बजट ने आर्थिक विकास और उद्योग प्रतिस्पर्धा को मजबूती दी: सीआईआई गुजरात
गांधीनगर, 1 फरवरी (आईएएनएस)। कनफेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) गुजरात ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026 ने आर्थिक विकास को तेज करने, विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और जीवनयापन को आसान बनाने के लिए एक मजबूत और सकारात्मक ढांचा पेश किया है।
गांधीनगर में आयोजित लाइव बजट व्यूइंग सत्र के दौरान सीआईआई गुजरात ने बताया कि बजट तत्काल आर्थिक प्रोत्साहन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण के बीच संतुलन रखता है, जिसे ‘संकल्प’ के केंद्रीय विषय और आर्थिक विकास, आकांक्षाएं और समान पहुंच के तीन प्राथमिक उद्देश्यों के तहत मार्गदर्शन मिला है।
सत्र में भाग लेने वाले उद्योग नेताओं ने उच्च सार्वजनिक निवेश, संरचनात्मक सुधार और लक्षित क्षेत्रीय पहलों को सतत विकास के लिए प्रमुख साधन बताया।
सीआईआई गुजरात स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष प्रेमराज केश्येप ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने से अवसंरचना और भारी उद्योगों में बहुगुणात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “पूंजीगत वस्तुओं पर ध्यान, निर्माण और अवसंरचना उपकरणों के लिए नई योजना और हाई-टेक टूल रूम्स की स्थापना से आयात निर्भरता काफी कम होगी। प्रस्तावित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, जिनमें मुंबई-पुणे मार्ग शामिल है, औद्योगिक कनेक्टिविटी को और मजबूत करेंगे।”
सीआईआई गुजरात के उपाध्यक्ष अचाल बकेरी ने शहरीकरण पर बजट की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ सिटी इकोनॉमिक रीजन पहल, शहरों को विकास के इंजन के रूप में मान्यता देती है और शहरी क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को उजागर करने में मदद करेगी।
सत्र में विनोद अग्रवाल, सीआईआई गुजरात पैनल फॉर पॉलिसी एडवोकेसी के संयोजक ने कहा कि गुजरात को तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने के प्रस्तावित समर्थन से लाभ होगा। उन्होंने बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम घरेलू विनिर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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Union Budget 2026: STT बढ़ते ही लड़खड़ाया शेयर बाजार, बजट 2026 ने बिगाड़ा निवेशकों का मूड
Union Budget 2025: केंद्रीय बजट 2026 का असर शेयर बाजार पर नकारात्मक रहा. बजट पेश होने के दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1547 अंक गिरकर 80,723 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 495 अंक टूटकर 24,825 के स्तर पर आ गया. बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा और निफ्टी बैंक 1193 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ.
उठाना पड़ा निवेशकों को भारी नुकसान
इस तेज गिरावट की वजह से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. बाजार के आखिरी घंटों में ही निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए. बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार को 460 लाख करोड़ रुपये था, जो बजट वाले दिन घटकर करीब 449 लाख करोड़ रुपये रह गया.
सबसे ज्यादा नुकसान किसे
बीएसई के टॉप-30 शेयरों में से सिर्फ टीसीएस, इंफोसिस, टाइटन और सनफार्मा में हल्की मजबूती देखने को मिली. बाकी 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा नुकसान एसबीआई को हुआ, जिसके शेयर करीब 6 फीसदी टूट गए. अडानी पोर्ट्स में 5.5 फीसदी और BEL में 5.36 फीसदी की गिरावट आई. आईटीसी के शेयर भी 3 फीसदी से ज्यादा टूटे. सेक्टर की बात करें तो सिर्फ आईटी सेक्टर हरे निशान में रहा. पीएसयू बैंक, मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
बाजार में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी मानी जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने का ऐलान किया. फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT को 0.025 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है, जबकि ऑप्शन ट्रेडिंग पर इसे 0.1 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है. इस फैसले से खासतौर पर शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और डेरिवेटिव निवेशकों में निराशा दिखी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया.
क्या होता है STT
STT एक तरह का टैक्स है जो शेयर बाजार में शेयर, म्यूचुअल फंड या डेरिवेटिव्स की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है. जब भी आप शेयर बाजार में कोई सौदा करते हैं, उस पर यह टैक्स अपने-आप कट जाता है. यह टैक्स आपको मुनाफा हो या नुकसान, दोनों ही हालत में देना पड़ता है. STT आपकी ट्रांजैक्शन की कुल रकम पर लगता है और स्टॉक एक्सचेंज इसे सीधे सरकार के पास जमा कर देता है, इसलिए आपको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होती. अब टैक्स की दरें बढ़ने की वजह से, पहले की तुलना में हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा पैसा टैक्स के रूप में कटेगा.
आगे बाजार की चाल पर नजर
अब सबकी नजर सोमवार को बाजार खुलने पर होगी. अगर विदेशी निवेशक (FII) बाजार में खरीदारी करते हैं तो रिकवरी संभव है, लेकिन अगर बिकवाली जारी रही तो गिरावट और बढ़ सकती है.
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