Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की होगी विशेष पूजा, साधना से मिलती है सिद्धि, जानें देवी के बारे में
Gupt Navratri 2026: आज गुरुवार के दिन 22 जनवरी, 2026 को गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है. आज के दिन पर दस महाविद्याओं की चौथी देवी, मां भुवनेश्वरी की पूजा का विधान है. बता दें कि माघ महीने की गुप्त नवरात्रि साल की प्रथम नवरात्रि होती है, जिसका महत्व कहीं अधिक होता है. चलिए जानते हैं आज के दिन और आज की देवी के बारे में विस्तार से.
गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन का महत्व
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए होता है. इस दिन ध्यान और मंत्र साधना के माध्यम से हृदय चक्र को सक्रिय किया जाता है. माता भुवनेश्वरी की कृपा से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है.
कौन हैं देवी भुवनेश्वरी?
देवी भुवनेश्वरी 10 महाविद्याओं के चौथे स्थान पर विराजमान हैं. इन्हें ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी कहते हैं, जो पराशक्ति का दिव्य स्वरूप है. ये संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति और संचालन की शक्ति मानी जाती हैं. इन्हें सभी लोकों और ऐश्वर्य पर नियंत्रण रखना होता है.
मां भुवनेश्वरी की उपासना से साधक को मानसिक शांति, वैभव और आत्मिक चेतना मिलती है. इनका स्वरूप आकाश जैसा विशाल और दिव्य प्रकाश से युक्त माना जाता है. भुवनेश्वरी देवी अपने हाथों में चंद्रमा, पाश और अंकुश धारण करती हैं. माता अभय और वरद मुद्रा से जनमानस को संरक्षण और आशीर्वाद देती हैं.
देवी भुवनेश्वरी की साधना करने के फल
अगर हम माता भुवनेश्वरी की पूजा करते हैं तो आपकी मानसिक स्थिति में सुधार होता है. जातक में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है. ऐश्वर्य और सम्मान प्राप्त होता है. साधक को भय, भ्रम और अस्थिरता से मुक्ति मिलती है. ये लोग अपने जीवन में संतुलन पाते हैं और स्पष्टता लाने में सहायता करते हैं.
दुर्गमासुर का वध
पौराणिक कथाओं की मानें तो दुर्गम नामक राक्षस का संहार किया था. इस राक्षस के अत्याचारों ने पृथ्वी पर हाहाकार मचा दिया था. इसके बाद देवता और पंडित काफी चिंतित हो गए और उन्होंने हिमालय में कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां प्रकट हुई और उनके नेत्रों से निकली जलधाराओं से पृथ्वी पर भी जल का संचार हुआ. उन्होंने औषधियों का भी विकास किया. इसके बाद माता ने दुर्गमासुर का वध किया. इन्हें शताक्षी और शाकंभरी भी कहते हैं.
मां भुवनेश्वरी के विशेष मंत्र
मूल मंत्र- ऊं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नम:.
पंचाक्षर मंत्र- ऊं श्रीं ऐं क्लीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः.
दरिद्रता नाशक मंत्र- हूं हूं ह्रीं ह्रीं दारिद्रय नाशिनी भुवनेश्वरी ह्रीं ह्रीं हूं हूं फट्.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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