मेंटल–हेल्थ– पत्नी ने मेरे बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली:एक झटके में दोस्ती और शादी दोनों टूट गए, ये धोखा नहीं सह पा रहा
सवाल- मेरी उम्र 36 साल है। मैं एक सक्सेसफुल प्रोफेशनल हूं। लेकिन पिछले दो सालों से मेरी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। मेरी पत्नी ने मुझे छोड़कर मेरे बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली। वो कॉलेज में प्रोफेसर है। हम छह साल से शादीशुदा थे। दोस्त हमेशा घर आता और मेरे एबसेंस में भी यहां रहता था। मुझे कभी शक नहीं हुआ। लेकिन एक साल पहले मेरी पत्नी ने अपने अफेयर के बारे में बताया और तलाक मांग लिया। अपनी सफाई में उसने कहा कि वो मेरे साथ खुश नहीं थी। दिल के किसी कोने में मैं जानता हूं कि ये सच है, लेकिन स्वीकार नहीं कर पा रहा। ये धोखा मैं सह नहीं पा रहा हूं। हमने दुनिया के सामने कोई तमाशा नहीं किया, लेकिन एक साल से मेरी मेंटल-फिजिकल हेल्थ ठीक नहीं है। मैं कई-कई रात सो नहीं पाता। आधी रात तक शराब पीता हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। आपकी पत्नी ने आपको तलाक देकर आपके बेस्ट फ्रेंड से शादी कर ली। इसके बाद से आप उदासी, अवसाद, अकेलापन महसूस कर रहे हैं। सोने में समस्या हो रही है और शराब भी काफी बढ़ गई है। हर वक्त आपके दिमाग में वही घटना घूमती रहती है। इस वक्त आप एक भावनात्मक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। डिप्रेशन या एडजस्टमेंट डिसऑर्डर आपने अपनी कंडीशन के बारे में जो लिखा है, उससे समझ में आता है कि ये डिप्रेशन नहीं, बल्कि एक एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है। जीवन में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसे स्वीकार करने और उसके साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत पेश आ रही है। जीवन में बड़ी भावनात्मक उथल-पुथल होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है। इस वक्त हम जो उदासी और अकेलापन महसूस करते हैं, उसे अक्सर डिप्रेशन समझ लेते हैं। लेकिन साइंटिफिक टर्म में देखें तो डिप्रेशन के क्लिनिकल केस बिल्कुल अलग होते हैं। आगे मैं डिटेल में समझाने की कोशिश करूंग कि क्लिनिकल डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर में क्या फर्क है। डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर में अंतर डिप्रेशन क्या है, इसे नीचे दिए कुछ पॉइंटर्स से समझिए- इसके ठीक उलट जीवन में कोई बड़ी दुर्घटना या बड़ा नकारात्मक बदलाव होने पर भी व्यक्ति उदासी और निराशा महसूस करता है। ये भाव भी डिप्रेशन जैसा ही लगता है, लेकिन असल में ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर होता है। एडजस्टमेंट डिसऑर्डर को नीचे दिए कुछ पॉइंटर्स से समझिए- आपके केस में- क्या ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 5 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल का आपका जवाब अगर 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग रोज' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर शुरुआती चार सवालों का आपका स्कोर हाई है तो यह डिप्रेशन नहीं है। यहां एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की ही संभावना है। ऐसे में कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) मददगार हो सकती है। दुख (ग्रीफ) के चरण (कुबलर–रॉस मॉडल) कुबलर-रॉस मॉडल एक मनोवैज्ञानिक अवधारणा है। यह किसी शोक या गहरे नुकसान से जुड़ी भावनाओं को समझने का एक मॉडल है। 1969 में एलिजाबेथ कुबलर-रॉस ने यह मॉडल विकसित किया था। यह इंसान के भीतर होने वाले उन बदलावों को समझने में मदद करता है, जो किसी दुखद घटना के बाद उसके भीतर घटते हैं। यह मॉडल बताता है कि दुख को स्वीकारने और उससे ऊपर उठने की पूरी प्रक्रिया एकरेखीय नहीं होती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके पांच चरणों को समझिए। ग्रीफ का सेल्फ एसेसमेंट नीचे मैं पांच सवाल दे रहा हूं। जैसे आपने ऊपर सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट किया था, उसी तरह यहां आपको ग्रीफ का सेल्फ एसेसमेंट करना है और 0 से लेकर 3 तक के स्केल पर सवालों को रेट करना है। अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग रोज' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। अगर आपका स्कोर हाई है तो इसका मतलब है कि ये एडजस्टमेंट डिसऑर्डर है। टेस्ट के सवाल कॉग्निटिव रीस्ट्रक्चरिंग एक दुखद घटना का सकारात्मक अर्थ हम जो महसूस करते हैं, उसका कारण उस घटना से ज्यादा उसका हमारा इंटरप्रिटेशन होता है। यानी हम उस घटना को कैसे देखते हैं, कैसे अपने मन में उसकी व्याख्या करते हैं। CBT थेरेपी इस काम में मददगार हो सकती है। वह घटनाओं को नहीं, बल्कि उसके अर्थ और व्याख्या को नए ढंग से इंटरप्रिटेट करने में हमारी मदद करती है। नीचे कुछ उदाहरणों से समझिए- मन में आ रहा विचार- “मैंने अपने दो सबसे करीबी लोगों को खो दिया। मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई।” CBT आधारित संतुलित विचार- “यह घटना बेहद तकलीफदेह है। लेकिन इसने मुझे यह भी दिखा दिया कि जो लोग सबसे करीब दिखते थे, वे वास्तव में कैसे थे। अब मैं भ्रम में नहीं हूं।” यह इंटरप्रिटेशन घटना को अच्छा नहीं बता रहा है। यह मानता है कि देर से सही, लेकिन सच्चाई सामने आई। इसका फायदा- इस घटना से आंखों पर पड़ा पर्दा हट गया। आत्मसम्मान की नई सीमाएं तय हुईं। अब भविष्य में गलत लोगों पर इन्वेस्टमेंट नहीं होगा। सोच बदलने का CBT फॉर्मेट स्टेप 1: विचारों को नाम देना “मैं पुरानी यादों के लूप में घूम रहा हूं। ये समस्या का समाधान नहीं है।” Step 2: रिएलिटी चेक “इन विचारों से न तो रिश्ता बदलेगा, न ही मुझे क्लोजर मिलेगा।” Step 3: अपनी बाउंड्री तय करना “मैं इस रिश्ते पर अब तय समय से ज्यादा नहीं सोचूंगा।” Step 4: ध्यान बांटना रोज 20 मिनट का ‘ग्रीफ विंडो’ तय करें। बाकी समय दिमाग को उस घटना के बारे में सोचने की अनुमति न दें। बाकी समय उसका ख्याल आते ही कुछ और एक्टिविटी करें। जैसे वॉक करना, कोल्ड वाटर बाथ लेना, किसी दोस्त को फोन करना, गहरी सांसें लेना। धोखे से पैदा हुआ ट्रस्ट इश्यू भरोसा कैसे करें यह धोखे से उपजे ट्रॉमा की सहज प्रतिक्रिया है। किसी अपने से धोखा मिलने पर ट्रस्ट इश्यू हो सकते हैं। ऐसे में अपने विचारों को फिर से फ्रेम करने और समझने की जरूरत है। कुछ उदाहरणों से समझें- पुराना विचार- “दोस्त ने मेरे साथ ऐसा किया। अब लगता है कि कोई भी भरोसेमंद नहीं है।” नया विचार- “कुछ लोगों ने भरोसा तोड़ा है। इसका मतलब ये नहीं कि सब ऐसे ही हैं।” जीवन के नए प्रैक्टिकल नियम चार हफ्ते का रिकवरी प्लान सप्ताह 1 स्थिरीकरण सप्ताह 2 विचारों पर नियंत्रण सप्ताह 3 अपनी पहचान बदलना मन में उठने वाला सवाल- “इस शादी के बिना मैं कौन हूं?” नया अर्थ- मेरा काम, मेरे दोस्त, मेरा सोशल सर्कल, ये सब मैं हूं। शादी के अलावा जीवन की हरेक चीज को फिर से डिफाइन करना। सप्ताह 4 स्वीकारना, आगे बढ़ना खुद से पूछें- इस घटना से मैंने क्या सीखा? जवाब– मैंने ये चीजें सीखीं। प्रोफेशनल मदद कब जरूरी अगर नीचे ग्राफिक में दी सिचुएशंस में से कोई भी स्थिति पैदा हो या संकेत दिखें तो प्रोफेशनल हेल्प जरूर लें। अंतिम बात अगर आप इस घटना को सही तरीके से प्रोसेस कर पाएं तो यह आपको कमजोर नहीं, बल्कि ज्यादा यथार्थवादी और स्पष्ट बना सकती है। आपने दो लोगों को नहीं खोया है। आपने एक भ्रम खोया है। यह अनुभव समय के साथ आपके जीवन को ज्यादा सुरक्षित और ईमानदार बनाएगा। ……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– पति को बायपोलर डिसऑर्डर है: 12 साल से सेवा कर रही हूं, हर वक्त थकान सी रहती है, मैं डिप्रेस हो रही हूं, क्या करूं किसी तरह की शारीरिक या मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति की देखभाल करने वाला खुद भी गहरे तनाव से गुजरता है। उसके ऊपर बीमार की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी होती है। आगे पढ़िए…
Hindu Death Rituals : अंतिम संस्कार में मटकी फोड़ना क्यों जरूरी है? जानिए इसके पीछे छिपे धार्मिक और ज्योतिषीय कारण
Hindu Death Rituals : अंतिम संस्कार में मटकी फोड़ना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि मृत्यु, आत्मा और मोक्ष का प्रतीक है. यह धार्मिक, ज्योतिषीय और व्यावहारिक कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
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