नोएडा इंजीनियर की मौत मामले में योगी सरकार सख्त, जानें अब तक क्या-क्या लिए एक्शन?
Noida Engineer Death Case: नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत मामले में लगातार अपडेट सामने आ रहे हैं. इस मामले में योगी सरकार सख्त नजर आ रही है. सरकार की ओर से कई कड़े एक्शन लिए जा चुके हैं. इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटाना हो या फिर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन योगी सरकार ने अब तक कई कदम उठाए हैं. आइए जानते हैं कि अब तक इस केस में सरकार की ओर से क्या-क्या एक्शन लिए गए हैं.
एसआईटी का गठन
योगी सरकार की ओऱ से नोएडा इंजीनियर युवराज की मौत मामले में एसआईटी का गठन किया गया है. एसआईटी ने अपने जांच भी तेज कर दी है. SIT ने बुधवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में समीक्षा बैठक कर घटनास्थल का निरीक्षण किया.
SIT को 5 दिन में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
बता दें कि एसआईटी टीम के हेड और मेरठ एडीजी भानु भास्कर का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है और पांच दिन के अंदर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी. एसआईटी की जांच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से लेकर इस मामले में किन-किन लोगों की लापरवाही है जिम्मेदारों को खोजना है.
योगी सरकार की ओर से लिए गए ये एक्शन
- सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर रियल एस्टेट कंपनियों पर FIR दर्ज
- एम्सड विशटाउन प्रा. लि. और लोटस ग्रीन के खिलाफ मामला दर्ज
- एम्सड विशटाउन परियोजना के मालिक अभय कुमार हिरासत में
- जांच में बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतज़ामों की भारी कमी उजागर
- नोएडा प्राधिकरण का एक जूनियर इंजीनियर निलंबित
- अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
- बिल्डरों और प्लॉट-मालिकों को सुरक्षा मानकों को लेकर नोटिस
ये कार्रवाई भी अब तक की जा चुकी हैं
- घटनास्थल और आसपास के खतरनाक गड्ढों पर स्थायी बैरिकेडिंग कर दी गई है.
- चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टिव मार्कर और प्रकाश व्यवस्था लगाई गई हैं
- प्रशासन ने भविष्य में दुर्घटना रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए
हेल्पलाइन नंबर भी हुए जारी
बता दें कि इंजीनियर मौत मामले को लेकर सरकार ने नोएडा के सभी निर्माणाधीन और अधूरी साइटों का 24×7 सुरक्षा ऑडिट करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली साइटों पर सख्त कार्रवाई होगी. यही नहीं प्रशासन ने इस तरह की किसी भी परेशानी या अव्यवस्था को लेकर हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है. व्हाट्सएप/हेल्पलाइन नंबर 92055 59204 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है.
नागरिक खतरनाक स्थानों की फोटो और लोकेशन भेज सकेंगे.
इस हेल्पलाइन नंबर पर क्षेत्र के नागरिक खतरनाक जगहों या साइट की जानकारी भेज सकेंगे. उनके फोटो भी भेज सकेंगे...
- 24 घंटे के भीतर निरीक्षण और कार्रवाई का आश्वासन
- SDRF, NDRF और दमकल विभाग के साथ समन्वय मजबूत
- सभी राहत-बचाव इकाइयों को विशेष प्रशिक्षण के निर्देश
- आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी रेस्क्यू पर जोर
- प्रशासन की जनता से अपील-असुरक्षित स्थलों की तुरंत सूचना दें
- खुले गड्ढे या टूटी बैरिकेडिंग दिखे तो हेल्पलाइन पर शिकायत करें
- मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि-लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
- दोषियों पर कठोर कार्रवाई और भविष्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित
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जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे के हत्यारे को उम्रकैद की मिली सजा
टोक्यो, 21 जनवरी (आईएएनएस)। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की 2022 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब इस मामले में जापान की एक अदालत ने बुधवार को हत्या के आरोपी व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई। स्थानीय मीडिया ने बताया कि दोषी व्यक्ति ने घर में बनी बंदूक से इस घटना को अंजाम दिया था। कोर्ट ने इस कृत्य को घिनौना और बहुत खतरनाक बताया।
नारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने तेत्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा सुनाई। यामागामी की उम्र 45 साल है और अभियोजक ने कोर्ट से उसके लिए उम्रकैद की मांग की थी।
यामागामी ने माना कि उसने घर में बनी बंदूक से आबे की हत्या की थी। बता दें, जिस वक्त आबे को गोली मारी गई थी, वह नारा में भाषण दे रहे थे।
जापान के क्योडो न्यूज ने बताया कि कोर्ट की कार्रवाई के दौरान, यामागामी के बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसकी जेल की सजा 20 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और दावा किया कि यामागामी एक धार्मिक समूह की वजह से नुकसान का शिकार हुआ था।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसकी दुखद परवरिश ने आबे को गोली मारने के लिए उकसाया।
तेत्सुया यामागामी ने कहा कि उसे यूनिफिकेशन चर्च से रंजिश थी क्योंकि उसकी मां ने धार्मिक समूह को 100 मिलियन येन (6,33,000 डॉलर) का दान दिया था, जिससे उसके परिवार को पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उसका मानना है कि आबे जापान में यूनिफिकेशन चर्च के राजनीतिक हस्तक्षेप के केंद्र में थे।
कोर्ट ने यामागामी को हत्या के आरोप और फायरआर्म्स एंड स्वॉर्ड्स कंट्रोल लॉ में बताए गए गन डिस्चार्ज प्रोविजन को तोड़ने का दोषी पाया। घटना के समय यामागामी का होममेड फायरआर्म कानून के तहत कवर नहीं था।
जैसे ही इस केस ने यूनिफिकेशन चर्च के सदस्यों से डोनेशन मांगने पर ध्यान खींचा, जापानी सरकार ने जांच शुरू की। इसके नतीजे में टोक्यो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने चर्च को भंग करने और एक धार्मिक कॉर्पोरेशन के तौर पर उसके टैक्स बेनिफिट्स छीनने का ऑर्डर जारी किया।
संगठन द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैनिपुलेटिव फंडरेजिंग तरीकों को रेगुलेट करने के लिए 2022 में एक कानून लागू किया गया। यूनिफिकेशन चर्च के सदस्य के बच्चों, जिन्हें सेकंड-जेनरेशन फॉलोअर्स कहा जाता है, की तकलीफ ने लोगों का ध्यान खींचा।
जापान के सबसे लंबे समय तक लीडर रहे शिंजो आबे की 2022 में नारा में भाषण देते समय गोली लगने से 67 साल की उम्र में मौत हो गई। उनका जन्म एक जाने-माने राजनीतिक परिवार में हुआ था और 1993 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने जाने से पहले, उन्होंने अपने पिता, पूर्व विदेश मंत्री शिंतारो आबे के सचिव के तौर पर काम किया। इसके अलावा, उन्होंने 2006 और 2007 के बीच जापान के पीएम के तौर पर काम किया और 2012 में फिर से सत्ता संभाली। लगभग आठ साल बाद 2020 में आबे ने स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से पद छोड़ दिया था।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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