सोने-चांदी ने बनाया एक और नया रिकॉर्ड, वैश्विक तनावों के बीच लगातार बढ़ रही सुरक्षित निवेश की मांग
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। बुधवार को सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल देखने को मिली और यह एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। चांदी ने भी अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया उच्चतम स्तर छू लिया। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संघर्ष बढ़ने और डॉलर के कमजोर होने की आशंका के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प यानी सोने-चांदी का रुख कर रहे हैं।
बुधवार के कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी वायदा 1,58,339 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,35,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11.50 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 7,363 रुपए यानी 4.89 प्रतिशत की तेजी के साथ
1,57,928 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। जबकि, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 10,499 रुपए यानी 3.24 प्रतिशत चढ़कर 3,34,171 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया। कॉमेक्स पर अमेरिकी सोना 4,849 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतें 92.5 से 95.7 डॉलर के दायरे में बनी रहीं।
कीमतों में यह तेजी उस खबर के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिका फरवरी से यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही जून तक इन टैरिफ को 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। इसके जवाब में यूरोपीय देश भी अमेरिका के खिलाफ व्यापारिक कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम और लंबी अवधि में चांदी का भविष्य काफी मजबूत दिख रहा है। सप्लाई की कमी और उद्योगों में बढ़ती मांग के कारण 2026 तक चांदी की कीमत 110 से 120 डॉलर तक जा सकती है।
एमसीएक्स पर चांदी के फ्यूचर्स में फिलहाल 3,30,000 से 3,32,000 रुपए का स्तर अहम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह कीमत 3,35,000 से 3,50,000 रुपए प्रति किलो तक भी जा सकती है।
पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के विशेषज्ञ मनोज कुमार जैन ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड वॉर बढ़ने और वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट से निवेशकों में घबराहट बढ़ी है। ऐसे माहौल में लोग जोखिम भरे निवेश छोड़कर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों में पैसा लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने, जापान के बॉन्ड बाजार में बिकवाली और रुपए की कमजोरी ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में मजबूत मांग भी सोने-चांदी की कीमतों को ऊपर बनाए हुए है।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई से बचाव और आसान मौद्रिक नीति की उम्मीदें भी सोने और चांदी को मजबूती दे रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एआई कुछ नौकरियों को बेहतर बना रहा है, तो कुछ की जगह भी ले रहा है, स्किल्स पर फोकस जरूरी : आईएमएफ प्रमुख
दावोस, 21 जनवरी (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वजह से लेबर मार्केट यानी नौकरी के क्षेत्र में सुनामी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि एआई कुछ नौकरियों को बेहतर बना रहा है, तो वहीं कुछ नौकरियों की जगह भी ले रहा है।
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान एक सत्र में बोलते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि दुनिया अब एआई के दौर में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन उन्हें चिंता है कि एआई से मिलने वाले मौके हर जगह एक जैसे नहीं हैं। कहीं ज्यादा अवसर हैं तो कहीं बहुत कम।
उन्होंने कहा, एआई तेजी से अर्थव्यवस्थाओं को बदल रहा है। कुछ काम बढ़ रहे हैं, कुछ खत्म हो रहे हैं। हमें लोगों की स्किल्स बढ़ाने में निवेश करना होगा और समाज को इसके लिए तैयार करना होगा।
आईएमएफ प्रमुख ने बताया कि एआई की वजह से अनुवाद, भाषा समझने और रिसर्च से जुड़े कामों में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में एआई लोगों की मदद कर रहा है, उनकी जगह नहीं ले रहा। लेकिन उन्होंने उन समुदायों को लेकर चिंता जताई जहां एआई की पहुंच अभी भी नहीं है।
आईएमएफ के अनुसार, दुनिया में औसतन 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो रही हैं। इनमें कुछ नौकरियां बेहतर बन रही हैं, कुछ बदल रही हैं और कुछ खत्म भी हो सकती हैं। विकसित देशों में यह असर करीब 60 प्रतिशत नौकरियों पर है, जबकि गरीब देशों में यह 20 से 26 प्रतिशत के बीच है।
जॉर्जीवा ने कहा कि एआई की वजह से वैश्विक आर्थिक विकास पर 0.1 से 0.8 प्रतिशत तक का असर पड़ सकता है। अगर उत्पादन क्षमता में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो दुनिया की आर्थिक ग्रोथ कोरोना महामारी से पहले के स्तर से भी ज्यादा हो सकती है।
इस सत्र में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सिर्फ बड़ा एआई मॉडल बनाना ही किसी देश को ताकतवर नहीं बनाता।
उन्होंने कहा कि हमें पांचवीं औद्योगिक क्रांति की अर्थव्यवस्था को समझना होगा। इस दौर में असली ताकत आरओआई यानी निवेश पर मिलने वाले लाभ से आएगी। सबसे कम लागत में सबसे ज्यादा फायदा पाने वाली तकनीक ही सफल होगी।
सऊदी अरब के निवेश मंत्रालय के निवेश मंत्री खालिद अल-फालीह ने कहा कि एआई को लेकर दुनिया में तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है। हर देश इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहता है, लेकिन एआई की असली ताकत तब सामने आएगी जब यह हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि एआई का प्रसार सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दुनियाभर में फैलना चाहिए। खालिद अल-फालीह ने यह भी कहा कि तकनीक और एआई सऊदी अरब के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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