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हॉस्पिटल में भर्ती था BF, 2 दिन पागलों की तरह ढूंढती रही प्रेमिका, रोते हुए 'सासू मां' के सामने किया ये वादा!

सोशल मीडिया पर एक प्रेमी जोड़े का बेहद भावुक वीडियो वायरल हो रहा है. एक्सीडेंट के बाद अस्पताल में भर्ती बॉयफ्रेंड को देख प्रेमिका का सब्र टूट गया और उसने रोते हुए सबके सामने एक ऐसा वादा किया जिसने सबका दिल जीत लिया.

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अनिल अंबानी पर ₹1.5 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप:सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया; CBI-ED से 10 दिन में सीलबंद रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर चल रहे बैंक फ्रॉड मामले में शुक्रवार को नए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस कोर्ट में दायर की गई पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं। PIL में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप और उसकी कंपनियों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की कोर्ट मॉनिटर्ड जांच की मांग की गई है। इस पर कोर्ट ने CBI और ED से अंबानी के खिलाफ चल रही जांच पर 10 दिन में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सुनवाई की 5 बड़ी बातें जनहित याचिका में फ्रॉड के आरोप PIL में कहा गया कि CBI की 21 अगस्त की FIR और ED की कार्यवाही सिर्फ फ्रॉड के छोटे हिस्से को कवर करती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI और ED की तरफ से पेश होकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का समय मांगा। पिछली सुनवाई में बेंच ने पार्टियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा था। PIL को तीन हफ्ते बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया। फंड डायवर्जन मामले में 10,117 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी जब्त इससे पहले ED ने नवंबर में समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं। ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। जांच में फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा ED ने अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था। लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले। ED ने इसे 'इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर' बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए।

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  Sports

T20 World Cup 2026 से बाहर हो सकता है बांग्लादेश, सरकार के आदेश से बढ़ा संकट

बांग्लादेश के टी20 विश्व कप 2026 में खेलने की संभावनाएं लगभग खत्म होती नजर आ रही हैं। गुरुवार को हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नज़रुल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों को भारत की यात्रा न करने का निर्देश दे दिया है।

बता दें कि यह फैसला व्यावहारिक रूप से बांग्लादेश के टूर्नामेंट से बाहर होने की पुष्टि जैसा माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, आईसीसी आज या कल आधिकारिक बयान जारी कर सकता है और बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल किए जाने का ऐलान संभव माना जा रहा है।

गौरतलब है कि क्रिकेट के दीवानों वाला देश बांग्लादेश हमेशा वैश्विक टूर्नामेंटों में अपनी मौजूदगी से रोमांच बढ़ाता रहा है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को बांग्लादेश क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर राजनीतिक और बाहरी दबाव बीच में न आते, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

दरअसल, बांग्लादेश की भागीदारी पर सवाल उस वक्त से उठने लगे थे, जब बीसीसीआई ने कोलकाता नाइट राइडर्स से मुस्तफिज़ुर रहमान को रिलीज़ करने को कहा था। उस फैसले को बांग्लादेश में हुई कथित घटनाओं से जोड़कर देखा गया था। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को 24 घंटे का समय दिया था, ताकि वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके। उस दौरान खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि सरकार उनका साथ देगी।

लेकिन जब सरकार की ओर से सीधे निर्देश जारी हुए, तो हालात और जटिल हो गए। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ी सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बचते दिखे। बताया गया है कि हालिया घटनाओं के चलते टीम के भीतर एक डर का माहौल बन गया है।

इसी बीच बांग्लादेश क्रिकेट के वरिष्ठ खिलाड़ी तमीम इक़बाल को लेकर भी विवाद सामने आया। गौरतलब है कि तमीम ने बोर्ड से भावनाओं में बहकर फैसला न लेने की अपील की थी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अधिकारी एम नज़मुल इस्लाम ने उन्हें “भारतीय एजेंट” तक कह दिया था। इस बयान पर खिलाड़ियों में गहरा रोष देखने को मिला।

हालांकि नज़मुल इस्लाम ने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन इस टिप्पणी ने खिलाड़ियों के मन पर गहरी छाप छोड़ी है। मौजूदा हालात में बांग्लादेश क्रिकेट एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां खेल से ज़्यादा राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दे फैसलों को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं।

अब सबकी नजरें आईसीसी के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि उसका फैसला न सिर्फ टूर्नामेंट की तस्वीर बदलेगा, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट के भविष्य की दिशा भी तय करेगा।
Fri, 23 Jan 2026 21:01:24 +0530

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