झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, इन खिलाड़ियों को मिलेगी पेंशन, अन्य प्रस्तावों पर भी लगी मुहर
Jharkhand Cabinet: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इस बैठक के सबसे अहम फैसलों में राज्य के सीनियर खिलाड़ियों को पेंशन देने से जुड़ा निर्णय शामिल है. सरकार ने खिलाड़ियों की पेंशन योजना को नए सिरे से तैयार किया है ताकि इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को मिल सके.
कैबिनेट ने तय किया है कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के वे खिलाड़ी, जिन्होंने राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं, उन्हें हर महीने पेंशन दी जाएगी. पहले जो व्यवस्था थी, उसमें कई तरह की तकनीकी और नियमों से जुड़ी दिक्कतें थीं, जिसके कारण कई खिलाड़ी आवेदन ही नहीं कर पा रहे थे. अब नई व्यवस्था में इन कमियों को दूर किया गया है.
सरकार के फैसले के अनुसार ओलंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ी और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ियों को हर महीने 20 हजार रुपये की पेंशन दी जाएगी. वहीं वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, सैफ गेम्स और नेशनल गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी पेंशन मिलेगी. प्रतियोगिता के स्तर के हिसाब से पेंशन की राशि तय की गई है, जो 5 हजार रुपये से लेकर 16 हजार रुपये तक होगी. नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को न्यूनतम 5 हजार रुपये मासिक पेंशन देने का प्रस्ताव है.
अन्य प्रस्तावों पर लगी मुहर
इसके अलावा राज्य के विश्वविद्यालयों में पदों के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. वहीं, हाल के दिनों में कोर्ट से मिले आदेशों के आधार पर तैयार किए गए कुछ प्रस्तावों पर भी कैबिनेट की सहमति मिल गई है.
हालांकि निकाय चुनाव को लेकर राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए कैबिनेट के फैसलों पर कोई आधिकारिक ब्रीफिंग नहीं की गई.
इधर, कार्मिक विभाग से जुड़े एक अहम प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. 14वीं जेपीएससी परीक्षा में अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट देने के मुद्दे पर शीर्ष स्तर पर सहमति नहीं बन पाई. पहले अगस्त 2023 को कट-ऑफ डेट मानने का प्रस्ताव था, लेकिन उम्र में कितनी छूट दी जाए, इस पर असहमति के कारण यह प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया है. अभ्यर्थी अगस्त 2018 को कट-ऑफ डेट मानने की मांग कर रहे हैं.
Ghaziabad Suicide Case: कोरियन दोस्तों की गुत्थी में उलझी पुलिस, बेचे गए मोबाइल से खुल सकता है राज
Ghaziabad Suicide Case: गाजियाबाद आत्महत्या मामले में पुलिस को घटनास्थल से आठ पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है. इसमें लिखा है कि तीनों किशोरियां अपनी सबसे छोटी बहन देबू की कोरियन दोस्तों से बात करवाती थीं. इसी बात के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बहनों ने कोरियन दोस्त बनाए कैसे और वे किस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए उनसे बात करती थीं.
इसलिए पुलिस ढूंढ़ रही मोबाइल
हालांकि, शुरुआती जांच में पुलिस को बच्चियों की मां के मोबाइल फोन से कोई भी कोरियन ऐप, गेम या ऑनलाइन टास्क गेम नहीं मिला है. साइबर टीम ने फोन की जांच की, लेकिन उसमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे कोरियन कनेक्शन की पुष्टि हो सके. इसी वजह से पुलिस अब उन दो मोबाइल फोन को ढूंढने में लगी है, जिन्हें पहले बच्चियों से छीनकर बेच दिया गया था. पुलिस को उम्मीद है कि इन्हीं मोबाइल फोन से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है.
मां के मोबाइल को फॉरेंसिक लैब भेजा
बताया गया है कि तीनों बहनों ने जिस कमरे की खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या की, वहीं फॉरेंसिक टीम को उनकी मां का मोबाइल फोन मिला था. इस फोन को अब फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा ताकि गहराई से जांच की जा सके.
IMEI नंबर के जरिए ट्रेस करने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले पिता चेतन कुमार ने निशिका और प्राची को एक-एक मोबाइल फोन दिलवाया था. लेकिन बाद में एक फोन तीन महीने पहले और दूसरा फोन करीब 10 दिन पहले उनसे छीनकर बेच दिया गया था. अब पुलिस इन दोनों फोन के आईएमईआई नंबर के जरिए उन्हें ट्रेस करने की कोशिश कर रही है.
स्कूल जाना कर दिया था बंद
पिता चेतन कुमार का कहना है कि भले ही पुलिस को अभी तक कोई ऑनलाइन टास्क गेम नहीं मिला हो, लेकिन उनकी बेटियां पिछले तीन साल से ऐसे गेम खेल रही थीं. वे कोरिया जाने की जिद भी करती थीं, जिसे लेकर उन्हें कई बार समझाया गया. चेतन ने यह भी बताया कि उनकी बेटियां स्कूल जाना बंद कर चुकी थीं क्योंकि पहले फेल होने के कारण वे शर्म महसूस करती थीं.
14 साल की प्राची बताती थी खुद को लीडर
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें हमेशा एक साथ रहती थीं. 14 साल की प्राची को परिवार वाले लीडर मानते थे. वही तय करती थी कि तीनों को क्या करना है. तीनों का स्वभाव जिद्दी था और वे हर काम जैसे कि खाना, नहाना या रोजमर्रा के काम एक साथ करती थीं.
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