जब कमर अकड़ी और पैर ने दिया जवाब, तब वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप के काम आई धोनी की 'सीक्रेट एडवाइस', रच दिया इतिहास
IND vs WI: क्रिकेट की दुनिया में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सूझबूझ और मैच फिनिश करने के अंदाज का हर कोई मुरीद है. लेकिन धोनी के ज्ञान की गूंज सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के खिलाड़ी उनके दिए गुरुमंत्र से मैच जीत रहे हैं. न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. वेस्टइंडीज ने 352 रनों के विशाल लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर भारत के खिलाफ इतिहास की अपनी सबसे बड़ी रन-चेज दर्ज की. इस ऐतिहासिक जीत के असली हीरो रहे कैरेबियाई कप्तान शाई होप, जिन्होंने नाबाद 162 रनों की हैरतअंगेज पारी खेली. मैच के बाद शाई होप ने खुलासा किया कि इस नामुमकिन से दिखने वाले लक्ष्य को मुमकिन बनाने के पीछे धोनी का ही एक गुप्त मंत्र था.
शाई होप ने याद की धोनी से हुई बातचीत
तीसरे वनडे मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में शाई होप ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने एक बार महान इंसान एमएस धोनी से बहुत अच्छी बातचीत की थी. उन्होंने मुझसे कहा था कि जब आप लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं, तो क्रीज पर आपके पास हमेशा उससे कहीं अधिक समय होता है जितना आप सोच रहे होते हैं. धोनी की यही बात इतने सालों से मेरे दिमाग में बैठ गई है और वनडे क्रिकेट में मेरे बेहद काम आ रही है.
"I once had a great chat with the great man, MS Dhoni" ????️ Shai Hope
— Cricinfo (@cricinfo) October 4, 2026
How that conversation changed things for the West Indies skipper ✨
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धोनी के अंदाज में होप ने तोड़ा 352 रनों का पीछा करने का दबाव
भारत द्वारा दिए गए 352 रनों के पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज के कप्तान ने बिल्कुल धोनी के स्टाइल में 'कूल' रहकर बल्लेबाजी की. शाई होप ने बताया कि उन्होंने इतने बड़े टारगेट को देखकर घबराने के बजाय पूरे चेज को 10-10 ओवरों के पांच फेज में तोड़ दिया और हर फेज में 70 रन बनाने का छोटा टारगेट सेट किया. उंगली में चोट और कमर की तकलीफ के बावजूद होप क्रीज पर अंत तक डटे रहे और 143 गेंदों में 162 रनों की नाबाद कप्तानी पारी खेलकर टीम को 10 गेंद शेष रहते मैच जिता दिया.
Shai Hope: “A simple piece of advice from a very famous person MS Dhoni changed my ODI career completely.”
— Zenith. (@Msdcore7) October 3, 2026
Thala Dhoni effect is real ???????? pic.twitter.com/N6M0iRJlSL
डेथ ओवर्स में 'मिस्टर फिनिशर' की तरह बरसे शाई होप
एक समय जहां वेस्टइंडीज की पारी के दौरान जरूरी रन रेट लगातार बढ़ रहा था, शाई होप ने धोनी के उसी मंत्र को याद रखा और आखिरी तक गेम को खींच कर ले गए. डेथ ओवर्स आते ही होप ने अपना गियर बदला और भारतीय गेंदबाजों पर धावा बोल दिया. 46वें ओवर में कुलदीप यादव की गेंदों पर लगातार बाउंड्री बटोरने से लेकर आखिरी ओवरों में नमन धीर को छक्का जड़ने तक, होप ने मैच को उसी अंदाज में फिनिश किया जिसके लिए एमएस धोनी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. इस मैच को जीतकर वेस्टइंडीज ने खुद को सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप होने से बचाया.
50 overs behind the stumps. 48.2 overs at the crease. One niggle battled through. One sensational 162 ????????
— Cricinfo (@cricinfo) October 3, 2026
Shai Hope, take a bow! ???? pic.twitter.com/kwDcVMqcJO
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‘लाखों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है’, जस्टिस भुइयां बोले- कोई भी बहाना इसे सही नहीं ठहरा सकता
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है. ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है. इसे कोई भी बहाना सही नहीं ठहरा सकता है. जस्टिस भुइयां हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे और इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस ने यह बातें कहीं. हालांकि, जस्टिस ने अपने संबोधन में किसी खास प्रक्रिया या फिर अथॉकरिटी का नाम नहीं लिया.
जस्टिस भुइयां ने क्या कहा?
उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि एक वर्ग वोट देने का अधिकार रखता हो और दूसरे वर्ग को इससे वंचित रखा जाए, भारत का संविधान नागरिकों के दो वर्गो को नहीं बनाता है. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगी. अगर ऐसी कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना देती है, यह एक मनमानी है.
उन्होंने कार्यक्रम में आगे कहा कि ऐसी प्रक्रिया संविधान की बुनियाद पर चोट पहुंचाती है. यह भारत के संविधान के संवैधानिक व्यवस्था को नकारने के बराबर है. कोई भी संस्था इससे मुक्त नहीं है. कोई भी प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता, कोई भी अदालत इसे माफ नहीं कर सकती. कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है.
अरबपति हो रिक्शा चालक, दोनों के वोट बराबर- जस्टिस
जस्टिस भुइयां ने कार्यक्रम में कहा कि भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार विदेशी शासन के विरुद्ध भारत के लंबे संघर्ष से जुड़ा हुआ है. यह हमारी स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है. अनुच्छेद 326 में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति रिक्शा चालक हो या फिर कोई व्यक्ति अरबपति हो, बावजूद इसके दोनों व्यक्तियों के पास अपने-अपने वोट होंगे और उनके वोटों का मूल्य बराबर होगा.
अमेरिकी जस्टिस की टिप्पणी का हवाला दिया
जस्टिस भुइयां ने अमेरिकी जस्टिस फेलिक्स फ्रैंकफर्टर की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सर्वोच्च पद का नागरिक का होता है. जस्टिस भुइयां ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से पूछा कि मतदा के अधिकार के बिना एक नागरिक का मूल्य क्या होता है?
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