ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ जोश हेज़लवुड आधिकारिक रूप से T20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि की है कि हैमस्ट्रिंग इंजरी से उबरने के लिए उनके पास अब पर्याप्त समय नहीं बचा है।
गौरतलब है कि इससे पहले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिए थे कि हेज़लवुड टूर्नामेंट के शुरुआती कुछ मैच मिस करेंगे और सुपर-8 चरण से टीम से जुड़ सकते हैं। हालांकि मौजूद जानकारी के अनुसार मेडिकल और फिटनेस अपडेट्स उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिसके बाद चयनकर्ताओं को यह कठिन फैसला लेना पड़ा।
चयन समिति के सदस्य टोनी डोडेमेड ने बताया कि टीम प्रबंधन हेज़लवुड की वापसी को लेकर आशावादी था, लेकिन मौजूदा हालात में उनका रिहैबिलिटेशन तेज़ करना जोखिम भरा हो सकता था। इसी वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर रखने का निर्णय लिया गया।
यह चोट हेज़लवुड को एशेज 2025-26 से ठीक पहले लगी थी, जिसके चलते वह पूरी टेस्ट सीरीज़ नहीं खेल सके थे। उस दौरान भी उम्मीद जताई जा रही थी कि वह कम से कम एक टेस्ट में वापसी कर सकते हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया है।
ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि पहले ही पैट कमिंस स्ट्रेस इंजरी के चलते टूर्नामेंट से बाहर हैं। ऐसे में तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की जिम्मेदारी अब ज़ेवियर बार्टलेट और बेन ड्वार्शुइस पर अधिक आ गई हैं, जो फिलहाल फिट फ्रंटलाइन पेसर माने जा रहे है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने साफ किया है कि हेज़लवुड के रिप्लेसमेंट का ऐलान अभी नहीं किया जाएगा। टीम प्रबंधन का मानना है कि शुरुआती मैचों के लिए स्क्वॉड संतुलित है और जरूरत पड़ने पर बाद में फैसला लिया जाएगा।
हालिया फॉर्म को देखते हुए सीन एबॉट एक मजबूत विकल्प के तौर पर सामने हैं। वह हाल ही में पाकिस्तान दौरे पर गई ऑस्ट्रेलियाई T20I टीम का हिस्सा थे और जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सकता है।
हेज़लवुड का बाहर होना ऑस्ट्रेलिया की खिताबी उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब उपमहाद्वीपीय हालात में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। IPL 2025 में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए 22 विकेट लेकर खिताबी अभियान में अहम भूमिका निभाई थी।
ऑस्ट्रेलिया अपना वर्ल्ड कप अभियान 11 फरवरी को आयरलैंड के खिलाफ शुरू करेगा और ग्रुप चरण में उसे जिम्बाब्वे, श्रीलंका और ओमान से भी मुकाबला करना है, जहां तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
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इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व प्रमुख एहसान मनी ने आईसीसी के मौजूदा चेयरमैन जय शाह से अपील की है कि वह खुद पाकिस्तान जाकर वहां की सरकार से बात करें और T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार को खत्म करने की कोशिश करे।
गौरतलब है कि यह मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो में प्रस्तावित है, लेकिन पाकिस्तान सरकार के रुख के चलते इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार एहसान मनी का मानना है कि जय शाह को न सिर्फ बहिष्कार खत्म कराने की पहल करनी चाहिए, बल्कि पाकिस्तान की आपत्तियों और शिकायतों को भी सीधे सुनना चाहिए।
दरअसल, T20 वर्ल्ड कप इस समय उपमहाद्वीप की राजनीति का अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। शुरुआत में बांग्लादेश ने पाकिस्तान के समर्थन से भारत आने से इनकार कर दिया था और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया। आईसीसी ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और तय समय तक पुष्टि न मिलने पर बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल कर लिया गया।
इसके बाद हालात और बिगड़ गए। पीसीबी चेयरमैन और प्रभावशाली मंत्री मोहसिन नक़वी ने इस फैसले को अन्याय करार दिया और फिर पाकिस्तानी सरकार ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मैदान में न उतरने का फैसला ले लिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा को पीसीबी और आईसीसी के बीच मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन एहसान मनी इससे संतुष्ट नहीं दिखते। उन्होंने साफ कहा कि यह जिम्मेदारी सीधे आईसीसी चेयरमैन को निभानी चाहिए और पाकिस्तान सरकार से आमने-सामने बातचीत करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद में आर्थिक पहलू भी अहम है। अगर भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं होता है, तो न सिर्फ दोनों बोर्ड्स बल्कि आईसीसी और अन्य सदस्य देशों को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
कानूनी पहलू भी इस विवाद को और जटिल बना रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने वर्ल्ड कप के लिए मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में बहिष्कार की स्थिति कानूनी कार्रवाई को जन्म दे सकती है। हालांकि एहसान मनी ने माना कि पाकिस्तान का पक्ष पूरी तरह मजबूत नहीं है, लेकिन एक सक्षम कानूनी टीम इस पर बहस खड़ी कर सकती है।
मनी का यह भी कहना है कि आईसीसी ने हाइब्रिड मॉडल के तहत पाकिस्तान के मैच भारत से हटाकर श्रीलंका में कराए, इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे। उनके अनुसार भारत की क्रिकेट संस्था के रुख ने पाकिस्तान को इतना बड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया है।
कुल मिलाकर, भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर अनिश्चितता अभी खत्म होती नहीं दिख रही है और आने वाले दिनों में आईसीसी की भूमिका इस पूरे विवाद में निर्णायक साबित हो सकती हैं।
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