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उत्तर भारत में फिलहाल सर्दी से राहत नहीं, पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लिए चेतावनी जारी की है. IMD के अनुसार एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ 26 जनवरी 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा, जिसका असर 28 जनवरी तक बना रह सकता है. इसके चलते पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी, जबकि 27 जनवरी को कुछ स्थानों पर भारी वर्षा और हिमपात की संभावना जताई गई है.

बीते 24 घंटों का मौसम

पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई. जम्मू-कश्मीर में कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई. हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अधिकांश स्थानों पर बारिश हुई, वहीं पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी वर्षा देखी गई.

इस दौरान जम्मू, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आईं. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलीं.

कई राज्यों में कोहरे की स्थिति

ओडिशा के कुछ इलाकों में अत्यंत घना कोहरा छाया रहा, जहां दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई. ओडिशा के ढेंकानाल में दृश्यता मात्र 20 मीटर रही, जबकि मेघालय के बारापानी में यह 100 मीटर दर्ज की गई.

तापमान का हाल क्या? 

न्यूनतम तापमान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के कुछ हिस्सों में 1 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा. पंजाब के भटिंडा में देश के मैदानी इलाकों का सबसे कम न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री अधिक रहा, जबकि जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान में यह सामान्य से नीचे दर्ज किया गया.

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? 

27 और 28 जनवरी को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में व्यापक बारिश और बर्फबारी के साथ बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है. 27 जनवरी को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कहीं-कहीं भारी हिमपात और वर्षा हो सकती है. उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों और मध्य प्रदेश में भी इसी अवधि के दौरान बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है.

मौसम विभाग की चेतावनी

25 और 26 जनवरी को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में घना से बहुत घना कोहरा छाने की संभावना है. कुछ इलाकों में शीतलहर और शीत दिवस की स्थिति भी बन सकती है. मछुआरों को 24 से 29 जनवरी के बीच बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चिन्हित क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है.

ये भी पढ़ें- दिल्ली-NCR में तेज हवाओं के साथ बारिश, पहाड़ों पर बर्फ की चादर; IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

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नियमों को आसान करके भारत 2035 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात कर सकता है: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत संरचनात्मक सुधारों और नियमों को आसान बनाकर वर्ष 2035 तक अपने निर्यात को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की योजना बना रहा है। इसके लिए सरकार भारी सरकारी खर्च पर निर्भर रहने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास पर जोर दे रही है।

यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का तीसरा बड़ा प्रयास मानी जा रही है, ताकि देश दुनिया के व्यापार में अहम भूमिका निभा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने 15 प्राथमिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चुने हैं। इनमें हाई-एंड सेमीकंडक्टर, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर जैसे श्रम आधारित उद्योग शामिल हैं।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि नियमों को सरल बनाने, कागजी काम कम करने और व्यापार का माहौल बेहतर करने से कंपनियां ज्यादा उत्पादन कर पाएंगी, निवेश आएगा और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकेंगे।

यह नया प्रयास ऐसे समय में किया जा रहा है जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी हुई है, लेकिन इसके बावजूद भारत को एक स्थिर ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है।

दुनियाभर में सप्लाई चेन पर दबाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत खुद को एक भरोसेमंद वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग देश के तौर पर पेश कर रहा है।

हालिया आंकड़े बताते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सरकार की नीतियों और सुधारों का सकारात्मक असर दिखने लगा है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) यानी फिक्की के ताजा सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत के मैन्युफैक्चरिंग प्रदर्शन ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है और उद्योगों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

फिक्की की तिमाही मैन्युफैक्चरिंग सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 91 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनकी उत्पादन स्थिति बेहतर या स्थिर रही, जो पिछली तिमाही में 87 प्रतिशत थी।

उद्योगों का भरोसा भी बढ़ा है। 86 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि उनके ऑर्डर पहले जैसे या उससे बेहतर रहेंगे। इसमें हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती का भी योगदान रहा है।

इस सर्वे में शामिल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का सालाना कारोबार 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति सहायक बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत रही। वहीं, करीब 87 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें कामकाज और लंबे समय की जरूरतों के लिए बैंकों से पर्याप्त फंडिंग मिल रही है।

--आईएएनएस

डीबीपी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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