जरूरत की खबर- साल के 972 घंटे देख रहे रील्स:क्या आपको भी रील्स का नशा है, एक्सपर्ट से जानें ये लत छुड़ाने के आसान टिप्स
पूरी दुनिया में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या 5.66 अरब पहुंच गई है। ये डेटा है, ग्लोबल डिजिटल रिसर्च प्लेटफॉर्म ‘डेटा रेपोर्टल’ की 2026 की रिपोर्ट का। रिपोर्ट के मुताबिक, एक एक्टिव यूजर हर हफ्ते औसतन 18 घंटे 36 मिनट सोशल मीडिया पर बिताता है– –यानी रोज करीब 2 घंटे 39 मिनट। –यानी साल में करीब 40 दिन। जरा सोचिए, आप किसी जरूरी काम से फोन उठाते हैं। तभी इंस्टाग्राम खोल लेते हैं और सोचते हैं कि सिर्फ 5 मिनट रील्स देखेंगे। लेकिन एक रील के बाद दूसरी और फिर तीसरी। देखते-देखते आधा घंटा, एक घंटा निकल जाता है। बाद में याद आता है कि जिस काम के लिए फोन उठाया था, वह तो हुआ ही नहीं। अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, बिना वजह बार-बार इंस्टाग्राम खोलने का मन करता है या रील्स देखने के बाद समय बर्बाद होने का एहसास होता है, तो यह रील्स एडिक्शन का संकेत हो सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में इंस्टाग्राम रील्स एडिक्शन पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. शौनक अजिंक्य, कंसल्टेंट, साइकेट्रिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- भारत में कितने लोग इंस्टाग्राम पर रील्स देखते हैं? एवरेज टाइम स्पेंड कितना है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- इंस्टाग्राम रील्स देखने की आदत कब ‘लत’ मानी जा सकती है? जवाब- अगर रील्स न देखने पर बेचैनी या चिड़चिड़ापन होने लगे और व्यक्ति दूसरी जरूरी एक्टिविटीज की जगह रील्स को प्रिऑरिटी देने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। सवाल- इंस्टाग्राम एडिक्टिव क्यों है? जवाब- इसे पॉइंटर्स समझिए- सवाल- लगातार रील्स देखने से ब्रेन पर क्या असर पड़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- ज्यादा रील्स देखना फोकस और एकाग्रता को कैसे प्रभावित करता है? जवाब- लगातार रील्स देखने से दिमाग को बहुत तेजी से बदलते कंटेंट और छोटे-छोटे वीडियो की आदत पड़ सकती है। इससे लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान बनाए रखना मुश्किल होता है। पढ़ाई, काम या बातचीत के दौरान बार-बार फोन चेक करने की इच्छा भी बढ़ती है। सवाल- कैसे जानें कि रील्स देखने की लत लग चुकी है? जवाब- अगर रील्स की वजह से काम, पढ़ाई, नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे तो यह लत का इशारा है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- रील्स एडिक्शन का हमारी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है? जवाब- लगातार रील्स देखने से गर्दन और कंधे में दर्द और आंखों पर असर पड़ता है। वहीं मेंटल हेल्थ की बात करें तो फोकस में कमी, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या रील्स की लत छोटे बच्चों और किशोरों के लिए ज्यादा खतरनाक है? जवाब- हां, क्योंकि बच्चों और किशोरों का ब्रेन अभी डेवलपमेंटल फेज में होता है। ऐसे में रील्स देखने की आदत उनके व्यवहार, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा असर डाल सकती है। इससे- सवाल- रील्स देखने की लत नींद को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- ज्यादातर लोग सोते समय रील देखते हैं। ऐसे में स्क्रीन की रोशनी और लगातार नया कंटेंट ब्रेन को एक्टिव रखता है। इससे नींद देर से आती है और स्लीप क्वालिटी भी खराब हाेती है। देर रात तक रील्स देखने से अगले दिन थकान और सुस्ती भी महसूस हो सकती है। सवाल- इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया को छोड़ना इतना मुश्किल क्यों होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- रील्स देखने की लत कैसे कम करें? जवाब- इसके लिए सबसे पहले धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम घटाएं। ग्राफिक में लत छुड़ाने के सभी टिप्स देखिए- सवाल- क्या अन्य एडिक्शन की तरह रील्स देखना छोड़ने पर भी विड्रॉअल सिंम्पटम्स हो सकते हैं? जवाब- हां, कुछ लोगों में रील्स या सोशल मीडिया का इस्तेमाल अचानक कम करने पर अस्थायी विड्रॉअल जैसे सिंप्टम्स महसूस हो सकते हैं, जैसेेकि– सवाल- किस स्थिति में साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी जरूरी है? जवाब- इन स्थितियों में साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें– ………………… ग्राफिक- अजीत सिंह …………………….. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- सुबह उठते ही पहले फोन न देखें:ब्रेन होगा डैमेज, मेमोरी कमजोर, डॉक्टर से समझें ये आदत क्यों इतनी खतरनाक क्या आपको पता है कि 84% भारतीय सुबह उठते ही पहला काम क्या करते हैं? वो अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं। ये डेटा है, ‘ग्लांस डिजिटल कंज्यूमर सर्वे,‘ 2024 का। पूरी खबर पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- बच्चे को चिकनपॉक्स तो सावधान:लापरवाही नहीं, डॉक्टर से समझें क्या दवा दें, कैसे केयर करें, क्या सावधानियां बरतें
‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ (WHO) की साल 2025 की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में पूरी दुनिया में चिकनपॉक्स के तकरीबन 8.67 करोड़ केस दर्ज किए गए। वहीं इस बीमारी से 13,931 लोगों की मौत हुई। चिकनपॉक्स एक कॉमन बीमारी है। अक्सर छोटे बच्चों को होती है। हालांकि यह स्मॉलपॉक्स की तरह गंभीर नहीं है, लेकिन कई मामलों में हो भी सकती है। हालांकि वैक्सिनेशन और संक्रमित व्यक्ति से दूरी समेत कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में चिकनपॉक्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चिकनपॉक्स क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- भारत में हर साल कितने बच्चों को चिकनपॉक्स होता है? जवाब- साल 2026 की शुरुआत में अकेले केरल में करीब दो महीने के भीतर चिकनपॉक्स के 8,851 मामले दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें ज्यादातर मरीज बच्चे थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों में चिकनपॉक्स का संक्रमण बेहद कॉमन है। हालांकि, पूरे भारत में हर साल कितने बच्चों को चिकनपॉक्स होता है, इसका सटीक राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सवाल- क्या चिकनपॉक्स की कोई वैक्सीन है? जवाब- हां, चिकनपॉक्स से बचाव के लिए ‘वेरिसेला’ वैक्सीन दी जाती है। यह वैक्सीन चिकनपॉक्स के संक्रमण और उससे जुड़े गंभीर कॉम्प्लिकेशंस से बचाने में मदद करती है। डॉक्टर की सलाह से जरूरत और उम्र के अनुसार इसकी डोज दी जाती है। सवाल- क्या यह वैक्सीन भारत सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है? जवाब- नहीं। चिकनपॉक्स की वैक्सीन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। हालांकि इसकी वैक्सीन बाजार में उपलब्ध है और पेरेंट्स डॉक्टर की सलाह से अपने बच्चों को ये वैक्सीन लगवा सकते हैं। सवाल- चिकनपॉक्स वैक्सीन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा क्यों नहीं है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- चिकनपॉक्स के लक्षण और संकेत क्या हैं? जवाब- इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 10-21 दिन के बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में बुखार, थकान और भूख कम लगना जैसे संकेत दिखते हैं। साथ ही शरीर पर दाने निकलते हैं, जो फफोले बन जाते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या चिकनपॉक्स अपने आप ठीक हो जाता है या डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- यूं तो यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है। 1-2 हफ्ते में चिकनपॉक्स से रिकवरी भी हो जाती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि डॉक्टर को दिखाने की जरूरत नहीं है। बुखार होते या शरीर पर दाने निकलते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए और घर के अन्य सदस्यों को मरीज से दूर रखना चाहिए। सवाल- बच्चे को चिकनपॉक्स हो जाए तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इस दौरान हाइजीन का बहुत ध्यान रखें और बच्चे को पर्याप्त नींद लेने दें। दानों को खुजलाने से रोकें, पर्याप्त पानी पिलाएं और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें। ग्राफिक में सभी सावधानियां देखिए- सवाल- बच्चे को खाने-पीने में क्या चीजें देनी चाहिए और क्या नहीं देना चाहिए? जवाब- चिकनपॉक्स होने पर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में लिक्विड और हल्का, पौष्टिक व सुपाच्य खाना दें। इसे पॉइंटर्स से समझिए- क्या खिलाएं? क्या न दें? सवाल- क्या चिकनपॉक्स गंभीर भी हो सकता है? क्या कोई इमरजेंसी साइन होते हैं? जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। लेकिन अगर नीचे ग्राफिक में दिए संकेत दिखें तो तुरंत एक्शन लें- सवाल- क्या एक संक्रमित बच्चे से घर के अन्य लोगों को भी चिकनपॉक्स हो सकता है? जवाब- हां, जिन लोगों को पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ या वैक्सीन नहीं लगी है, उनमें संक्रमण का रिस्क ज्यादा होता है। आमतौर पर दाने निकलने से करीब 1-2 दिन पहले से लेकर फफोलों पर पपड़ी बनने तक बच्चे के संपर्क में आने वालों को संक्रमण हो सकता है। सवाल- किन लोगों को इस संक्रमण का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- चिकनपॉक्स किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण का रिस्क ज्यादा रहता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या इसमें खुद से एंटीबायोटिक लेना सही है? जवाब- नहीं, चिकनपॉक्स हो या कोई भी बीमारी, कभी भी अपने मन से एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। एंटीबायोटिक दवाएं हमेशा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से ही लें। सवाल- बच्चों को चिकनपॉक्स की वैक्सीन कब-कब लगती है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या वैक्सीन लगने के बाद भी चिकनपॉक्स हो सकता है? जवाब- हां, वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी चिकनपॉक्स हो सकता है। इसे ’ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन’ (टीका लगने के बाद भी संक्रमण) कहा जाता है। इसमें आमतौर पर बीमारी हल्की रहती है और फफोले कम होते हैं। ……………………. ग्राफिक- महेंद्र वर्मा …………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब:सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़ें…
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