T20 World Cup 2026: पूर्व कोच ने की इस बल्लेबाज की तारीफ, भारतीय क्रिकेट की सूरत बदलने का दिया श्रेय
T20 World Cup 2026: भारतीय क्रिकेट टीम आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 की तैयारियों में लगी हुई है. वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया न्यूजीलैंड के साथ 21 जनवरी से पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलने वाली है, जो वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के लिए तैयारी का एक बेहतरीन मौका होगा. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया अपना टाइटल डिफेंड करने उतरेगी. भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 रोहित शर्मा की कप्तानी में जीता था.
टीम इंडिया के पास टी20 वर्ल्ड कप 2026 में एक ऐसा खिलाड़ी मौजूद है, जो बल्ले के साथ विरोधियों के पसीने छुड़ाने की हिम्मत रखता है. इस खिलाड़ी की दुनिया भर में जमकर तारीफ हो रही है. ये खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा हैं, जो तेज-तर्रार पारी खेलने के लिए और मैदान पर चौके-छक्कों की बरसात करने के लिए जाने जाते हैं.
दिग्गज ने की अभिषेक शर्मा की जमकर तारीफ
अब अभिषेक शर्मा पर टीम इंडिया के पूर्व बैटिंग कोच संजय बांगर ने बड़ा बयान दिया है. बांगर अभिषेक की निडरता और आक्रामकता के मुरीद हो गए हैं. उन्होंने जिओ हॉटस्टार पर बात करते हुए कहा कि, 'अभिषेक शर्मा बताते हैं कि यह इंडियन टीम टी20 फॉर्मेट में कैसे खेलना चाहती है. निडर और एग्रेसिव क्रिकेट सिर्फ अभिषेक जैसे खिलाड़ी से ही मुमकिन है'.
अभिषेक शर्मा का धमाकेदार करियर
आपको बता दें कि, अभिषेक शर्मा दुनिया के नंबर 1 टी20 बल्लेबाज हैं. 25 वर्षीय अभिषेक ने जुलाई 2024 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था. उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है. अभिषेक ने 33 मैचों की 32 पारियों में 188.02 के स्ट्राइक रेट और 36 के औसत के साथ 1115 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 6 अर्धशतक भी लगाए हैं. उनका हाईएस्ट स्कोर 135 हैं.
टी20 बैटिंग रैंकिंग में अभिषेक शर्मा का जलवा
आईसीसी टी20 बल्लेबाज रैंकिंग में अभिषेक शर्मा 908 रेटिंग प्वाइंट्स के साथ नंबर 1 पर मौजूद हैं. उनके बाद इंग्लैंड के बल्लेबाज फिल साल्ट 849 रेटिंग प्वाइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं. 805 रेटिंग प्वाइंट्स के साथ तिलक वर्मा तीसरे स्थान पर बने हुए हैं.
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बांग्लादेश में इस्लामी लामबंदी का पुनरुत्थान, ‘तौहीदी जनता’ के उभार से बढ़ी चिंता: रिपोर्ट
कैनबरा, 17 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में ‘तौहीदी जनता’ नामक इस्लामी जनआंदोलन के पुनरुत्थान ने नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह उभार संगठित उग्रवाद के रूप में नहीं, बल्कि नैतिकता के नाम पर दबाव बनाने वाली जनवादी राजनीति (कोर्सिव पॉपुलिज़्म) के रूप में सामने आ रहा है, जो उन हालात में पनपता है जब संस्थाएं कमजोर हों, कानून-व्यवस्था ढीली पड़े और राजनीतिक वैधता पर सवाल उठें।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह लामबंदी खुले तौर पर काम करती है और ‘गैर-इस्लामी’ मूल्यों को निशाना बनाना धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश करती है। इसी वजह से यह तात्कालिक दमन से बचते हुए सार्वजनिक स्थानों और सामाजिक व्यवहार को नए सिरे से आकार देने में सफल हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया स्थित पत्रिका द इंटरप्रेटर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 16 वर्षों तक शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार ने चुनावी प्रक्रिया, मजबूत सुरक्षा तंत्र और राज्य-समर्थित धर्मनिरपेक्ष “बंगाली राष्ट्रवाद” के सहारे शासन किया। इस दौरान इस्लामी दलों और धार्मिक नेटवर्कों को दबाया गया, अपने साथ मिलाया गया या विभाजित कर दिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया, “सार्वजनिक धार्मिक आचरण को तो सहन किया गया, लेकिन राज्य के नियंत्रण से बाहर राजनीतिक इस्लाम को सख्ती से प्रबंधित किया गया। इससे खुले टकराव सीमित रहे, लेकिन धार्मिक राजनीति खत्म नहीं हुई; वह अनौपचारिक और राजनीति-विहीन क्षेत्रों में चली गई। अगस्त 2024 में हसीना के सत्ता से हटने के साथ ही यह व्यवस्था ढह गई, जिससे न केवल राजनीतिक शून्य पैदा हुआ, बल्कि नैतिक अधिकार का भी संकट सामने आ गया।”
हसीना के हटने के बाद बने सत्ता-शून्य में, रिपोर्ट के अनुसार, ‘तौहीदी जनता’ उभर कर सामने आई, जिसने सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने के लिए धार्मिक कर्तव्य का आह्वान किया।
रिपोर्ट में बताया गया, “यह कोई औपचारिक संगठन नहीं है, बल्कि एक ऐसा लेबल है जिसके तहत अलग-अलग तत्व एकत्र होते हैं। ये सार्वजनिक स्थानों में दखल देते हैं, व्यवहार पर पहरा लगाते हैं, सांस्कृतिक गतिविधियों में बाधा डालते हैं और महिलाओं से जुड़े आयोजनों को निशाना बनाते हैं। इसकी ताकत इसकी अस्पष्टता में है—बिना किसी नेतृत्व या औपचारिक ढांचे के यह भीड़, प्रतीकों और नैतिक दबाव के जरिए काम करता है, न कि संस्थागत मौजूदगी के जरिए।”
रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि ‘तौहीदी जनता’ के कथित समर्थकों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में प्रत्यक्ष हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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