एशियन गेम्स 2026 में अब तक भारत को मिलेग कितने मेडल, जानिए आज कौन से 5 खिलाड़ियों ने किस खेल में जीते पदक
Asian Games 2026 : एशियन गेम्स 2026 में अब तक यानी 24 सितंबर तक भारत के मेडल्स की संख्या 15 हो चुकी है. आज के दिन भारत को अब तक 4 मेडल मिल चुके हैं. आज किन एथलीट ने कौन से खेल में भारत को पदक दिलाया है और अब तक कितने एथलीटों को एशियन गेम्स में पदक मिल चुका है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
एशियन गेम्स 2026 में भारत को पदक दिलाने वाले खिलाड़ी
| क्र. | खिलाड़ी/टीम | खेल | इवेंट | पदक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | इलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर, विदर्सा विनोद | निशानेबाजी | महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम | ???? सिल्वर |
| 2 | इलावेनिल वलारिवन | निशानेबाजी | महिला 10 मीटर एयर राइफल | ???? सिल्वर |
| 3 | रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों, पार्थ राकेश माने | निशानेबाजी | पुरुष 10 मीटर एयर राइफल टीम | ???? सिल्वर |
| 4 | सुचिका तरियाल | MMA | महिला ट्रेडिशनल 60 किग्रा | ???? ब्रॉन्ज |
| 5 | रुद्रांक्ष पाटिल | निशानेबाजी | पुरुष 10 मीटर एयर राइफल | ???? ब्रॉन्ज |
| 6 | हिमांशु ढिल्लों | निशानेबाजी | पुरुष 10 मीटर एयर राइफल | ???? सिल्वर |
| 7 | भारतीय महिला क्रिकेट टीम | क्रिकेट | महिला टी20 | ???? गोल्ड |
| 8 | राइजा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान, परिनाज धालीवाल | निशानेबाजी | महिला स्कीट टीम | ???? ब्रॉन्ज |
| 9 | अनंतजीत सिंह नरुका, मेराज अहमद खान, भवतेघ सिंह गिल | निशानेबाजी | पुरुष स्कीट टीम | ???? ब्रॉन्ज |
| 10 | जय मीणा | सॉफ्ट टेनिस | पुरुष एकल | ???? ब्रॉन्ज |
| 11 | मीराबाई चानू | वेटलिफ्टिंग | महिला 49 किग्रा | ???? सिल्वर |
| 12 | भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम | बैडमिंटन | पुरुष टीम | ???? ब्रॉन्ज |
| 13 | सतनाम सिंह, सलमान खान | रोइंग | पुरुष डबल स्कल्स | ???? ब्रॉन्ज |
| 14 | रोशिबिना देवी नाओरेम | वुशू | महिला सांडा 60 किग्रा | ???? सिल्वर |
| 15 |
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अटल आयुष्मान योजना बनी उत्तराखंड का सहारा, 17 लाख से ज्यादा मरीजों को मिला मुफ्त इलाज
Atal Ayushman Yojana Uttarakhand: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय से परिवारों के लिए बड़ी चुनौती रहा है. खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने इलाज के खर्च के साथ बड़े शहरों तक पहुंचने की परेशानी भी रहती है. ऐसे में अटल आयुष्मान योजना ने हजारों परिवारों को इलाज के खर्च की चिंता से राहत देने में अहम भूमिका निभाई है. योजना के तहत अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को 3,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैशलेस इलाज मिलने की जानकारी सामने आई है.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इलाज के लिए मरीज को अस्पताल में तत्काल बड़ी रकम जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती. उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, राज्य के सभी परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक के मुफ्त और कैशलेस इलाज का प्रावधान किया गया है. सरकारी दस्तावेजों में इसे राज्य के सभी परिवारों तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाने वाली योजना के तौर पर दर्ज किया गया है.
इलाज के खर्च की चिंता से राहत
गंभीर बीमारी के दौरान जांच, दवाइयों, ऑपरेशन और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च किसी भी परिवार के बजट को प्रभावित कर सकता है. अटल आयुष्मान योजना का उद्देश्य ऐसे समय में परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है. योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है.
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आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत भी प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध है. इसमें सेकेंडरी और टर्शियरी अस्पताल में भर्ती से जुड़ी कई सेवाएं शामिल हैं. योजना में परिवार के आकार, उम्र या लिंग को लेकर कोई सीमा नहीं है और पहले से मौजूद बीमारियां भी कवर की जाती हैं.
पहाड़ से बड़े शहरों तक इलाज की पहुंच
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच हमेशा आसान नहीं रही है. पहाड़ी इलाकों में रहने वाले मरीजों को कई बार बेहतर इलाज के लिए जिला मुख्यालय या मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों तक जाना पड़ता है. ऐसे में सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों का नेटवर्क बढ़ने से मरीजों को इलाज के ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं. राज्य सरकार के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 तक 15 लाख से ज्यादा कार्डधारकों को सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल चुका था और 59.74 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे. इससे योजना के दायरे और इसके इस्तेमाल का अंदाजा लगाया जा सकता है.
सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क
योजना के तहत सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों को भी जोड़ा गया है. इसका फायदा उन मरीजों को मिलता है जिन्हें किसी खास बीमारी के लिए विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है. राज्य के बजट दस्तावेज के मुताबिक, योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है और इलाज के लिए राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी उपलब्ध है. इसका मतलब है कि लाभार्थी केवल अपने आसपास के अस्पताल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि योजना से जुड़े दूसरे अस्पतालों में भी उपचार का लाभ ले सकता है.
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
अटल आयुष्मान योजना का असर केवल इलाज के खर्च तक सीमित नहीं है. उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से टेलीमेडिसिन, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और विशेषज्ञ सेवाओं जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया गया है. सरकारी बजट दस्तावेज में दूरस्थ क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का उल्लेख किया गया है. इससे स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश को मजबूती मिली है.
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