अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कनाडा को अपने साथ मिलाने और उसे 51वां राज्य बनाने के घोषित इरादे के मद्देनजर, ग्लोब एंड मेल के अनुसार, कनाडाई सेना ने एक काल्पनिक अमेरिकी आक्रमण का मॉडल तैयार किया है और यह भी बताया है कि सैनिक और नागरिक दोनों मिलकर कैसे जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रम्प ने एक निर्भीक विस्तारवादी एजेंडा अपनाया है और कनाडा, डेनमार्क के ग्रीनलैंड द्वीप और पनामा नहर जैसे कई देशों और क्षेत्रों को अपने कब्जे में लेने की कसम खाई है। उन्होंने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति भी घोषित किया है।
हालांकि कई लोगों ने शुरू में ऐसे दावों को कम करके आंका, लेकिन वेनेजुएला पर अमेरिकी आक्रमण ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि ट्रंप वास्तव में कनाडा या ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं - ये दोनों नाटो के सदस्य हैं। ग्लोब एंड मेल के अनुसार, मॉडलिंग में सैन्य योजनाकारों ने पाया कि आक्रमणकारी अमेरिकी सेना एक सप्ताह के भीतर और संभवतः दो दिनों में ही कनाडा के रणनीतिक जमीनी और समुद्री ठिकानों पर कब्जा कर सकती है। मॉडलिंग से पता चला कि कनाडा कब्जे वाली अमेरिकी सेना से लड़ने के लिए गुरिल्ला युद्ध का सहारा लेगा। अमेरिका और कनाडा न केवल नाटो के सहयोगी हैं, बल्कि उनके बीच द्विपक्षीय गठबंधन भी है। दोनों देश द्विपक्षीय उत्तरी अमेरिकी अंतरिक्ष रक्षा कमान (नोराड) के माध्यम से संयुक्त रूप से उत्तरी अमेरिकी हवाई क्षेत्र की रक्षा करते हैं। किसी भी आक्रमण से यह गठबंधन टूट जाएगा।
कनाडा अफ़गान मुजाहिदीन की तरह जवाबी कार्रवाई करेगा
ग्लोब एंड मेल के अनुसार, कनाडा अमेरिकी कब्ज़ा करने वाली सेना से उसी गुरिल्ला रणनीति से लड़ेगा, जिसका इस्तेमाल अफ़गानिस्तान पर सोवियत कब्जे (1979-89) के दौरान अफ़गान मुजाहिदीन ने सोवियत सेना के खिलाफ किया था और बाद में तालिबान ने देश में अमेरिकी नेतृत्व वाली पश्चिमी सेना के खिलाफ किया था। अधिकारियों ने अखबार को बताया कि कनाडा के पास पारंपरिक अमेरिकी हमले का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त सैन्यकर्मी या अत्याधुनिक उपकरण नहीं हैं। इसीलिए कनाडाई अपरंपरागत युद्ध का सहारा लेंगे, जिसमें अनियमित सैन्य या सशस्त्र नागरिकों के छोटे समूह घात लगाकर हमला करने, तोड़फोड़ करने, ड्रोन युद्ध या अचानक हमला करके भागने जैसी रणनीति अपनाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह की रणनीति का उद्देश्य कब्ज़ा करने वाली अमेरिकी सेनाओं को भारी नुकसान पहुंचाना होगा। अभ्यास में सैन्य योजनाकारों ने यह परिकल्पना की थी कि दोनों देशों के सैन्य गठबंधन, जिसमें नॉरैड भी शामिल है, के समाप्त होने के स्पष्ट संकेत मिलने के बाद ही अमेरिका आक्रमण करेगा। रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार को बताया कि कनाडा के पास ज़मीनी और समुद्री आक्रमण की तैयारी के लिए अधिकतम तीन महीने का समय होगा। सूत्र ने आगे कहा कि पहला वास्तविक संकेत तब मिलेगा जब संयुक्त राज्य अमेरिका कनाडा को सूचित करेगा कि साझा हवाई नीति और नॉरैड अब लागू नहीं हैं।
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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा की उन टिप्पणियों का कड़ा खंडन किया, जिनमें भारत को एआई शक्तियों के दूसरे समूह में रखा गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक मानदंड देश को शीर्ष स्तर पर दिखाते हैं और भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पूरे क्षेत्र में क्षमताएं विकसित कर रहा है। दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के दौरान बोलते हुए, वैष्णव ने आईएमएफ प्रमुख द्वारा इस्तेमाल किए गए मापदंड पर सवाल उठाया और स्टैनफोर्ड के एक आकलन का हवाला दिया, जिसके अनुसार, एआई तैयारियों के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। मंत्री ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आईएमएफ का मानदंड क्या है, लेकिन स्टैनफोर्ड ने एआई तैयारियों के मामले में भारत को विश्व में तीसरे स्थान पर रखा है। मुझे नहीं लगता कि आपका वर्गीकरण सही है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया है भारत पहले स्तर की एआई पावर है। वैष्णव ने कहा कि स्टैनफोर्ड भारत को एआई पेनेट्रेशन, तैयारी और टैलेंट में तीसरा, जबकि टैलेंट में दूसरा स्थान देता है। मंत्री ने भारत की एआई रणनीति को पांच लेयर्स में बांटा- एप्लीकेशन लेयर, मॉडल लेयर, चिप लेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर और एनर्जी लेयर। उन्होंने कहा कि हम सभी पांच लेयर्स पर काम कर रहे हैं और हर स्तर पर अच्छी प्रगति हो रही है। विशेष रूप से एप्लीकेशन लेयर पर भारत विश्व को सबसे बड़ा सर्विस सप्लायर बन सकता है। वैष्णव ने जोर दिया कि ROI बड़े मॉडल बनाने से नहीं, बल्कि एंटरप्राइज के लिए एआई एप्लीकेशंस डिलिवर करने से आता है।
वैष्णव ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के इतर आयोजित ‘बेट ऑन इंडिया – बैंक ऑन द फ्यूचर’ सत्र को संबोधित करते हुए अनुमति प्रक्रियाओं के सरलीकरण के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दूरसंचार टावर स्थापित करने में लगने वाला औसत समय 270 दिनों से घटकर सात दिन रह गया है और 89 प्रतिशत अनुमतियां अब तुरंत मिल रही हैं। वैष्णव ने नीति के उद्देश्य और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के रूप में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नौकरशाही राजनीतिक निर्णयों के अनुरूप काम करे। उन्होंने उद्योग जगत के बीच चुनौतियों के प्रभावी संवाद की आवश्यकता का भी उल्लेख किया और अमेरिका एवं यूरोप में डेटा स्थानीयकरण मानकों के मानकीकरण का उदाहरण दिया।
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