आज की सरकारी नौकरी:इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में 405 भर्ती; असम पुलिस में 2972 ओपनिंग्स, बिहार में फायर सेफ्टी ऑफिसर की वैकेंसी
आज की सरकारी नौकरी में जानकारी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में 405 पदों पर भर्ती और असम में 2972 पदों पर भर्ती समेत कुल 4 ओपनिंग्स की। आज की 4 जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए.... 1. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में 405 पदों पर भर्ती इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने अप्रेंटिस की भर्ती निकाली है। उम्मीदवार IOCL की ऑफिशियल वेबसाइट iocl.com या अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। इस भर्ती के लिए किसी इंटरव्यू या एग्जाम की जरूरत नहीं होगी। स्टेट वाइस वैकेंसी डिटेल्स : एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : टेक्नीशियन अप्रेंटिस : इंजीनियरिंग में 3 साल का डिप्लोमा। सामान्य वर्ग के लिए 50% और एससी/एसटी/दिव्यांग के लिए 45% अंक होने चाहिए। ट्रेड अप्रेंटिस : 10वीं पास, संबंधित ट्रेड में 2 साल का ITI सर्टिफिकेट। ग्रेजुएट अप्रेंटिस : किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री। सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 45% अंक होने चाहिए। डेटा एंट्री ऑपरेटर : 12वीं पास और स्किल सर्टिफिकेट। एज लिमिट : सिलेक्शन प्रोसेस : स्टाइपेंड : अप्रेंटिस एक्ट के अनुसार जरूरी डॉक्यूमेंट्स : ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. बिहार में एडिशनल डायरेक्टर/ असिस्टेंट स्टेट फायर ऑफिसर की 14 वैकेंसी बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) की ओर से एडिशनल डायरेक्टर/ असिस्टेंट स्टेट फायर ऑफिसर के पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार BPSC की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। महिलाओं के लिए कुल 14 में से 3 पद रिजर्व रखे गए हैं। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 5 फरवरी 2025 तय की गई है। कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : एज लिमिट : बॉयलर इंस्पेक्टर : एडिशनल डायरेक्टर : फीस : 100 रुपए सैलरी : सिलेक्शन प्रोसेस : ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक आॉनलाइन आवेदन लिंक 3. असम में 2972 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी असम राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड (SLPRB) ने वन विभाग, असम पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं में 2972 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 22 जनवरी से शुरू होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट slprbassam.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : फॉरेस्टर ग्रेड 1 : मान्यता प्राप्त संस्थान से बैचलर डिग्री। सब ऑफिसर एंड कॉन्स्टेबल : फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स के साथ 12वीं पास फायरमैन एंड इमर्जेंसी रेस्क्यूअर : साइंस से 12वीं पास फॉरेस्ट गार्ड, गेम वॉचर एंड कॉन्स्टेबल : 12वीं पास AFPF कॉन्स्टेबल, कॉन्स्टेबल (ग्रेड - 3) बैंडमेन एंड बगलर : 12वीं पास होम गार्ड सर्टिफिकेट या न्यूनतम एनसीसी ग्रेड ए सर्टिफिकेट बैंडमेन : बैग पाइप्स, स्नेयर, ड्रम्स, टेनर ड्रम्स एंड बास ड्रम्स में प्रोफिशिएंसी बगलर : बगल प्लेइंग में प्रोफिशिएंसी बोटमैन : एज लिमिट : सिलेक्शन प्रोसेस : सैलरी : 12,000 - 70,000 रुपए प्रतिमाह ऐसे करें आवेदन ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 4. यूपी पुलिस में 537 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की आखिरी तारीख कल यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के 537 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फीस भरने की आखिरी तारीख 19 जनवरी 2025 तय की गई है। पोस्ट वाइस वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर (गोपनीय): यूपी पुलिस असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (क्लर्क): यूपी पुलिस असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (अकाउंट्स): एज लिमिट : सैलरी : सिलेक्शन प्रोसेस : फीस : एग्जाम पैटर्न : ऐसे करें आवेदन : ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ---------------- सरकारी नौकरी की ये खबरें भी पढ़ें... मध्यप्रदेश में 1,120 पदों पर भर्ती; यूपी आंगनवाड़ी में 202 वैकेंसी; नाबार्ड में 162 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी आज की सरकारी नौकरी में जानकारी मध्य प्रदेश में 1,120 पदों पर भर्ती की। नाबार्ड में 162 पदों पर भर्ती के नोटिफिकेशन की। साथ ही, यूपी आंगनवाड़ी में 202 वैकेंसी और जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड में 1,815 पदों पर भर्ती के आवेदन की शुरुआत की। पूरी खबर यहां पढ़ें
ट्रम्प ने मिस्र-इथियोपिया के विवाद में मध्यस्थता का ऑफर दिया:नील नदी के जल बंटवारे को सुलझाने की पेशकश; डैम बना झगड़े की वजह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नील नदी के पानी को लेकर मिस्र और इथियोपिया के बीच चल रहे विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की है। ट्रम्प ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार हैं। ट्रम्प ने यह बात मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को लिखे एक पत्र में कही। यह पत्र ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी पोस्ट किया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने पत्र में लिखा कि वह नील नदी के जल बंटवारे के सवाल को जिम्मेदारी से और स्थायी तौर पर सुलझाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता फिर से शुरू करने को तैयार हैं। 5 अरब डॉलर से बना डैम विवाद की वजह मिस्र और इथियोपिया के बीच विवाद की बड़ी वजह इथियोपिया की ग्रैंड इथियोपियन रिनेसां डैम (GERD) है। करीब 5 अरब डॉलर की लागत से यह बांध नील नदी की सहायक ब्लू नील नदी पर बनाया गया है। इथियोपिया ने 9 सितंबर को इस बांध का उद्घाटन किया था। इसके बाद से मिस्र में नाराजगी है। इथियोपिया इस बांध को अपनी आर्थिक तरक्की के लिए बेहद अहम मानता है। इथियोपिया की आबादी 12 करोड़ से ज्यादा है और वह अफ्रीका का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। वहीं मिस्र का कहना है कि यह बांध अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करता है। मिस्र को आशंका है कि इससे देश में सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इथियोपिया इन आरोपों को खारिज करता रहा है। ट्रम्प ने पहले कार्यकाल में मध्यस्थता कराई थी अमेरिका ने 2019 के अंत से फरवरी 2020 की शुरुआत तक मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी जल बंटवारे पर औपचारिक मध्यस्थता कराई थी। यह प्रक्रिया तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में शुरू हुई। बातचीत अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट और वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में वॉशिंगटन में हुई। मिस्र को आशंका थी इथियोपिया की GERD परियोजना से नील नदी का प्रवाह घटेगा। इससे पानी की कमी, कृषि पर असर, सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। फरवरी 2020 में अमेरिका ने एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट तैयार कराया। मिस्र ने इस मसौदे पर सहमति जता दी, लेकिन इथियोपिया ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता प्रक्रिया ठप हो गई 2020 में ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर मिस्र के पक्ष में बयान दिए थे। इसी के चलते इथियोपिया ने अमेरिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। मिस्र की जीवनरेखा है नील नदी नील नदी मिस्र के लिए सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है। रेगिस्तानी इलाके वाले मिस्र में पीने का पानी, खेती, उद्योग और बिजली सब कुछ नील नदी पर टिका हुआ है। यही वजह है कि नील से जुड़ा कोई भी विवाद मिस्र के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन जाता है। मिस्र की करीब 11 करोड़ आबादी की 90 से 95% पानी जरूरतें नील नदी से पूरी होती हैं। देश का लगभग 90% से ज्यादा इलाका रेगिस्तान है, जहां प्राकृतिक वर्षा बेहद कम होती है। ऐसे में नील नदी ही एकमात्र स्थायी जल स्रोत है, जो मिस्र को जीवन देता है। खेती के लिहाज से भी नील की भूमिका अहम है। मिस्र की करीब 95% खेती योग्य जमीन नील नदी और इसके डेल्टा क्षेत्र में स्थित है। देश की कुल ताजा पानी खपत का 80–85% हिस्सा कृषि में जाता है, जो सीधे नील से आता है। पानी की मात्रा में थोड़ी भी कमी होने पर गेहूं, चावल और अन्य खाद्य फसलों पर असर पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। जलसंकट का सामना कर रहा मिस्र मिस्र पहले से ही जल संकट की स्थिति में है। 1959 के जल समझौते के तहत मिस्र को नील से हर साल 55.5 अरब क्यूबिक मीटर पानी मिलता है। यह मात्रा उस समय तय हुई थी, जब आबादी काफी कम थी। आज हालात यह हैं कि मिस्र में प्रति व्यक्ति सालाना जल उपलब्धता 600 क्यूबिक मीटर से भी नीचे आ चुकी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र 1,000 क्यूबिक मीटर से कम को जल संकट की श्रेणी में रखता है। नील नदी का असर सिर्फ गांव और खेतों तक सीमित नहीं है। काहिरा और अलेक्जेंड्रिया जैसे बड़े शहरों की पानी सप्लाई नील पर निर्भर है। इसके अलावा असवान हाई डैम से मिलने वाली जलविद्युत भी इसी नदी से जुड़ी है, जो मिस्र की ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका निभाती है। इन्हीं वजहों से मिस्र सरकार नील नदी से जुड़े हर घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील मानती है। जल प्रवाह में अनिश्चितता, डैम संचालन या लंबे समय तक पानी रोके जाने की आशंका को मिस्र सीधे तौर पर अस्तित्व और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा मानता है।
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