Union Budget 2026: STT बढ़ते ही लड़खड़ाया शेयर बाजार, बजट 2026 ने बिगाड़ा निवेशकों का मूड
Union Budget 2025: केंद्रीय बजट 2026 का असर शेयर बाजार पर नकारात्मक रहा. बजट पेश होने के दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1547 अंक गिरकर 80,723 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 495 अंक टूटकर 24,825 के स्तर पर आ गया. बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा और निफ्टी बैंक 1193 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ.
उठाना पड़ा निवेशकों को भारी नुकसान
इस तेज गिरावट की वजह से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. बाजार के आखिरी घंटों में ही निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए. बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन शुक्रवार को 460 लाख करोड़ रुपये था, जो बजट वाले दिन घटकर करीब 449 लाख करोड़ रुपये रह गया.
सबसे ज्यादा नुकसान किसे
बीएसई के टॉप-30 शेयरों में से सिर्फ टीसीएस, इंफोसिस, टाइटन और सनफार्मा में हल्की मजबूती देखने को मिली. बाकी 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा नुकसान एसबीआई को हुआ, जिसके शेयर करीब 6 फीसदी टूट गए. अडानी पोर्ट्स में 5.5 फीसदी और BEL में 5.36 फीसदी की गिरावट आई. आईटीसी के शेयर भी 3 फीसदी से ज्यादा टूटे. सेक्टर की बात करें तो सिर्फ आईटी सेक्टर हरे निशान में रहा. पीएसयू बैंक, मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
बाजार में इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी मानी जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने का ऐलान किया. फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT को 0.025 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है, जबकि ऑप्शन ट्रेडिंग पर इसे 0.1 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है. इस फैसले से खासतौर पर शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और डेरिवेटिव निवेशकों में निराशा दिखी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया.
क्या होता है STT
STT एक तरह का टैक्स है जो शेयर बाजार में शेयर, म्यूचुअल फंड या डेरिवेटिव्स की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है. जब भी आप शेयर बाजार में कोई सौदा करते हैं, उस पर यह टैक्स अपने-आप कट जाता है. यह टैक्स आपको मुनाफा हो या नुकसान, दोनों ही हालत में देना पड़ता है. STT आपकी ट्रांजैक्शन की कुल रकम पर लगता है और स्टॉक एक्सचेंज इसे सीधे सरकार के पास जमा कर देता है, इसलिए आपको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होती. अब टैक्स की दरें बढ़ने की वजह से, पहले की तुलना में हर ट्रांजैक्शन पर ज्यादा पैसा टैक्स के रूप में कटेगा.
आगे बाजार की चाल पर नजर
अब सबकी नजर सोमवार को बाजार खुलने पर होगी. अगर विदेशी निवेशक (FII) बाजार में खरीदारी करते हैं तो रिकवरी संभव है, लेकिन अगर बिकवाली जारी रही तो गिरावट और बढ़ सकती है.
केंद्रीय बजट 2026 से भारत की विकास गाथा में विश्वास बढ़ा है : उद्योग जगत
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। उद्योग प्रतिनिधियों ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 राजकोषीय अनुशासन, संरचनात्मक सुधारों और निजी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लक्षित उपायों के माध्यम से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय रोडमैप प्रस्तुत करता है।
आईएएनएस से बात करते हुए, सीआईआई पंजाब के अध्यक्ष अमीन जैन ने कहा कि बजट में वस्त्र क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं शामिल हैं।
जैन ने आगे कहा कि इनमें मेगा टेक्सटाइल पार्कों का विकास, श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्रों के लिए एकीकृत योजनाएं और विरासत वस्त्र पार्कों का पुनर्विकास शामिल है, जो घरेलू वस्त्र उद्योग को महत्वपूर्ण बढ़ावा प्रदान करेंगे।
उन्होंने 10,000 करोड़ रुपए के एमएसएमई फंड की घोषणा का भी स्वागत किया और कहा कि देश में एमएसएमई की सबसे बड़ी संख्या वस्त्र क्षेत्र में है।
जैन ने कहा कि नए फंड से पूरे क्षेत्र को लाभ होने की उम्मीद है।
इंडिया चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष नरेश पचीसिया ने बजट को संतुलित बताया और कहा कि इससे आर्थिक विकास दर को लगभग 7 प्रतिशत पर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने सभी क्षेत्रों में लक्षित योजनाओं की घोषणा की है, जिससे व्यापक विकास सुनिश्चित होगा।
पचिसिया ने आगे कहा कि सरकार ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए मजबूत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा है।
पचिसिया ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए इसे 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है, जो वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के विरुद्ध अधिक मजबूती प्रदान करता है।
पीएचडीसीसीआई की प्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष मुकुल बागला ने कहा कि बजट सही दिशा में एक कदम है।
उन्होंने बताया कि राजकोषीय घाटा वर्तमान में 4.4 प्रतिशत है और इसे धीरे-धीरे घटाकर 4 प्रतिशत करने की योजना है।
बागला ने आगे कहा कि जहां पिछले बजट में कई कर राहत उपायों की घोषणा की गई थी, वहीं मौजूदा बजट स्थिरता पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।
--आईएएनएस
एमएस/
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