एआई कुछ नौकरियों को बेहतर बना रहा है, तो कुछ की जगह भी ले रहा है, स्किल्स पर फोकस जरूरी : आईएमएफ प्रमुख
दावोस, 21 जनवरी (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वजह से लेबर मार्केट यानी नौकरी के क्षेत्र में सुनामी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि एआई कुछ नौकरियों को बेहतर बना रहा है, तो वहीं कुछ नौकरियों की जगह भी ले रहा है।
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान एक सत्र में बोलते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि दुनिया अब एआई के दौर में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन उन्हें चिंता है कि एआई से मिलने वाले मौके हर जगह एक जैसे नहीं हैं। कहीं ज्यादा अवसर हैं तो कहीं बहुत कम।
उन्होंने कहा, एआई तेजी से अर्थव्यवस्थाओं को बदल रहा है। कुछ काम बढ़ रहे हैं, कुछ खत्म हो रहे हैं। हमें लोगों की स्किल्स बढ़ाने में निवेश करना होगा और समाज को इसके लिए तैयार करना होगा।
आईएमएफ प्रमुख ने बताया कि एआई की वजह से अनुवाद, भाषा समझने और रिसर्च से जुड़े कामों में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में एआई लोगों की मदद कर रहा है, उनकी जगह नहीं ले रहा। लेकिन उन्होंने उन समुदायों को लेकर चिंता जताई जहां एआई की पहुंच अभी भी नहीं है।
आईएमएफ के अनुसार, दुनिया में औसतन 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित हो रही हैं। इनमें कुछ नौकरियां बेहतर बन रही हैं, कुछ बदल रही हैं और कुछ खत्म भी हो सकती हैं। विकसित देशों में यह असर करीब 60 प्रतिशत नौकरियों पर है, जबकि गरीब देशों में यह 20 से 26 प्रतिशत के बीच है।
जॉर्जीवा ने कहा कि एआई की वजह से वैश्विक आर्थिक विकास पर 0.1 से 0.8 प्रतिशत तक का असर पड़ सकता है। अगर उत्पादन क्षमता में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो दुनिया की आर्थिक ग्रोथ कोरोना महामारी से पहले के स्तर से भी ज्यादा हो सकती है।
इस सत्र में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सिर्फ बड़ा एआई मॉडल बनाना ही किसी देश को ताकतवर नहीं बनाता।
उन्होंने कहा कि हमें पांचवीं औद्योगिक क्रांति की अर्थव्यवस्था को समझना होगा। इस दौर में असली ताकत आरओआई यानी निवेश पर मिलने वाले लाभ से आएगी। सबसे कम लागत में सबसे ज्यादा फायदा पाने वाली तकनीक ही सफल होगी।
सऊदी अरब के निवेश मंत्रालय के निवेश मंत्री खालिद अल-फालीह ने कहा कि एआई को लेकर दुनिया में तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है। हर देश इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहता है, लेकिन एआई की असली ताकत तब सामने आएगी जब यह हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि एआई का प्रसार सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दुनियाभर में फैलना चाहिए। खालिद अल-फालीह ने यह भी कहा कि तकनीक और एआई सऊदी अरब के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बांग्लादेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से दो शिक्षकों को बर्खास्त करने पर मानवाधिकार संस्था ने की फैसले की निंदा
पेरिस, 21 जनवरी (आईएएनएस)। पेरिस स्थित मानवाधिकार संस्था जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने बांग्लादेश की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से ईशनिंदा के आरोपों पर दो शिक्षकों को निकाले जाने की कड़ी निंदा की है। मानवाधिकार संस्था ने इस घटना को दक्षिण एशियाई देश में अकादमिक स्वतंत्रता के लिए एक खतरनाक उदाहरण बताया।
ढाका में यूनिवर्सिटी ऑफ एशिया पैसिफिक (यूएपी) के अधिकारियों ने 18 जनवरी को शिक्षकों को बर्खास्त किया। असिस्टेंट प्रोफेसर लायेका बशीर और एसोसिएट प्रोफेसर एएसएम मोहसिन, दोनों बेसिक साइंसेज और ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट में थे। मोहसिन उस डिपार्टमेंट के हेड थे।
जेएमबीएफ ने शिक्षकों को निकालने की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए कहा, चरमपंथी छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और संगठित भीड़ के दबाव में बिना किसी पारदर्शी जांच को पूरा किए और आरोपी शिक्षकों को अपना बचाव करने का मौका दिए बिना ईशनिंदा के आरोप में बर्खास्त किया गया। ऐसे कार्य बांग्लादेश के संविधान, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, न्याय के मौलिक सिद्धांतों और शैक्षणिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं।
मानवाधिकार संस्था ने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों की नौकरी खत्म करने का मनमाना फैसला तब लिया गया, जब एक जांच समिति अभी भी कथित ईशनिंदा के आरोपों पर काम कर रही थी। इसके अलावा, संस्था ने कहा कि आरोपी शिक्षकों को अपना बचाव पेश करने का मौका नहीं दिया गया और सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
जेएमबीएफ के मुख्य सलाहकार और प्रसिद्ध फ्रांसीसी मानवाधिकार कार्यकर्ता रॉबर्ट जॉन पॉल साइमन ने कहा, सोशल मीडिया पर निजी राय व्यक्त करने के लिए शिक्षकों को इस्लामोफोबिक करार देना, उनके खिलाफ भीड़ को उकसाना, धमकियां दिलवाना और आखिर में प्रशासनिक फैसलों के जरिए उनकी बर्खास्तगी करवाना एक खतरनाक मिसाल है। यह साफ दिखाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने शिक्षकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने के बजाय संगठित हिंसा को खुश करने का रास्ता चुना है।
जेएमबीएफ ने कहा कि यह घटना न सिर्फ दो शिक्षकों के साथ अन्याय है, बल्कि बांग्लादेश के एजुकेशन सिस्टम और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए एक खतरनाक मिसाल भी है।
इसमें कहा गया है, अगर इस तरह भीड़ के दबाव में शिक्षकों को हटाया जाता है, तो भविष्य में अकादमियों से जुड़े लोग आजादी से सोच नहीं पाएंगे और रिसर्च नहीं कर पाएंगे या खुलकर अपने विचार जाहिर नहीं कर पाएंगे।
मानवाधिकार संस्था ने मांग की कि दोनों शिक्षकों को बर्खास्त करने के फैसले को तुरंत रद्द किया जाए। मानवाधिकार संस्था ने यह भी मांग की कि एक अंतरराष्ट्रीय मानक का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कमीशन बनाया जाए और साथ ही आरोपी शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किए जाएं।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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