बढ़ी भीड़
अंतरिम सरकार की ओर से बताया गया कि 5 फरवरी को जमुना और उसके आसपास प्रदर्शन पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका था. बावजूद इसके, 6 फरवरी को प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए जमुना की ओर बढ़ने लगे. हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब कुछ लोग वॉटर कैनन पर चढ़ गए.
पुलिस की कार्रवाई, आंसू गैस और लाठीचार्ज
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को वाटर कैनन, साउंड ग्रेनेड और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा. जब भीड़ पीछे नहीं हटी, तो लाठीचार्ज भी किया गया. ढाका महानगर पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी पर गोली नहीं चलाई गई और न ही किसी घातक हथियार का इस्तेमाल हुआ.
शाहबाग में टूटा बैरिकेड, बढ़ा तनाव
सुबह करीब 11:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग इलाके में लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए और जबरन जमुना के एंट्री गेट की ओर बढ़ने लगे. नारेबाजी के दौरान प्रदर्शनकारी कहते सुने गए...“पेट में चावल नहीं, तो मुंह में विकास कैसा?” इस नारे ने सरकार के विकास दावों पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया.
पुलिस अधिकारी के बयान से भड़के प्रदर्शनकारी
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब रमना डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस मसूद आलम ने मौके पर मौजूद एक सरकारी अधिकारी से पूछ लिया, “क्या आप चुनाव में गड़बड़ी करने के लिए जमुना आए हैं?”
इस टिप्पणी से प्रदर्शनकारी और उग्र हो गए.
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस की सख्ती जारी रही, तो इसके गंभीर राजनीतिक नतीजे हो सकते हैं। एक कर्मचारी ने साफ कहा, 'अगर सरकारी कर्मचारियों पर हमले बंद नहीं हुए, तो हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे.'
चुनावी माहौल पर मंडराता संकट
घटना में कई लोगों के घायल होने की खबर है. चुनाव से ठीक पहले भड़की यह हिंसा न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि पूरे चुनावी माहौल पर सवाल खड़े कर रही है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार हालात को कैसे संभालती है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation


















