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Union Budget 2026 से पहले Market में सस्पेंस: Banking Stocks में आएगी तूफानी तेजी या भारी बिकवाली?

जैसे-जैसे बजट दिवस नज़दीक आ रहा है, बाजार से जुड़े सभी प्रतिभागी वित्तीय क्षेत्र—खासतौर पर बैंकों—पर इसके संभावित असर को लेकर सतर्क नजर बनाए हुए हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत का असर अक्सर बजट के बाद बैंकों की चाल में साफ दिखाई देता है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है—क्या बाजार में तेजी देखने को मिलेगी या फिर बिकवाली का दौर आएगा? इतिहास गवाह है कि बजट दिवस की घोषणाएँ बाजार में तेज उतार-चढ़ाव ला सकती हैं और निवेशकों की धारणा के साथ बैंकिंग शेयरों की दिशा तय करती हैं।

आमतौर पर बजट में घोषित की जाने वाली वित्तीय नीतियाँ सीधे तौर पर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। टैक्स दरों में बदलाव, सरकारी खर्च की दिशा और आर्थिक विकास को लेकर अनुमान जैसे कदम बाजार में तेजी या मंदी की भूमिका बना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, तो निर्माण और विकास परियोजनाओं से जुड़े ऋण देने वाले बैंकों के शेयरों में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि सख्त वित्तीय अनुशासन या प्रतिकूल कर प्रावधान सामने आते हैं, तो निवेशक मुनाफे पर दबाव की आशंका के चलते बैंक शेयरों में बिकवाली कर सकते हैं।

दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत का आर्थिक परिदृश्य बजट को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभाता है। निवेशक और विश्लेषक वित्त मंत्री के बयानों पर खास नजर रखते हैं, क्योंकि इनमें सरकार की प्राथमिकताओं की झलक मिलती है, जो सीधे वित्तीय क्षेत्र की सेहत को प्रभावित करती है। सकारात्मक संकेत बाजार में तेजी को हवा दे सकते हैं, जबकि नकारात्मक अनुमान बिकवाली को जन्म दे सकते हैं।

इसके साथ ही निवेशकों के लिए महंगाई दर, जीडीपी वृद्धि और बाजार में तरलता जैसे व्यापक आर्थिक संकेतकों पर ध्यान देना भी जरूरी है, क्योंकि ये सभी बैंकिंग प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। हाल के रुझान बताते हैं कि बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है, जिस पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर देखने को मिल रहा है।

अंततः, बजट दिवस को लेकर बनी यह उत्सुकता बैंकों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। बाजार में उछाल आएगा या गिरावट—यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि बजट की घोषणाओं को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किस रूप में देखा जाता है। निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि बजट दिवस के नतीजे आने वाले महीनों में पूरे वित्तीय क्षेत्र की दिशा तय कर सकते हैं।

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Q3 Results में PSU Banks का जलवा, अब Budget 2026 से बड़ी उम्मीदें, जानें आगे क्या होगा?

भारतीय बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा (BFSI) सेक्टर के लगातार बदलते परिदृश्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है। मुनाफे में 56% तक की जोरदार बढ़त के साथ, ये बैंक निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए चर्चा का केंद्र बन गए हैं। यह लेख प्रमुख PSU बैंकों के मजबूत वित्तीय नतीजों, हालिया शेयर बाजार तेजी के प्रभाव और आगामी बजट दिवस से जुड़ी संभावनाओं पर विस्तार से नजर डालता है।

Q3 नतीजे: मुनाफे में मजबूत उछाल

तीसरी तिमाही के नतीजों ने कई PSU बैंकों के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश की है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो महामारी के बाद आर्थिक सुधार का स्पष्ट संकेत है। देश के सबसे बड़े PSU बैंक SBI ने साल-दर-साल आधार पर 56% की जबरदस्त मुनाफा वृद्धि दर्ज की, जिसका मुख्य कारण खराब ऋणों में कमी और बेहतर नेट इंटरेस्ट मार्जिन रहा।

वहीं, केनरा बैंक ने 40% से अधिक की मुनाफा बढ़त के साथ अपने मजबूत कारोबारी मॉडल और प्रभावी प्रबंधन की झलक दिखाई। बैंक ऑफ बड़ौदा भी पीछे नहीं रहा और उसने 37% की लाभ वृद्धि दर्ज कर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले बैंकों में अपनी जगह बनाई। इन नतीजों से साफ है कि PSU बैंक बदलते बाजार हालात के अनुरूप खुद को ढालने में सक्षम रहे हैं।

मुनाफा बढ़ने के पीछे के प्रमुख कारण

Q3 में PSU बैंकों के शानदार प्रदर्शन के पीछे कई अहम कारण रहे हैं। सबसे बड़ा कारण गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में आई गिरावट है, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई और लाभप्रदता में सुधार आया। बेहतर एसेट क्वालिटी के चलते बैंक न सिर्फ पुराने कर्ज की बेहतर वसूली कर पा रहे हैं, बल्कि विकास से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहे हैं।

इसके अलावा, बढ़ती ब्याज दरों ने भी बैंकों की नेट इंटरेस्ट इनकम को सहारा दिया है। ऋण पर ऊँची दरें और जमा पर प्रतिस्पर्धी ब्याज बनाए रखने से मार्जिन में सुधार हुआ, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा।

शेयर बाजार तेजी की भूमिका

हालिया शेयर बाजार तेजी ने PSU बैंक शेयरों की आकर्षण क्षमता को और मजबूत किया है। सकारात्मक बाजार धारणा के बीच निवेशक इन शेयरों में पूंजी लगा रहे हैं, जिससे इनके दाम और मार्केट कैपिटलाइजेशन में इजाफा हुआ है। यह तेजी आर्थिक सुधार, सरकारी सुधारों और कारोबार के विस्तार के साथ बढ़ती ऋण मांग की उम्मीदों से प्रेरित है।

रिकवरी के इस दौर में निजी बैंकों की तुलना में PSU बैंकों के मजबूत प्रदर्शन ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। खुदरा और संस्थागत दोनों निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने से इन शेयरों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है।

बजट दिवस का असर: आगे क्या उम्मीद?

बजट दिवस के करीब आते ही PSU बैंकों पर सरकार की वित्तीय नीतियों का असर खासा महत्वपूर्ण रहेगा। निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार बैंकिंग सेक्टर को मजबूती देने के लिए पूंजी निवेश, ऋण प्रोत्साहन और वित्तीय समावेशन से जुड़े कदम उठा सकती है। बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन पर फोकस से ऋण मांग बढ़ सकती है, जिसका सीधा फायदा PSU बैंकों को मिलेगा।

बजट 2026 से BFSI सेक्टर को लेकर सरकार की दीर्घकालिक रणनीति के संकेत मिलने की उम्मीद है। यदि नीतियाँ अनुकूल रहीं, तो आने वाली तिमाहियों में PSU बैंकों के मुनाफे में और इजाफा देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, Q3 में PSU बैंकों का मजबूत मुनाफा उनके बेहतर संचालन, मजबूत बैलेंस शीट और बदलते आर्थिक माहौल में उनकी मजबूती को दर्शाता है। एसेट क्वालिटी, नेट इंटरेस्ट मार्जिन और बजट से जुड़ी संभावनाओं पर ध्यान बनाए रखते हुए ये बैंक आगे भी निरंतर वृद्धि की राह पर बने रह सकते हैं। बाजार में जारी तेजी और बेहतर निवेशक भावना के बीच, भारतीय BFSI सेक्टर की रिकवरी से लाभ उठाने के इच्छुक निवेशकों के लिए PSU बैंक शेयर आगे भी आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

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  Sports

दुनिया के 5 गेंदबाज... जिन्होंने एक टेस्ट में 30 से ज्यादा नो बॉल फेंकने का बनाया रिकाॉर्ड, वसीम अकरम-चामिंडा वास भी शामिल

34 no balls in single test one bowler: क्रिकेट में किसी गेंदबाज की ओर से नो बॉल या वाइड गेंद फेंकना आम बात है. लेकिन जब इसी नो बॉल को बॉलर टेस्ट में फेंकता है तो उसे क्राइम माना जाता है. क्योंकि क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट टेस्ट में किसी गेंदबाज से नो बॉल की अपेक्षा नहीं की जाती है. लेकिन एक टेस्ट मैच में एक गेंदबाज ने अकेले 34 नोबॉल डालने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. यह गेंदबाज इंग्लैंड के छह फुट छह इंच लंबे पेसर बॉब विलिस हैं. जिन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ नोबॉल की झड़ी लगा दी थी.विलिस के इस अनचाहे रिकॉर्ड को आजतक कोई नहीं तोड़ पाया है. हालांकि उसके करीब कुछ गेंदबाज पहुंचे हैं लेकिन उनसे आगे नहीं निकल पाए. Sun, 1 Feb 2026 17:41:59 +0530

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