पराग त्यागी का चौंकाने वाला दावा, शेफाली जरीवाला पर किया गया था काला जादू, बोले- 'जहां भगवान है, वहां शेतान भी है'
Parag Tyagi on Shefali Jariwala Death: एक्ट्रेस और मॉडल शेफाली जरीवाला के 2025 में महज 42 साल की उम्र में निधन ने उनके परिवार और फैंस को गहरे सदमे में डाल दिया. आज भी कई लोगों के लिए यह विश्वास कर पाना मुश्किल है कि शेफाली अब इस दुनिया में नहीं हैं. वहीं उनके पति पराग त्यागी अब तक इस दर्द से उबर नहीं पाए हैं. वह लगातार अपनी पत्नी की यादों को संजोए हुए हैं और उन्हीं की याद में उन्होंने एक यूट्यूब चैनल और पॉडकास्ट भी शुरू किया है. पराग का कहना है कि वह शेफाली के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित करना चाहते हैं.
शेफाली की मौत को लेकर पराग का बड़ा खुलासा
इसी बीच पराग त्यागी ने शेफाली की मौत को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है. एक्टर का कहना है कि शेफाली पर काला जादू किया गया था और उन्हें इस बात का पूरा विश्वास है. पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान पराग ने कहा, “बहुत से लोग इन बातों पर विश्वास नहीं करते, लेकिन मैं करता हूं. जहां भगवान होते हैं, वहां शैतान भी होता है. लोग अपने दुख से नहीं बल्कि दूसरों के सुख से दुखी होते हैं. मुझे लगता नहीं मुझे पता है कि किसी ने शेफाली पर काला जादू किया था.” हालांकि पराग ने यह स्पष्ट किया कि वह यह नहीं बता सकते कि यह किसने किया, लेकिन उन्हें अंदर से महसूस होता है कि कुछ तो गलत जरूर हुआ था.
Jharkhand News: रांची में रंग-बिरंगे फूलों की लगी प्रदर्शनी, ऑक्सीजन पार्क में पुष्प महोत्सव का आयोजन
Jharkhand News: ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई जगहों पर अफीम की खेती होती है. इसे रोकने और लोगों को बेहतर विकल्प देने के लिए झारखंड वन विभाग ने फूलों की खेती को बढ़ावा देने की पहल की है. इसी उद्देश्य से रांची के ऑक्सीजन पार्क में पुष्प महोत्सव का आयोजन किया गया. इस महोत्सव में रंग-बिरंगे फूलों की प्रदर्शनी लगाई गई है, ताकि लोग फूलों की खेती का महत्व समझ सकें. वन विभाग का मानना है कि फूलों की खेती से न सिर्फ ग्रामीणों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि नशे जैसी बुरी आदतों से भी लोगों को दूर किया जा सकेगा. साथ ही पर्यावरण की सुंदरता और हवा की शुद्धता में भी सुधार होगा.
वन विभाग का उद्देश्य
राज्य के मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कि इस आयोजन का मकसद लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और फूलों के प्रति रुचि विकसित करना है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पौधे लगाने की सही जानकारी नहीं है, वे ऐसे आयोजनों से बहुत कुछ सीख सकते हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
वन विभाग ग्रामीण इलाकों में प्रशिक्षण देकर फूलों की खेती को आजीविका से जोड़ रहा है. जिन जमीनों पर धान या अन्य फसलें नहीं हो पातीं, वहां फूलों की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है.
रांची डीएफओ की पहल
रांची के डीएफओ ने बताया कि रांची का मौसम फूलों की खेती के लिए बेहद अनुकूल है. अगर फूलों का सही बाजार तैयार किया जाए, तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इससे अच्छी आय हो सकती है. वन विभाग की यह पहल गांवों की अर्थव्यवस्था सुधारने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम है.
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