ग्रेटर नोएडा के थाना रबूपुरा क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क के पास बेसमेंट निर्माण के लिए गहरा गड्ढा खोदकर उसे लंबे समय तक खुला छोड़ने के मामले में एक बिल्डर कंपनी के दो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
गड्ढे में बारिश का पानी भरने से जल और वायु प्रदूषण फैलने तथा दुर्घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
रबूपुरा थाने के प्रभारी निरीक्षक श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि उपनिरीक्षक आशीष यादव ने बृहस्पतिवार रात रिपोर्ट दर्ज कराई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर-28डी में ‘स्टार सिटी’ बिल्डर की एक परियोजना जारी है, जहां सार्वजनिक सड़क के बिल्कुल पास भारी मशीनों से एक बड़ा गड्ढा खोदा गया है। यह गड्ढा कई महीनों से पानी से भरा हुआ है, जिसमें बारिश के पानी के साथ कूड़ा-करकट भी जमा हो गया है। इसके कारण पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है और दुर्गंध के चलते आसपास वायु प्रदूषण फैल रहा है।
पुलिस के अनुसार, गड्ढे के चारों ओर किसी प्रकार की बाड़, संकेतक या सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। सड़क के समीप इस तरह जलमग्न गड्ढे को लंबे समय तक खुला छोड़ना मानव जीवन के लिए खतरा है और इससे गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
जांच में सामने आया है कि यह लापरवाही स्टार सिटी के महाप्रबंधक पुष्कर और परियोजना प्रमुख प्रीतम सिंह की ओर से की जा रही है। पुलिस के अनुसार, दोनों को पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं किया गया।
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश की जा रही है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। पश्चिमी दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा में तैनात 27 वर्ष की स्वॉट कमांडो काजल चौधरी की उनके ही घर में निर्मम हत्या कर दी गई। काजल चार महीने की गर्भवती थीं और देश की सुरक्षा में तैनात एक जांबाज महिला सिपाही थीं। आरोप है कि उनके पति अंकुर ने घरेलू विवाद के दौरान पहले उनका सिर दरवाजे के चौखट पर पटका और फिर डंबल से उन पर जानलेवा हमला किया।
यह घटना 22 जनवरी को हुई थी। गंभीर रूप से घायल काजल को कई अस्पतालों में ले जाया गया लेकिन हर जगह से यही कहा गया कि बचने की संभावना बेहद कम है। अंततः उन्हें गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पांच दिनों तक जीवन और मृत्यु से जूझने के बाद 27 जनवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया। काजल के भाई निखिल संसद मार्ग थाने में सिपाही हैं। उन्होंने जो बयान दिया है वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कंपा देने के लिए काफी है। निखिल ने बताया कि घटना के दिन पहले अंकुर ने उन्हें फोन कर कहा कि अपनी बहन को समझा लो। जब निखिल ने काजल से बात की तो वह पहली बार अपने साथ हो रहे अत्याचार की बात खुलकर बता रही थीं। इसी दौरान अंकुर ने फोन छीन लिया और कहा कि इस कॉल को रिकार्ड पर रखो यह पुलिस सबूत में काम आएगा। फिर उसने कहा कि मैं तुम्हारी बहन को मार रहा हूं और पुलिस मेरा कुछ नहीं कर पाएगी। इसके बाद काजल की चीखें सुनाई दीं और कॉल कट गई।
कुछ ही मिनट बाद फिर फोन आया और कहा गया कि यह मर गई है, अस्पताल आ जाओ। जब परिवार और पुलिस वहां पहुंचे तो काजल बुरी तरह घायल थीं। परिवार का आरोप है कि उनके सिर पर गहरी चोटें थीं और पूरे शरीर पर जख्म थे। काजल के परिवार ने अंकुर और उसके रिश्तेदारों पर लंबे समय से दहेज उत्पीड़न और शारीरिक मानसिक यातना का आरोप लगाया है। काजल के पिता राकेश का कहना है कि शादी में बुलेट मोटरसाइकिल, सोने के गहने और नकद दिया गया था लेकिन फिर भी ताने बंद नहीं हुए। कहा गया कि अगर किसी और से शादी करता तो गाड़ी मिलती। बाद में बेटी ने गाड़ी की व्यवस्था भी की फिर भी अत्याचार नहीं रुका।
काजल की मां का दर्द और गुस्सा दोनों फूट पड़े। उनका कहना है कि शादी में करीब बीस लाख खर्च हुए, कर्ज लेना पड़ा और ऊपर से अंकुर ने पांच लाख और ले लिए। वह न्याय चाहती हैं और कहती हैं कि ऐसा आदमी राक्षस है। बताया जा रहा है कि काजल और अंकुर की जान पहचान कॉलेज के समय से थी और 23 नवंबर 2023 को शादी हुई थी। हरियाणा के गनौर में लगातार झगड़ों के कारण दोनों दिसंबर 2024 में मोहन गार्डन के किराये के मकान में आ गए लेकिन हालात नहीं बदले। पुलिस का कहना है कि कर्ज और घरेलू खर्च को लेकर विवाद चलता रहता था। इस मामले में मोहन गार्डन थाने में पहले हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था जिसे अब हत्या में बदला जाएगा। दंपति का डेढ़ साल का बेटा फिलहाल ननिहाल में है।
देखा जाये तो जिस काजल ने देश और समाज की सुरक्षा की कसम खाई थी वही काजल अपने ही पति की हैवानियत का शिकार हो गई। उससे भी भयावह यह है कि हत्या से पहले अपराधी खुलेआम यह ऐलान करता है कि पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। पढ़े लिखे और नौकरीपेशा परिवारों में भी दहेज का जहर खत्म नहीं हुआ यह चिंताजनक है। गर्भवती महिला से घर का सारा काम करवाना, मारपीट करना और फिर उसकी जान ले लेना यह बताता है कि स्त्री को अब भी इंसान नहीं बल्कि संपत्ति समझा जाता है। बहरहाल, यह मामला फास्ट ट्रैक अदालत में चलाकर दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए ताकि समाज को यह संदेश जाए कि दहेज और घरेलू हिंसा का अंजाम सीधा फांसी घर या उम्रकैद है।
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