ईयू की एचआरवीपी काजा कैलास पहली बार आधिकारिक दौरे पर पहुंचीं भारत
नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कैलास शनिवार को अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचीं। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए सही समय पर बताया। दोनों पक्षों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बातचीत हो रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस दौरे की घोषणा की। उन्होंने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सही समय पर अहम बताया।
रणधीर जायसवाल ने कहा, “ईयू एचआरवीपी काजा कैलास का ईयू हाई रिप्रेजेंटेटिव/वाइस-प्रेसिडेंट के तौर पर भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर हार्दिक स्वागत है। यह दौरा भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक सही समय पर हो रहा है, जो नियमित उच्च स्तरीय एंगेजमेंट की रफ्तार को आगे बढ़ाएगी।”
इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ईयू के सदस्य देशों के राजदूतों के साथ बातचीत की। ईएएम के मुताबिक चर्चा मौजूदा ग्लोबल माहौल पर केंद्रित थी, जिसमें अस्थिरता और तेजी से बदलती रफ्तार है।
विदेश मंत्री ने मीटिंग के बाद एक्स पर पोस्ट किया, “आज ईयू देशों के राजदूतों से बातचीत करके खुशी हुई। उनसे दुनिया के मौजूदा हालात के बारे में बात की, जिसमें उतार-चढ़ाव और अस्थिरता न्यू नॉर्मल है।”
जयशंकर ने भारत-ईयू के बीच और करीबी सहयोग की जोरदार वकालत की और उन क्षेत्रों पर जोर दिया जहां यह साझेदारी दुनिया को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि मजबूत रिश्ते मजबूत सप्लाई चेन पर सहयोग के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम से बचाने में मदद करेंगे।
ईयू के राजदूत के साथ यह मुलाकात यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भारत के स्टेट दौरे से पहले हुई है। बता दें, दोनों ईयू नेता 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यूरोपीय संघ के नेताओं का यह दौरा भारत-ईयू रिश्तों में एक अहम मील का पत्थर होगा।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत ईयू नेताओं की मेजबानी करने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। दोनों नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर यहां पहुंच रहे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू समिट की सहअध्यक्षता भी करेंगे।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
2026 की शुरुआत से अब तक बाजार 4 फीसदी नीचे, एफपीआई ने 36,500 करोड़ रुपए निकाले
मुंबई, 24 जनवरी (आईएएनएस)। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंताएं रहीं।
इस सप्ताह के दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। इनमें रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा, जिसमें 11.33 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर भी 5 प्रतिशत से ज्यादा टूटे।
हफ्ते के दौरान निफ्टी में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स आखिरी दिन 769 अंक यानी 0.94 प्रतिशत गिरकर 81,537 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 2.43 प्रतिशत नीचे रहा।
स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर दबाव ज्यादा देखने को मिला, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 में 4.58 प्रतिशत, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 5.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बैंक निफ्टी भी कमजोर रहा और यह एक अहम सपोर्ट लेवल 58,800 के नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में नकारात्मक संकेत मिले।
विशेषज्ञों के अनुसार, हफ्ते की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से बाजार को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की धारणा को फिर से कमजोर कर दिया।
दुनिय भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव खासकर अमेरिका की तरफ से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर सख्त बयान, ने वैश्विक बाजारों को परेशान किया। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और बिकवाली बढ़ गई।
इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ मामलों की समीक्षा को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और भी सीमित कर दिया।
1 जनवरी 2026 से अब तक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 36,500 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।
इस बीच भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92 रुपए प्रति डॉलर के पास पहुंच गया, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी है।
निवेशक अब केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले कुछ समय के लिए बाजार में तेजी की छोटी लहर देखने को मिल सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई है।
हालांकि, बाजार में स्थायी सुधार तभी आएगा जब वैश्विक हालात बेहतर होंगे, कंपनियों के नतीजे अच्छे आएंगे और बजट से निवेशकों को भरोसा मिलेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/वीसी
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