देश की आर्थिक संभावनाओं पर लोगों का बढ़ा भरोसा, 2026-27 में विकास दर 7 से 8 प्रतिशत के बीच रहेगी: फिक्की प्री-बजट सर्वे
नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने अपना प्री-बजट सर्वे 2026-27 जारी किया है। इस सर्वे में भारत के उद्योग जगत (इंडिया इंक) ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले देश की आर्थिक संभावनाओं को लेकर काफी आशावादी रुख दिखाया है। सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने भारत की विकास यात्रा पर मजबूत विश्वास जताया है।
सर्वे के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भारत की आर्थिक संभावनाओं में भरोसा व्यक्त किया। करीब 50 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में विकास दर 7 से 8 प्रतिशत के बीच रहेगी। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के मजबूत आर्थिक आधार पर भरोसा दर्शाता है।
साथ ही, लगभग 42 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर हासिल किया जाएगा, जो सरकार की राजकोषीय अनुशासन की नीति पर विश्वास को मजबूत करता है।
उद्योग ने बजट से तीन मुख्य प्राथमिकताओं की मांग की है। पहली, रोजगार सृजन पर जोर, दूसरी, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को जारी रखना और तीसरी, निर्यात को मजबूत समर्थन देना।
सर्वे में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा क्षेत्र और एमएसएमई को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। उद्योग का कहना है कि सरकार को मैन्युफैक्चरिंग और पूंजीगत व्यय पर फोकस बनाए रखना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास के लिए एक मेगा क्लस्टर बनाना जरूरी है, जिसमें ओईएम, ईएमएस फर्म और कंपोनेंट सप्लायर्स को एक साथ लाया जाए। रक्षा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय का हिस्सा 30 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए।
साथ ही, फ्रंटलाइन संपत्तियों, यूएवी, काउंटर-यूएवी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एआई आधारित क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर ध्यान देना चाहिए। ड्रोन क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को 1,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाना और 1,000 करोड़ रुपए का एक अलग आरएंडडी फंड बनाना सुझाया गया है।
निर्यात को लेकर उद्योग ने वैश्विक व्यापार तनाव, टैरिफ अनिश्चितता और सीबीएएम जैसे गैर-टैरिफ बाधाओं का जिक्र किया। बजट में निर्यात को मजबूत बनाने के लिए ट्रेड फैसिलिटेशन, कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान करना, लॉजिस्टिक्स और पोर्ट संबंधी बाधाएं कम करना, निर्यात प्रोत्साहन और रिफंड व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।
डायरेक्ट टैक्स में मुख्य मांगें कंप्लायंस को सरल बनाना, डिजिटलीकरण बढ़ाना, टैक्स निश्चितता देना, विवाद समाधान तेज करना और मुकदमेबाजी कम करना हैं। साथ ही, कॉर्पोरेट पुनर्गठन और निवेशकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, फिक्की का यह सर्वे बताता है कि उद्योग बजट से विकास, रोजगार और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले संतुलित फैसले की उम्मीद कर रहा है। यह बजट भारत को वैश्विक मूल्य शृंखला में मजबूत स्थान दिलाने और संरचनात्मक सुधारों को तेज करने का मौका होगा, जबकि राजकोषीय समझदारी भी बरती जाए।
--आईएएनएस
एसएचके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केरल के मुख्यमंत्री विजयन शुक्रवार को अदाणी समूह के विझिंजम बंदरगाह के फेज-2 के कंस्ट्रक्शन को लॉन्च करेंगे
तिरुवनंतपुरम, 22 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन शुक्रवार को अदाणी समूह के विझिंजम बंदरगाह के फेज-2 के कंस्ट्रक्शन को लॉन्च करेंगे। यह जानकारी राज्य के बंदरगाह मंत्री वी.एन. वासवन की ओर से दी गई।
9,700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के दूसरे चरण के शिलान्यास के तहत होने वाले निर्माण से केरल की स्थिति समुद्री क्षेत्र में पहले के मुकाबले और मजबूत हो जाएगी।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो इस परियोजना में केंद्र की रणनीतिक भागीदारी को दिखाता है।
केंद्रीय मंत्री वासावन ने कहा कि दूसरा फेज विझिंजम की क्षमता, बुनियादी ढांचे और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में एक महत्वपूर्ण वृद्धि करेगा, इस बंदरगाह का वाणिज्यिक परिचालन केवल एक वर्ष पहले ही शुरू हुआ है।
दूसरे चरण के तहत, विझिंजम की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता पांच गुना बढ़कर एक मिलियन टीईयू से प्रति वर्ष पांच मिलियन टीईयू हो जाएगी।
इस चरण में नियोजित नए बुनियादी ढांचे में एक रेलवे यार्ड, एक बहुउद्देशीय बर्थ, एक लिक्विड टर्मिनल और एक टैंक फार्म शामिल हैं।
दूसरे चरण में बर्थ की लंबाई मौजूदा 800 मीटर से बढ़ाकर 2,000 मीटर कर दी जाएगी और ब्रेकवाटर को चार किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा, जिससे बंदरगाह एक साथ कई अति-विशाल कंटेनर जहाजों को संभालने में सक्षम हो जाएगा।
पूरा होने पर, विझिंजम भारत का सबसे बड़ा स्ट्रेट-बर्थ बंदरगाह बन जाएगा, जो एक समय में चार मदरशिप को समायोजित करने में सक्षम होगा।
वहीं, लिक्विड टर्मिनल से विझिंजम को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे बड़े जहाजों को लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान ईंधन भरने की सुविधा मिलेगी, जो वर्तमान में केवल चुनिंदा वैश्विक बंदरगाहों पर ही उपलब्ध है।
पूर्व-पश्चिम के प्रमुख शिपिंग मार्गों के निकट स्थित होने के कारण, इस सुविधा से अतिरिक्त यातायात आकर्षित होने और राज्य के लिए पर्याप्त कर राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है।
वासवन ने कहा कि चरण-2 विस्तार का एक बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी।
समुद्री भूमि को पुनः प्राप्त करके लगभग 55 हेक्टेयर भूमि सृजित की जाएगी।
फेज-2 में कुल क्रेनों की संख्या बढ़कर 100 हो जाएगी, जिसमें 30 शिप-टू-शोर क्रेन शामिल हैं।
प्रारंभिक परिचालन सफलता पर मंत्री ने कहा कि विझिंजम बंदरगाह ने पहले ही 710 जहाजों से 15 लाख टीईयू से अधिक का संचालन किया है और यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के बंदरगाहों के लिए सीधी सेवाएं स्थापित की हैं।
वासवन ने कहा, चरण-2 के साथ, विझिंजम बंदरगाह संभावनाओं से विकास की ओर अग्रसर है और यह विस्तार दक्षिण भारत में रसद, रोजगार और व्यापार को गति प्रदान करेगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
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