मंत्री बोले-कार्यक्रम में नहीं आईं तो लाड़ली-बहनों के नाम कटेंगे:सीहोर में करण सिंह की धमकी, कहा– CEO को कहकर रिपोर्ट भिजवाऊंगा
सीहोर जिले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इछावर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम धामंदा में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लाड़ली-बहना योजना की लाभार्थियों को चेतावनी दी कि यदि वे कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगी, तो उनके नाम योजना से काट दिए जाएंगे। मंत्री वर्मा का यह बयान नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सामने आया। उन्होंने कहा कि ग्राम धामंदा में 894 लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, इसके बावजूद सरकारी कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति बेहद कम रहती है। एक दिन सभी बहनों को बुलाएंगे मंत्री ने मंच से कहा कि वे सीईओ से बात कर एक दिन सभी लाड़ली बहनों को बुलाएंगे। यदि उस दिन भी वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं, तो उनकी रिपोर्ट भिजवाकर योजना से नाम कटवाने की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कांग्रेस शासनकाल में महिलाओं को इस तरह की कोई आर्थिक सहायता मिलती थी या नहीं। पीएम दिल्ली से भेज रहे गेहूं मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से गेहूं भेज रहे हैं और किसानों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं, लेकिन लोग सरकार की योजनाओं की अहमियत नहीं समझ पा रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने सीहोर जिले के ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपए की लागत से बने नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपए की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया। यह खबर भी पढ़ें ढाई साल में 5.70 लाख घटी लाड़ली बहनों की संख्या मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में ढाई साल के अंतराल में 5 लाख 70 हजार से अधिक महिलाओं के नाम बाहर हो गए हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार ही रह गई है। पढ़ें पूरी खबर
सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकारी DGP प्रथा पर सवाल उठाए:कहा- योग्य और वरिष्ठ अधिकारी वंचित हो रहे; गौरव यादव साढ़े 3 साल से पंजाब के एक्टिंग डीजीपी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में कार्यकारी DGP नियुक्त करने की प्रथा पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह तरीका योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को डीजीपी पद के लिए विचार से वंचित करता है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए समय पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को डीजीपी चयन के लिए नाम नहीं भेजतीं। इसके बजाय कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर देती हैं। कोर्ट ने UPSC को कहा कि यदि कोई राज्य ऐसा करने में विफल रहता है तो UPSC सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी पंजाब के लिए अहम है क्योंकि यहां के DGP गौरव यादव भी कार्यवाहक हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 4 जुलाई 2022 को उन्हें एक्टिंग DGP बनाया था। तब से साढ़े 3 साल से यादव इसी तरह से काम कर रहे हैं। हाल ही में जेल से बाहर आए अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में परमानेंट DGP नियुक्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा- UPSC अपील करे, जवाबदेही तय होगी कोर्ट ने आदेश में कहा, “हम UPSC को अधिकृत करते हैं कि वह राज्यों को पत्र लिखकर संबंधित डीजीपी की नियुक्ति के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने को कहे। यदि ऐसे प्रस्ताव नहीं भेजे जाते हैं, तो UPSC को प्रकाश सिंह मामले में आवेदन दायर करने का निर्देश देते हैं। यह स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में संबंधित राज्यों की जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक परिणाम सामने आएंगे। DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के क्या निर्देश सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी राज्य में पुलिस प्रमुख (डीजीपी) की नियुक्ति राज्य सरकार की ओर से UPSC द्वारा तैयार किए गए तीन वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल में से की जाती है। इसके लिए सरकार पैनल भेजती है, जिसमें सीनियोरिटी के हिसाब से सरकार को 3 नाम भेजे जाते हैं। इनमें से किसी एक को डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी क्यों की कोर्ट का यह निर्देश तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए आया, जिसमें UPSC को राज्य सरकार की ओर से भेजे गए नामों को प्रक्रिया में लेने का निर्देश दिया गया था। UPSC ने हाईकोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि राज्य सरकार ने डीजीपी चयन की प्रक्रिया में अत्यधिक देरी की है। UPSC के अनुसार, तेलंगाना के अंतिम डीजीपी अनुराग शर्मा 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे और इसके बाद राज्य सरकार ने लंबे समय तक UPSC को कोई सिफारिश नहीं भेजी। UPSC का कहना था कि राज्य सरकार ने अंततः अप्रैल 2025 में सिफारिश भेजी, लेकिन UPSC ने यह कहते हुए उस पर कार्रवाई नहीं की कि 2017 से अब तक अत्यधिक विलंब हो चुका है। UPSC ने इसे एक गंभीर चूक बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को पहले प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण या आदेश लेना चाहिए था। आयोग ने यह भी कहा कि तेलंगाना अकेला ऐसा राज्य नहीं है जो इस तरह की देरी की रणनीति अपना रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता पर सहमति जताई सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की चिंता से सहमति जताई और कहा कि इस देरी से कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिनमें से कई अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और डीजीपी पद के लिए उन पर विचार ही नहीं हो सका। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि UPSC की ओर से आपत्ति उठाने से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि इससे चूक करने वाले राज्यों को ही लाभ होगा। इसके बाद अदालत ने UPSC को तेलंगाना के लिए डीजीपी चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। पंजाब में साढ़े 3 साल से एक्टिंग डीजीपी पंजाब में पिछले करीब साढ़े 3 साल से 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव याद डीजीपी का पद संभाले हैं। उनकी 4 जुलाई 2022 को इस पद पर नियुक्ति हुई। पंजाब सरकार ने इस संबंध में UPSC को नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल नहीं भेजा। पंजाब सरकार ने 2023 में पुलिस एक्ट में संशोधन कर UPSC को बाइपास करने की कोशिश की थी, लेकिन वर्तमान में कोई नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। इस विषय पर मजीठिया ने भी ये 4 बातें लिखीं...
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
















.jpg)


/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)


