Saraswati Mata Ki Aarti: आज बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए जरूर पढ़े आरती, मिलेगा पूजा का फल
Saraswati Mata Ki Aarti: आज यानी 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है. यह हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाई जाती है. इस शुभ अवसर पर संगीत की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है. यही नहीं बसंत पंचमी के दिन स्कूल-कॉलेजों में सरस्वती की पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है,
क्योंकि इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है इसलिए सभी इस रंग के वस्त्र धारण करते हैं. यही नहीं पीले रंग के पकवानों का भोग मां सरस्वती को अर्पित किया जाता है. कहते हैं कि यदि सच्चे मन से बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आरती और उनका मंत्र जाप किया जाए तो आपके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है. ऐसे में आइए देवी सरस्वती की आरती पढ़ते हैं.
मां सरस्वती की आरती Saraswati Mata Ki Aarti
मां सरस्वती की आरती के चमत्कारी लाभ
मां सरस्वती की आरती करने से बुद्धि, ज्ञान और रचनात्मकता में वृद्धि होती है जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा और परीक्षाओं में सफलता मिलती है. यह मानसिक तनाव को दूर करने और मन को शांति प्रदान होता है. सरस्वती माता की आरती करने से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और सुख-शांति आती है.
सरस्वती आरती करने का सही तरीका
सुबह-शाम या विशेष रूप से गुरुवार और बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीया जलाकर सच्चे मन से आरती करनी चाहिए.
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ट्रंप का कनाडा को झटका: 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्यौता वापस लिया
वाशिंगटन, 23 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने नए बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया है। यह कदम उत्तर अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रही ताजा तनातनी के बीच उठाया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के ज़रिए यह जानकारी दी। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए लिखा कि पीस बोर्ड ने कनाडा को भेजा गया अपना निमंत्रण वापस लेने का फ़ैसला किया है।
हालांकि, पोस्ट में ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि उन्होंने कनाडा को दिया गया यह निमंत्रण क्यों रद्द किया। वापस लेने के पीछे की वजह को लेकर उन्होंने कोई कारण नहीं बताया।
बता दें कि बुधवार को, ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ज़िंदा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है कि कनाडा अपने अस्तित्व के लिए अमेरिका पर निर्भर है।
कार्नी ने कहा, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक शानदार साझेदारी बनाई है। अर्थव्यवस्था में, सुरक्षा में और समृद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान में, लेकिन कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा नहीं है। कनाडा इसलिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि हम कनाडाई हैं।
विश्व में शांति स्थापित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत की है। इसमें शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग 60 देशों को न्योता भेजा। इजरायली मीडिया के अनुसार, 60 में से दुनिया के 25 देशों ने ट्रंप के न्यौते को स्वीकार कर लिया है। बोर्ड ऑफ पीस में अब तक इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्किए, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, मिस्र, वियतनाम और मंगोलिया शामिल हुए।
आठ इस्लामिक देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता स्वीकार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी गाजा में इजरायल-हमास सीजफायर समझौते के दूसरे फेज के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाया था। हालांकि, भारत की तरफ से फिलहाल इसपर कोई फैसला सामने नहीं आया है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि फिलहाल इसपर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, स्वीडन, नार्वे और कई दूसरे बड़े देशों ने इस साइनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं लिया। इसके साथ ही जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्किए और यूक्रेन जैसे कई देशों ने इस न्योते पर कोई वादा नहीं किया है। बोर्ड में शामिल सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा, और स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।
--आईएएनएस
एएस/
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