‘बापू’ के आदर्शों को आत्मसात कर विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें : Yogi Adityanath
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘श्रद्धेय ‘बापू’ का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेंगी।’’
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया, ‘‘आइए, बापू के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।’’ महात्मा गांधी की 1948 में आज ही के दिन नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
Ajit Pawar राकांपा के दोनों गुटों के विलय के इच्छुक थे: सहयोगी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों गुटों के विलय के इच्छुक थे और उनकी यह इच्छा जल्द ही साकार होने वाली थी।
अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर ने बृहस्पतिवार को यह दावा किया। गुजर 1980 के दशक के मध्य में अजित पवार के राजनीति में कदम रखने से पहले से ही उनसे जुड़े हुए थे।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पवार ने बुधवार को हुए विमान हादसे से ठीक पांच दिन पहले उनसे इस बारे में बात की थी। गुजर ने कहा, ‘‘वह दोनों गुटों के विलय के लिए बहुत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है।’’
अजित पवार ने हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनावों के दौरान कुछ चुनिंदा संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि वह अपनी पार्टी का शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरद चंद्र पवार) में विलय करने का इरादा रखते हैं।
राकांपा और राकांपा (शरद चंद्र पवार) ने पुणे और पिंपरी चिचवड में नगर निकाय चुनाव गठबंधन में लड़ा था। दोनों ने अगले महीने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन बरकरार रखने का फैसला किया था।
गुजर ने कहा कि अजित पवार के पास विलय और संयुक्त राकांपा के भविष्य के मार्ग के लिए एक रोडमैप तैयार था। यह पूछे जाने पर कि क्या अजित पवार ने शरद पवार से इस मुद्दे पर चर्चा की थी, गुजर ने कहा कि ‘‘पवार साहब, सुप्रिया ताई (सुप्रिया सुले) और अन्य नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही थी’’ और संकेत मिल रहे थे कि शरद पवार इस कदम का समर्थन करेंगे।
गुजर ने कहा, ‘‘कई सकारात्मक संभावनाएं उभर रही थीं, लेकिन इस त्रासदी ने अजित दादा को हमसे छीन लिया। अब उनकी मृत्यु के बाद यह और भी अधिक अनिवार्य हो गया है कि दोनों गुट एकजुट होकर बारामती और राज्य की बेहतरी के लिए काम करें।
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