Chardham Yatra में उमड़ी भारी भीड़, 53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन एवं राज्य सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण चारधाम यात्रा लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है. बद्रीनाथ व गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. बद्रीनाथ धाम में अबतक 18.10 लाख तथा गंगोत्री धाम में पहली बार सर्वाधिक 8.41 लाख श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे हैं. यमुनोत्री धाम में भी दर्शनार्थियों की संख्या 7.5 लाख के पार पहुंच चुकी है. जबकि केदारनाथ यात्रा में 15.57 लाख यात्री दर्शन कर चुके हैं.
इस बार की चारधाम यात्रा के कुल यात्रियों की संख्या की दृष्टि से इस यात्रा काल में अब तक 53 लाख 23 हजार 401 श्रद्धालु चार धामों के दर्शन कर चुके हैं. बीते वर्ष इस अवधि में यात्री संख्या लगभग 46 लाख थी. जबकि यात्रा में अभी डेढ माह का समय शेष है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या में बीते वर्षों की अपेक्षा और अधिक वृद्धि होने का अनुमान है. हेमकुंट साहिब की यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है. यहां बीते कई वर्षों की तुलना में पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 03 लाख 52 हजार 765 पहुंच चुकी है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशन में यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. यात्रा से जुड़े रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जनपद में आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रखा गया है.
CM धामी में कहा कि चारधाम यात्रा का पहला चरण बेहद सफल रहा है. दूसरे चरण में भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं. इसको देखते हुए सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं. यात्रा से जुड़े सभी जनपदों में आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड में रखा गया है. राज्य एवं जनपद स्तर पर संबंधित उच्चाधिकारियों द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं की निरन्तर समीक्षा की जा रही है.
अब ट्रैफिक चालान न भरना पड़ सकता है भारी, बकाया राशि वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिया गजब का आईडिया,
आपका ट्रैफिक चालान अगर लंबे वक्त से पेंडिंग है तो आने वाले वक्त में उसकी वसूली के लिए एक नया तरीक अपनाया जा सकता है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लंबित ई-चालानों की वसूली की सुनवाई में सुझाव दिया कि बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली बिल से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जाए. हालांकि, कोर्ट का सुझाव है, कोई लागू आदेश या देशभर में नया नियम नहीं.
45 हजार करोड़ रुपये के चालान पेंडिंग
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान अभी लंबित है. इनमें करीब 25 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ चालान काटना पर्याप्त नहीं है. बल्कि जुर्माने की प्रभावी वसूली भी आवश्यक है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के सामने यह मामला आया है. जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि पुलिस हजारों या फिर लाखों ई-चालान जारी कर सकती है. हालांकि, असल सवाल यह है कि वसूली होगी कैसी.
बिजली बिल में जोड़ने का सुझाव
सप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि अगर कोई व्यक्ति लगातार ट्रैफिक चालान नहीं भरता है तो बकाया राशि को उसके बिजली बिल से जोड़ने का तरीका खोजा जा सकता है. कोर्ट ने अधिकारियों से इस व्यवस्था को व्यवहारिक रूप से तैयार करने पर विचार करने के लिए कहा है. कोर्ट ने अधिकारियों से इस व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से तैयार करने पर विचार करने को कहा. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अभी से हर बकाया ट्रैफिक चालान बिजली बिल में जोड़ा जाएगा या बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा. फिलहाल यह सुनवाई के दौरान दिया गया एक सुझाव है और इसे लागू करने के लिए संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होगी.
वाहन से जुड़े काम भी रोके जा सकते हैं
कोर्ट ने लंबित चालानों की वसूली के लिए कई दूसरे विकल्पों पर भी चर्चा की. इनमें बकाया चालान वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के रिन्यूअल पर रोक लगाने का सुझाव शामिल है. ऐसे वाहनों के डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने और वाहन का मालिकाना हक ट्रांसफर करने पर भी रोक लगाने की बात कही गई.
इसके अलावा वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने, ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करने और PUC सर्टिफिकेट देने को भी लंबित चालान से जोड़ने पर विचार किया गया. कोर्ट ने ऐसे वाहनों को परिवहन विभाग के Parivahan पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने का सुझाव भी दिया.
इसेंस सस्पेंड और वाहन जब्त करने पर भी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बकाया ई-चालान वाले मामलों में पहले से जारी ड्राइविंग लाइसेंस को सस्पेंड करने और उसके रिन्यूअल पर रोक लगाने जैसे कदम भी अपनाए जा सकते हैं. कोर्ट ने सड़कों पर रैंडम वाहन जांच का सुझाव देते हुए कहा कि अगर जांच के दौरान किसी वाहन पर लंबित ई-चालान पाया जाता है, तो जरूरत पड़ने पर वाहन को जब्त करने की कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है.
कोर्ट ने कहा- जमीनी स्तर पर लागू हो व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि केवल कागजों पर नियम बनाने से समस्या हल नहीं होगी. अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जो जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से काम करें. फिलहाल कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा लंबित ई-चालानों की वसूली को प्रभावी बनाना है. बिजली बिल से जोड़ने समेत अन्य उपायों पर अंतिम फैसला या देशभर में लागू होने वाला कोई नया नियम अभी सामने नहीं आया है.
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