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‘कांतारा’ की दैवीय परंपरा का मजाक पड़ा भारी, एक्टर रणवीर सिंह पर बेंगलुरु में FIR, हिंदू भावनाएं आहत करने का आरोप

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के दौरान फिल्म ‘कांतारा’ की दैवीय परंपरा का मजाक उड़ाने के आरोप में उनके खिलाफ बेंगलुरु में FIR दर्ज की गई है। यह FIR बुधवार को हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में वकील प्रशांत मेथल की शिकायत पर दर्ज …

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देश का 'आर्थिक रिपोर्ट कार्ड' आज पेश होगा:इकोनॉमिक सर्वे में महंगाई, खेती, नौकरियों पर अपडेट देगी सरकार; 1 फरवरी को बजट

सरकार अपना 'आर्थिक रिपोर्ट कार्ड' यानी इकोनॉमिक सर्वे आज 29 जनवरी को पेश करेगी। यह सर्वे बताएगा कि पिछले एक साल में महंगाई ने आपकी थाली पर कितना असर डाला, खेती-किसानी की क्या हालत है और क्या आने वाले समय में आपके लिए नई नौकरियों बढ़ेंगी या नहीं। इन 6 बड़ी बातों पर रहेगी नजर 1. महंगाई: सर्वे में बताया जाएगा कि दाल, तेल और सब्जियों की कीमतें बढ़ने की असली वजह क्या रही। क्या आने वाले दिनों में आपको बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी? 2. GDP: क्या भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा? अगर GDP बढ़ती है, तो इसका सीधा मतलब है कि देश में नए निवेश आएंगे और व्यापार बढ़ेगा। 3. नौकरी: IT, मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर। किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा नौकरियां दीं और कहां छंटनी का खतरा है? युवाओं के लिए यह सबसे अहम सेक्शन होगा। 4. खेती-किसानी: देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। सर्वे बताएगा कि इस साल खेती की विकास दर क्या रही और क्या किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के पास कोई नया प्लान है। 5. सरकारी कर्ज: सरकार अपनी कमाई से ज्यादा जो खर्च करती है, उसे 'राजकोषीय घाटा' कहते हैं। घाटा कम होने का मतलब है-मजबूत इकोनॉमी और कम महंगाई। 6. विदेशी मुद्रा भंडार: दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच भारत की विदेशी मुद्रा भंडार कितना है? यह भंडार जितना भरा होगा, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही मजबूत रहेगा। इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है? ये देश की अर्थव्यवस्था का सालाना रिपोर्ट कार्ड होता है। इसमें पिछले 1 साल में देश की आर्थिक स्थिति का पूरा हिसाब-किताब होता है। इससे पता चलता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है। इकोनॉमिक सर्वे में बीते साल का हिसाब-किताब और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान का जिक्र रहता है। इकोनॉमिक सर्वे को आमतौर पर बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है। इकोनॉमिक सर्वे करता कौन है? वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की इकोनॉमिक डिवीजन हर साल इकोनॉमिक सर्वे करता है। इसकी अगुवाई इकोनॉमिक डिवीजन के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर CEA करते हैं। फिलहाल डॉ. वी अनंत नागेश्वरन इस डिवीजन के CEA हैं। सर्वे क्यों जरूरी है? इकोनॉमिक सर्वे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर है। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी है और इसमें सुधार के लिए क्या करने की जरूरत है। क्या इसे पेश करना जरूरी है? सरकार सर्वे को पेश करने और इसमें दिए गए सुझावों या सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। आमतौर पर सरकार इसके सुझावों के मुताबिक ही बजट तैयार करती है। 1950-51 में पेश हुआ था पहला सर्वे देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया है। तब यह केंद्रीय बजट का ही एक हिस्सा था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया। तब से बजट डे से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश होता है।

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  Sports

हम छह बल्लेबाजों के साथ खुद को चुनौती देना चाहते थे: Suryakumar Yadav

न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की श्रृंखला के चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय में 50 रन से हार का सामना करने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि टीम छह बल्लेबाजों के साथ खुद को चुनौती देना चाहती थी।

इशान किशन के चोट के कारण बाहर होने के बाद टीम ने उनके स्थान पर किसी बल्लेबाज की जगह तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को मौका दिया। भारतीय टीम जीत के लिए मिले 216 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए शिवम दुबे की 23 गेंद में 65 रन की पारी के बावजूद 165 रन पर आउट हो गयी।

सूर्यकुमार ने मैच के बाद पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘हमने जानबूझकर छह बल्लेबाजों के साथ उतरने का फैसला किया। हमारा लक्ष्य पांच गेंदबाजों को रखते हुए  खुद को चुनौती देना था।’’ उन्होंने कहा कि टीम टी20 विश्व के मद्देनजर अधिक खिलाड़ियों को मौका देना चाहती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम हमारे पास कुछ अन्य खिलाड़ियों को भी एकादश में शामिल करने का विकल्प था लेकिन हम उन खिलाड़ियों को मौका देना चाहते थे जो विश्व कप टीम का हिस्सा  हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन हम यह देखना चाहते थे कि 180-200 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दो-तीन विकेट गिरने के बाद हमारी बल्लेबाजी कैसी रहती है।’’

भारतीय कप्तान ने कहा कि टीम अगर एक और साझेदारी करने में सफल रहती तो परिणाम कुछ और होता। उन्होंने कहा, ‘‘ भारी ओस की मौजूदगी में दुबे जैसी एक-दो साझेदारियां मैच का रुख बदल सकती थीं और एक अच्छी साझेदारी से बड़ा फर्क पड़ सकता था।

Thu, 29 Jan 2026 11:29:12 +0530

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