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जरूरत की खबर- यहां हैं टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया:बढ़ाते बीमारियों का रिस्क, रेगुलर सफाई जरूरी, 10 हेल्दी हाइजीन हैबिट्स

घर की सबसे गंदी जगह कौन सी है? यह सवाल सुनते ही दिमाग में सबसे पहले टॉयलेट सीट का ही ख्याल आता है। शायद यही वजह है कि उसकी सफाई को लेकर हम सबसे ज्यादा सतर्क रहते हैं। लेकिन जरा रुकिए। सोचिए कि जिन चीजों को हम दिन में कई बार अपने हाथ में लेते हैं, खाते-पीते समय छूते हैं या सीधे चेहरे के पास ले जाते हैं, क्या वे सच में उतनी साफ होती हैं, जितना साफ हम उसे मान रहे हैं? सच तो यह है कि रोजमर्रा की ये चीजें कई बार टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदी हो सकती हैं। कई स्टडीज बताती हैं कि किचन स्पॉन्ज, मोबाइल फोन, टीवी रिमोट, की-बोर्ड जैसी सतहों पर टॉयलेट सीट की तुलना में सैकड़ों–हजारों गुना तक बैक्टीरिया हो सकते हैं। ऐसे में आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि– घर की वो कौन-सी जगहें हैं, जहां एक टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया हो सकते हैं? इन पर मौजूद जर्म्स से किन बीमारियों का खतरा बढ़ता है? वो कौन सी हेल्दी हाइजीन हैबिट्स हैं, जो हमें जरूर फॉलो करनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर डॉ. शीतल वर्मा, प्रोफेसर, क्लिनिकल माइक्रोबायलॉजी, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ सवाल– वो कौन–कौन सी जगहें या चीजें हैं, जहां टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया हो सकते हैं, लेकिन उसके बारे में हमें पता नहीं है? जवाब– स्टडीज के मुताबिक, घर और ऑफिस में इस्तेमाल होने वाली कई कॉमन चीजें ऐसी हैं, जिन पर टॉयलेट सीट से कहीं ज्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं। इसकी वजह यह है कि ये चीजें बार-बार हाथ में आती हैं, लेकिन इन्हें हम कभी साफ नहीं करते हैं। ग्राफिक से समझते हैं- अब इन्हें एक-एक करके थोड़ा विस्तार से समझते हैं। टीवी रिमोट टीवी देखते समय हम अक्सर खाते-पीते रहते हैं और उसी दौरान रिमोट भी हाथ में होता है। लेकिन रिमोट को साफ करने का ख्याल शायद ही किसी को आता है। यूके की एक कंपनी चर्चिल इंश्योरेंस के सर्वे में पाया गया कि एक टीवी रिमोट टॉयलेट सीट से करीब 15 गुना ज्यादा गंदा हो सकता है। कटिंग बोर्ड किचन में कटिंग बोर्ड का इस्तेमाल सब्जियां, फल और रॉ मीट काटने के लिए होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की एक स्टडी के मुताबिक, औसतन एक कटिंग बोर्ड में टॉयलेट सीट से 200 गुना ज्यादा फीकल बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। स्मार्टफोन मोबाइल फोन दिनभर हमारे हाथ में रहता है। कई लोग इसे टॉयलेट में भी इस्तेमाल करते हैं। वॉशरूम हाइजीन पर अध्ययन–सर्वे करानी वाली कंपनी इनिशियल वॉशरूम की 2018 की एक स्टडी के मुताबिक, मोबाइल फोन टॉयलेट सीट से करीब 7 गुना ज्यादा गंदे हो सकते हैं। टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया सीधे स्क्रीन और कवर पर ट्रांसफर हो जाते हैं। पिलो कवर सोते समय तकिए के कवर पर पसीना, लार और डेड स्किन सेल्स जमा होते रहते हैं। अगर इन्हें नियमित रूप से न धोया जाए, तो ये बैक्टीरिया और फंगस का घर बन सकते हैं। किचन स्पॉन्ज किचन स्पॉन्ज को सबसे गंदी घरेलू चीजों में गिना जाता है। रिसर्च बताती है कि एक किचन स्पॉन्ज में ई कोली और साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं। औसतन एक किचन स्पॉन्ज में 45 अरब माइक्रोब्स प्रति वर्ग सेंटीमीटर तक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो टॉयलेट सीट से हजारों गुना ज्यादा है। की-बोर्ड की-बोर्ड पर भी खाने के कण, धूल और हाथों के जर्म्स जमा होते रहते हैं। इसलिए वहां भी टॉयलेट सीट से 200 गुना ज्यादा तक बैक्टीरिया हो सकते हैं। दरवाजों के हैंडल और स्विच दरवाजों के हैंडल, नल के हैंडल, इलेक्ट्रिक स्विच और लिफ्ट के बटन को दिनभर कई लोग छूते हैं। इन्हें साफ नहीं किया जाता है। इसलिए इन सतहों पर भी ढेरों जर्म्स हो सकते हैं। ऑफिस डेस्क कई स्टडीज बताती हैं कि औसतन एक ऑफिस डेस्क किचन टेबल से 100 गुना ज्यादा गंदी और टॉयलेट सीट से 400 गुना कम हाइजीनिक हो सकती है। टूथब्रश टूथब्रश में भी बैक्टीरिया हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार, एक टूथब्रश में 2 लाख तक बैक्टीरिया हो सकते हैं। इसलिए टूथब्रश को समय-समय पर बदलना बेहद जरूरी है। पालतू जानवरों का फूड बाउल रिसर्च के मुताबिक, अगर कोई कुत्ता टॉयलेट सीट चाटे, तो उसे लगभग 296 बैक्टीरिया प्रति वर्ग इंच मिलते हैं। लेकिन उसके खाने के बर्तन में 2,000 से ज्यादा बैक्टीरिया प्रति वर्ग इंच तक पाए गए हैं। सवाल– इन बैक्टीरिया वाली चीजों और सतहों से किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है? जवाब– इन सतहों पर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर कई तरह के संक्रमण फैला सकते हैं। खासकर अगर हम इन सतहों को छूने के बाद ढंग से हाथ साफ न करें, सीधे खाना खा लें या गंदे हाथों से आंख, नाक, मुंह छुएं। सवाल– किन लोगों को बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है? जवाब– नीचे पॉइंटर्स में देखें– सवाल– ऊपर लिस्ट में दी गई चीजों की सफाई कितनी बार और कैसे करनी चाहिए? जवाब– घर और ऑफिस की वे चीजें, जिन्हें हम दिन में कई बार छूते हैं, उनसे सबसे ज्यादा बैक्टीरिया फैलते हैं। आइए जानें कि इन्हें कब–कब और कैसे साफ करना चाहिए। मोबाइल फोन मोबाइल फोन को हफ्ते में कम-से-कम 3–4 बार अल्कोहल-बेस्ड वाइप या माइक्रोफाइबर कपड़े से साफ करें। टीवी रिमोट टीवी रिमोट को हफ्ते में 2–3 बार डिसइंफेक्टेंट वाइप से साफ करना जरूरी है। बटन के बीच जमी गंदगी हटाने के लिए सूखे कपड़े या ईयरबड का इस्तेमाल करें। कटिंग बोर्ड कटिंग बोर्ड को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और डिशवॉशर लिक्विड से अच्छी तरह धोएं। कच्चे मांस और सब्जियों के लिए अलग-अलग बोर्ड रखने से फूड इंफेक्शन का खतरा घटता है। किचन स्पॉन्ज किचन स्पॉन्ज को 1–2 हफ्ते में बदलने की आदत बनाएं। रोज इस्तेमाल के बाद स्पॉन्ज को निचोड़कर सुखाना जरूरी है, क्योंकि नमी में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। की-बोर्ड की-बोर्ड को हफ्ते में कम-से-कम दो बार साफ करें। पहले धूल झाड़ें, फिर अल्कोहल वाइप से बटन और सतह पोंछें, खासकर जब इसे कई लोग इस्तेमाल करते हों। पिलो कवर पिलो कवर को हफ्ते में कम-से-कम एक बार धोएं। डोर हैंडल और लाइट स्विच डोर हैंडल और इलेक्ट्रिक स्विच को हर 2–3 दिन में डिसइंफेक्टेंट वाइप से साफ करें। ऑफिस डेस्क ऑफिस डेस्क को नियमित साफ रखना जरूरी है। हफ्ते में कम-से-कम 2 बार सतह को डिसइंफेक्ट करें। टूथब्रश टूथब्रश को सही जगह पर रखें और 3–4 महीने में जरूर बदलें। गीली जगह पर रखे टूथब्रश में बैक्टीरिया जल्दी बढ़ते हैं। पालतू जानवर का फूड बाउल पालतू जानवर के खाने के बर्तन को रोज गर्म पानी से धोएं। सवाल– डेली लाइफ की 10 हेल्दी हाइजीन हैबिट्स कौन-सी हैं, जिन्हें सभी को जरूर फॉलो करना चाहिए? जवाब- नीचे ग्राफिक में लिखे पॉइंट्स पढ़िए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन आदतों को शामिल करिए। रोजमर्रा की जिंदगी में ये मामूली नजर आने वाली, लेकिन बेहद जरूरी सावधानियां अपनाकर हम खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं। ………………….. ये खबर भी पढ़ें… एक स्क्रैच से निकलते हैं 23 लाख माइक्रोप्लास्टिक:स्क्रैच्ड नॉन-स्टिक पैन से हर साल लाखों लोग हो रहे बीमार आप अपने घर में नॉन स्टिक पैन यूज करते होंगे। उसे धुलते समय स्क्रैच भी आ गए होंगे। इसके बावजूद आप उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर यह सच है तो ये स्टडी आपके लिए ही है। पूरी खबर पढ़ें…

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मेंटल–हेल्थ– पत्नी ने मेरे बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली:एक झटके में दोस्ती और शादी दोनों टूट गए, ये धोखा नहीं सह पा रहा

सवाल- मेरी उम्र 36 साल है। मैं एक सक्सेसफुल प्रोफेशनल हूं। लेकिन पिछले दो सालों से मेरी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। मेरी पत्नी ने मुझे छोड़कर मेरे बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली। वो कॉलेज में प्रोफेसर है। हम छह साल से शादीशुदा थे। दोस्त हमेशा घर आता और मेरे एबसेंस में भी यहां रहता था। मुझे कभी शक नहीं हुआ। लेकिन एक साल पहले मेरी पत्नी ने अपने अफेयर के बारे में बताया और तलाक मांग लिया। अपनी सफाई में उसने कहा कि वो मेरे साथ खुश नहीं थी। दिल के किसी कोने में मैं जानता हूं कि ये सच है, लेकिन स्वीकार नहीं कर पा रहा। ये धोखा मैं सह नहीं पा रहा हूं। हमने दुनिया के सामने कोई तमाशा नहीं किया, लेकिन एक साल से मेरी मेंटल-फिजिकल हेल्थ ठीक नहीं है। मैं कई-कई रात सो नहीं पाता। आधी रात तक शराब पीता हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। आपकी पत्नी ने आपको तलाक देकर आपके बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली। इसके बाद से आप उदासी, अवसाद, अकेलापन महसूस कर रहे हैं। सोने में समस्या हो रही है और शराब भी काफी बढ़ गई है। हर वक्त आपके दिमाग में वही घटना घूमती रहती है। इस वक्त आप एक भावनात्मक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। डिप्रेशन या एडजस्टमेंट डिसऑर्डर आपने अपनी कंडीशन के बारे में जो लिखा है, उससे समझ में आता है कि ये डिप्रेशन नहीं, बल्कि एक एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है। जीवन में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसे स्वीकार करने और उसके साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत पेश आ रही है। जीवन में बड़ी भावनात्मक उथल-पुथल होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है। इस वक्त हम जो उदासी और अकेलापन महसूस करते हैं, उसे अक्सर डिप्रेशन समझ लेते हैं। लेकिन साइंटिफिक टर्म में देखें तो डिप्रेशन के क्लिनिकल केस बिल्कुल अलग होते हैं। आगे मैं डिटेल में समझाने की कोशिश करूंग कि क्लिनिकल डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर में क्या फर्क है। डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर में अंतर डिप्रेशन क्या है, इसे नीचे दिए कुछ पॉइंटर्स से समझिए- इसके ठीक उलट जीवन में कोई बड़ी दुर्घटना या बड़ा नकारात्मक बदलाव होने पर भी व्यक्ति उदासी और निराशा महसूस करता है। ये भाव भी डिप्रेशन जैसा ही लगता है, लेकिन असल में ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर होता है। एडजस्टमेंट डिसऑर्डर को नीचे दिए कुछ पॉइंटर्स से समझिए- आपके केस में- क्या ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 5 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल का आपका जवाब अगर 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग रोज' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर शुरुआती चार सवालों का आपका स्कोर हाई है तो यह डिप्रेशन नहीं है। यहां एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की ही संभावना है। ऐसे में कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) मददगार हो सकती है। दुख (ग्रीफ) के चरण (कुबलर–रॉस मॉडल) कुबलर-रॉस मॉडल एक मनोवैज्ञानिक अवधारणा है। यह किसी शोक या गहरे नुकसान से जुड़ी भावनाओं को समझने का एक मॉडल है। 1969 में एलिजाबेथ कुबलर-रॉस ने यह मॉडल विकसित किया था। यह इंसान के भीतर होने वाले उन बदलावों को समझने में मदद करता है, जो किसी दुखद घटना के बाद उसके भीतर घटते हैं। यह मॉडल बताता है कि दुख को स्वीकारने और उससे ऊपर उठने की पूरी प्रक्रिया एकरेखीय नहीं होती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके पांच चरणों को समझिए। ग्रीफ का सेल्फ एसेसमेंट नीचे मैं पांच सवाल दे रहा हूं। जैसे आपने ऊपर सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट किया था, उसी तरह यहां आपको ग्रीफ का सेल्फ एसेसमेंट करना है और 0 से लेकर 3 तक के स्केल पर सवालों को रेट करना है। अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग रोज' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। अगर आपका स्कोर हाई है तो इसका मतलब है कि ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है। टेस्ट के सवाल कॉग्निटिव रीस्ट्रक्चरिंग एक दुखद घटना का सकारात्मक अर्थ हम जो महसूस करते हैं, उसका कारण उस घटना से ज्यादा उसका हमारा इंटरप्रिटेशन होता है। यानी हम उस घटना को कैसे देखते हैं, कैसे अपने मन में उसकी व्याख्या करते हैं। CBT थेरेपी इस काम में मददगार हो सकती है। वह घटनाओं को नहीं, बल्कि उसके अर्थ और व्याख्या को नए ढंग से इंटरप्रिटेट करने में हमारी मदद करती है। नीचे कुछ उदाहरणों से समझिए- मन में आ रहा विचार- “मैंने अपने दो सबसे करीबी लोगों को खो दिया। मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई।” CBT आधारित संतुलित विचार- “यह घटना बेहद तकलीफदेह है। लेकिन इसने मुझे यह भी दिखा दिया कि जो लोग सबसे करीब दिखते थे, वे वास्तव में कैसे थे। अब मैं भ्रम में नहीं हूं।” यह इंटरप्रिटेशन घटना को अच्छा नहीं बता रहा है। यह मानता है कि देर से सही, लेकिन सच्चाई सामने आई। इसका फायदा- इस घटना से आंखों पर पड़ा पर्दा हट गया। आत्मसम्मान की नई सीमाएं तय हुईं। अब भविष्य में गलत लोगों पर इन्वेस्टमेंट नहीं होगा। सोच बदलने का CBT फॉर्मेट स्टेप 1: विचारों को नाम देना “मैं पुरानी यादों के लूप में घूम रहा हूं। ये समस्या का समाधान नहीं है।” Step 2: रिएलिटी चेक “इन विचारों से न तो रिश्ता बदलेगा, न ही मुझे क्लोजर मिलेगा।” Step 3: अपनी बाउंड्री तय करना “मैं इस रिश्ते पर अब तय समय से ज्यादा नहीं सोचूंगा।” Step 4: ध्यान बांटना रोज 20 मिनट का ‘ग्रीफ विंडो’ तय करें। बाकी समय दिमाग को उस घटना के बारे में सोचने की अनुमति न दें। बाकी समय उसका ख्याल आते ही कुछ और एक्टिविटी करें। जैसे वॉक करना, कोल्ड वाटर बाथ लेना, किसी दोस्त को फोन करना, गहरी सांसें लेना। धोखे से पैदा हुआ ट्रस्ट इश्यू भरोसा कैसे करें यह धोखे से उपजे ट्रॉमा की सहज प्रतिक्रिया है। किसी अपने से धोखा मिलने पर ट्रस्ट इश्यू हो सकते हैं। ऐसे में अपने विचारों को फिर से फ्रेम करने और समझने की जरूरत है। कुछ उदाहरणों से समझें- पुराना विचार- “दोस्त ने मेरे साथ ऐसा किया। अब लगता है कि कोई भी भरोसेमंद नहीं है।” नया विचार- “कुछ लोगों ने भरोसा तोड़ा है। इसका मतलब ये नहीं कि सब ऐसे ही हैं।” जीवन के नए प्रैक्टिकल नियम चार हफ्ते का रिकवरी प्लान सप्ताह 1 स्थिरीकरण सप्ताह 2 विचारों पर नियंत्रण सप्ताह 3 अपनी पहचान बदलना मन में उठने वाला सवाल- “इस शादी के बिना मैं कौन हूं?” नया अर्थ- मेरा काम, मेरे दोस्त, मेरा सोशल सर्कल, ये सब मैं हूं। शादी के अलावा जीवन की हरेक चीज को फिर से डिफाइन करना। सप्ताह 4 स्वीकारना, आगे बढ़ना खुद से पूछें- इस घटना से मैंने क्या सीखा? जवाब– मैंने ये चीजें सीखीं। प्रोफेशनल मदद कब जरूरी अगर नीचे ग्राफिक में दी सिचुएशंस में से कोई भी स्थिति पैदा हो या संकेत दिखें तो प्रोफेशनल हेल्प जरूर लें। अंतिम बात अगर आप इस घटना को सही तरीके से प्रोसेस कर पाएं तो यह आपको कमजोर नहीं, बल्कि ज्यादा यथार्थवादी और स्पष्ट बना सकती है। आपने दो लोगों को नहीं खोया है। आपने एक भ्रम खोया है। यह अनुभव समय के साथ आपके जीवन को ज्यादा सुरक्षित और ईमानदार बनाएगा। ……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– पति को बायपोलर डिसऑर्डर है: 12 साल से सेवा कर रही हूं, हर वक्त थकान सी रहती है, मैं डिप्रेस हो रही हूं, क्या करूं किसी तरह की शारीरिक या मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति की देखभाल करने वाला खुद भी गहरे तनाव से गुजरता है। उसके ऊपर बीमार की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी होती है। आगे पढ़िए…

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