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ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की जिद के बीच पुतिन ने लगाई इसकी कीमत, बोले- 'यह रूस की चिंता का विषय नहीं'

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बात साफ कर दी है कि ग्रीनलैंड यूएस का होगा। हालांकि, डेनमार्क को इस बात से ऐतराज है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के सेल्फ-गवर्निंग आर्कटिक आइलैंड को खरीदने के प्लान पर प्रतिक्रिया जाहिर की है। पुतिन ने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक कॉलोनी जैसा बर्ताव किया है। एक तरफ जहां ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर मोलभाव करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर पुतिन ने इसकी नई कीमत लगा दी है।

क्रेमलिन में बुधवार को रूस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के साथ मीटिंग के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक कॉलोनी जैसा बर्ताव किया है, और अगर बेरहमी से न कहा जाए तो काफी सख्ती से बर्ताव किया है।

पुतिन ने एक बात साफ कर दी कि ग्रीनलैंड को लेकर जो भी बवाल चल रहा है, उससे रूस का कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेने वाले बयान के बाद से इस बात की खूब चर्चा हो रही थी कि महाशक्तियों के बीच इसे लेकर टकराव हो सकता है, लेकिन एक बात यह भी है कि रूस और चीन ने कभी भी सामने आकर ग्रीनलैंड पर कोई खास टिप्पणी नहीं की। यही कारण है कि अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में रूस के राष्ट्रपति की तरफ से पहली बार ग्रीनलैंड को लेकर बयान सामने आया है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “यह निश्चित रूप से हमारी चिंता का विषय नहीं है। मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 1867 में रूस से अलास्का और 1916 में डेनमार्क से कैरिबियन इलाका खरीदा था, जिसे आज यूएस वर्जिन आइलैंड्स के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रीनलैंड की कीमत 1 बिलियन डॉलर तक हो सकती है और अमेरिका इसे खरीदने की ताकत रखता है। इससे इतर मीडिया से बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात से इनकार किया कि मॉस्को का ग्रीनलैंड के मामलों में दखल देने का कोई योजना है।

दूसरी ओर, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने दावोस में दोहराया कि कोपेनहेगन अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की इजाजत नहीं देगा। डेनमार्क ने 18वीं सदी में ग्रीनलैंड को कॉलोनी बनाया था और 1979 में उसे अपना देश बनाने की इजाजत दी थी। अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड में सैनिक भेजे थे और उत्तर-पश्चिमी तट पर एक एयरबेस बनाए हुए है।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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संत सूरदास योजना क्या है, जानें पात्रता, लाभ और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी

संत सूरदास योजना गुजरात सरकार की एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है, जिसे सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग द्वारा लागू किया गया है. इस योजना का संचालन Government of Gujarat के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य बीपीएल परिवारों के गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके पालन-पोषण और पुनर्वास में सहयोग देना है.

योजना का उद्देश्य क्या है? 

संत सूरदास योजना का लक्ष्य ऐसे बच्चों को सामाजिक सुरक्षा देना है, जो 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से ग्रसित हैं या जो कृत्रिम अंगों की सहायता से भी स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं. यह सहायता परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चे की देखभाल और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायक होती है.

योजना के लाभ

योजना के तहत पात्र लाभार्थी को हर माह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है. यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली के माध्यम से भेजी जाती है. सहायता तब तक जारी रहती है, जब तक लाभार्थी 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेता. 18 वर्ष पूरे होते ही योजना का लाभ स्वतः बंद हो जाता है.

पात्रता की शर्तें क्या हैं? 

संत सूरदास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का गुजरात का मूल निवासी होना अनिवार्य है. बच्चे की आयु 0 से 17 वर्ष के बीच होनी चाहिए. दिव्यांगता 80 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए और आवेदक का नाम बीपीएल सूची में 20 तक के स्कोर के साथ शामिल होना चाहिए. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बीपीएल मानदंड ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा शहरी क्षेत्रों के लिए आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के अनुसार तय किए गए हैं.

आवेदन प्रक्रिया

इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाता है. इच्छुक अभिभावक ई-समाज कल्याण पोर्टल पर जाकर नया पंजीकरण कर सकते हैं. पंजीकरण के बाद प्रोफाइल अपडेट कर संत सूरदास योजना का चयन करना होता है. आवेदन फॉर्म भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर आवेदन सबमिट किया जाता है. आवेदन संख्या के माध्यम से स्थिति की ऑनलाइन जांच भी की जा सकती है.

आवश्यक दस्तावेज चाहिए? 

आवेदन के समय पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, बीपीएल प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक की प्रति अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होती है. दस्तावेज सही और स्पष्ट न होने पर आवेदन निरस्त या लंबित हो सकता है.

महत्वपूर्ण सूचना

संत सूरदास योजना केवल पात्र बीपीएल परिवारों के गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए लागू है. आवेदकों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करते समय सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरें ताकि किसी प्रकार की देरी या अस्वीकृति से बचा जा सके.

ये भी पढ़ें- गुजरात सरकार की मुख्यमंत्री कृषि यंत्रीकरण योजना से किसानों को मिलेगा ₹11 लाख तक का अनुदान

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कौन है वह शख्स... जो विराट कोहली की आरसीबी पर तिजोरी लूटाने को है तैयार, कितनी है नेटवर्थ

Who is Adar Poonawalla net worth: पुणे की वैक्सीन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदर पूनावाला का कहना है कि वह आरसीबी को खरीदने के लिए मुंह मांगा रकम देने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि मैं आरसीबी को खरीदने के लिए एक मजबूत बोली पेश करूंगा. ऐसी अटकलेें हैं कि आरसीबी आगामी आईपीएल सीजन से पहले बिक जाएगी. यानी उसका मालिक बदल जाएगा. Thu, 22 Jan 2026 21:41:26 +0530

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