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SA20 में तीसरी बार चैंपियन बनीं काव्या मारन की सनराइजर्स, जानिए कब किस टीम ने जीती है ट्रॉफी

SA20 League 2026 Winner: साउथ अफ्रीका में खेली गई SA20 लीग 2025-26 में सनराइजर्स ईस्टर्न केप ने खिताबी जीत दर्ज कर ली है. काव्या मारन की टीम ने इस टूर्नामेंट में तीसरी बार ट्रॉफी उठाई. फाइनल में सनराइजर्स का सामना प्रिटोरिया कैपिटल्स से हुआ, जिसमें ट्रिस्टन स्टब्स और मैथ्यू ब्रिट्जके की शानदार बल्लेबाजी के दम पर सनराइजर्स ईस्टर्न केप ने SA20 लीग 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया.

काव्या मारन की टीम ने जीती तीसरी ट्रॉफी

रविवार की रात सनराइजर्स ईस्टर्न कप और प्रिटोरिया कैपिटल्स के बीच एक हाईवोल्टेज फाइनल मुकाबला खेला गया. इस अहम मुकाबले में काव्या मारन की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और खिताबी जीत दर्ज की. फाइनल मैच में प्रिटोरिया कैपिटल्स को हराकर सनराइजर्स की टीम तीसरी बार चैंपियन बनी. इससे पहले टीम ने साल 2023 और 2024 का खिताब जीता था. वहीं, साल 2025 में MI केपटाउन चैंपियन बना था.

पहला सीजन 2023 - सनराइजर्स ईस्टर्न कप

दूसरा सीजन 2024 - सनराइजर्स ईस्टर्न कप

तीसरा सीजन 2025 - MI केपटाउन

चौथा सीजन 2026 - सनराइजर्स ईस्टर्न कप

बेहद रोमांचक रहा फाइनल मैच

ग्रैंड फिनाले में टॉस जीतकर सनराइजर्स ईस्टर्न केप के कप्तान ट्रिस्टन स्टब्स ने गेंदबाजी का फैसला किया और प्रिटोरियस कैपिटल्स को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया गया. जहां, पहले बैटिंग करने आई प्रिटोरियस टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 158 रन बोर्ड पर लगाए, जिसमें डेवाल्ड ब्रेविस की 101 रनों की पारी अहम रही.

मगर, ब्रेविस का ये शतक बेकार चला गया, क्योंकि सनराइजर्स की टीम ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए 4 गेंदों के शेष रहते हुए खिताबी मुकाबला अपने नाम किया. सनराइजर्स के लिए मैथ्यू ब्रीट्जके और ट्रिस्टन स्टब्स ने मैच जिताऊ साझेदारी की. मैथ्यू ब्रीट्जके 49(68) और स्टब्स 63(41) अपनी टीम को जीत दिलाकर वापस लौटे. इस तरह Sunrisers Eastern Cape ने 6 विकेट से फाइनल मैच में बाजी मार ली.

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Bhishma Ashtami 2026 Katha: भीष्म पितामह का आशीर्वाद लेने के लिए भीष्म अष्टमी पर पढ़े ये व्रत कथा, मिलती है सुंदर संतान

Bhishma Ashtami Vrat Katha: हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी मनाई जाती है. यह दिन महाभारत काल के महान योद्धा और धर्मपरायण पितामह भीष्म की स्मृति से जुड़ा है. मान्यता है कि इसी तिथि को उन्होंने अपने प्राण त्यागे थे. इसलिए इसे उनकी पुण्य तिथि माना जाता है. सनातन परंपरा में इस दिन को शुभ माना गया है. लोग पितरों की शांति के लिए तर्पण करते हैं. कई श्रद्धालु संतान सुख की कामना से व्रत भी रखते हैं. माना जाता है कि भीष्म पितामह के आशीर्वाद से दंपत्तियों को सद्गुणी संतान का वरदान मिलता है.

व्रत और पूजा की परंपरा

भीष्म अष्टमी के दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है. पितरों का स्मरण कर जल और तिल से तर्पण किया जाता है. पूजा के समय व्रत कथा का पाठ करना जरूरी माना गया है. इसके बाद भगवान विष्णु और पितामह भीष्म की आराधना की जाती है.

पितामह भीष्म की व्रत कथा 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितामह भीष्म का जन्म महाराज शांतनु और मां गंगा के घर हुआ था. उनका मूल नाम देवव्रत था. उनका पालन-पोषण माता गंगा ने किया. बाद में उन्होंने महर्षि परशुराम से शस्त्र विद्या सीखी. गुरु बृहस्पति से राजनीति और धर्म का ज्ञान पाया. जब देवव्रत युवावस्था में पहुंचे तब उन्हें हस्तिनापुर का राजकुमार घोषित किया गया. इसी समय राजा शांतनु सत्यवती से विवाह करना चाहते थे. सत्यवती के पिता ने शर्त रखी कि उनकी बेटी का पुत्र ही राजा बनेगा. 

भीष्म प्रतिज्ञा का संकल्प

पिता की खुशी के लिए देवव्रत ने अपना अधिकार छोड़ दिया. उन्होंने जीवन भर ब्रह्मचारी रहने की कठोर प्रतिज्ञा ली. इसी महान त्याग के कारण उन्हें भीष्म कहा जाने लगा. यह व्रत आज भी “भीष्म प्रतिज्ञा” के नाम से जाना जाता है. इस त्याग से प्रसन्न होकर राजा शांतनु ने उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दिया. इसका अर्थ था कि भीष्म अपनी इच्छा से ही इस संसार को छोड़ेंगे.

महाभारत युद्ध और बाणों की शय्या

महाभारत के युद्ध में भीष्म कौरवों के सेनापति बने. उन्होंने दस दिनों तक युद्ध का नेतृत्व किया. अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर उन पर बाण चलाए. नारी के रूप में शिखंडी को देखकर भीष्म ने शस्त्र नहीं उठाए. बाणों से घायल होकर भीष्म धरती पर गिर पड़े. उस समय सूर्य दक्षिणायन में थे. इसलिए उन्होंने प्राण त्याग नहीं किए. वे कई दिनों तक बाणों की शय्या पर लेटे रहे. उत्तरायण आने के बाद माघ शुक्ल अष्टमी को उन्होंने देह त्याग किया. आज श्रद्धालु इस दिन पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा करते हैं. माना जाता है कि सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टी नहीं करता है. 

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  Sports

ICC को संबंध सुधारने चाहिए, न कि...बांग्लादेश बाहर हुआ तो तिलमिला गए आफरीदी

आईसीसी के फैसले के बाद, आईसीसी के अल्टीमेटम के बाद, चेतावनी देने के बाद मोहसीन नकवी जिस तरह की भाषा बोल रहे थे उस पर तो लगाम लग गई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पीसीबी  बैकफुट पर आता नजर आ रहा है। T20 वर्ल्ड कप के को लेकर उन्होंने अपनी टीम भी अनाउंस कर दी। लेकिन इस टीम के पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी हमेशा की तरह आदतन जिस तरह के वो बयान देते आ रहे हैं। कंउसी तरह का एक और ट्रोवर्शियल स्टेटमेंट् उन्होंने दे दिया है। उन्हें बड़ी जोर से गुस्सा आ गया और गुस्से में उन्होंने आईसीसी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया है। लेकिन भारत में हम उनके पोस्ट नहीं देख सकते क्योंकि अकाउंट विद हेल्ड है क्योंकि वह जिस तरह के बयानबाजी इंडिया के अगेंस्ट करते रहे हैं तो इंडिया में तो उनका अकाउंट बैन है। 

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शाहिद आफरीदी ने कहा कि आईसीसी ने डबल स्टैंडर्ड दिखाया है। बांग्लादेश के साथ और बांग्लादेश के लोगों के साथ। यह अन्याय है। आईसीसी की दोहरे मापदंड की आलोचना करते हुए कहा कि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान भारत को दुबई में अपने मैच खेलने की अनुमति दी गई थी। अफरीदी ने एक्स पर लिखा, बांग्लादेश और आईसीसी प्रतियोगिताओं में खेल चुके एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में मैं आईसीसी की असंगतता से बेहद निराश हूं। इसने 2025 में पाकिस्तान का दौरा न करने के लिए भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्वीकार किया, फिर भी बांग्लादेश के मामले में वही समझ दिखाने को तैयार नहीं दिख रहा है। वैश्विक क्रिकेट प्रशासन की नींव निरंतरता और निष्पक्षता पर टिकी है। बांग्लादेश के खिलाड़ी और उसके लाखों प्रशंसक सम्मान के पात्र हैं न कि मिश्रित मापदंडों के। आईसीसी को संबंध सुधारने चाहिए, न कि उन्हें नष्ट करना चाहिए। 

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पाकिस्तान का दर्द यह नहीं है कि बांग्लादेश खेलने आ रहा है कि नहीं आ रहा है। वो बस किसी तरह से भारत पर टारगेट करना चाहते हैं क्योंकि जो चैंपियंस ट्रॉफी में उनके साथ हुआ है कि जो एक कहावत चलती आ रही थी आप सब ने देखा होगा।  कैसे चैंपियंस ट्रॉफी में ये भारत वाले हमारे यहां नहीं आते हैं। यह सब बात शुरुआत हुई है 2023 ओडीआई वर्ल्ड कप से जब वहां पे टीम इंडिया ने टीम इंडिया आना आने की बात हुई थी कि भारत आना है पाकिस्तान ने कहा था हम नहीं आएंगे फिर ICC ने हड़काया और उसके बाद एकदम चुपचाप चले आए और उसके बाद वेलकम हुआ बहुत खुश भी हुए बहुत मेहमान नवाजी हुई। 
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