नीमच नगरपालिका का एक्शन, जोरबा इंफोटेक की तीनों दुकानें सील, अवैध बेसमेंट समेत मिलीं कई खामियां
नीमच शहर में अवैध निर्माण और बिना अनुमति के संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगरपालिका ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। पूर्व में विवादों में रहे जोरबा इंफोटेक के मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका के अमले ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए आज जोरबा इंफोटेक की तीनो दुकानों को सील कर दिया है। यह सख्त कदम अरुण यादव द्वारा की गई एक पुख्ता शिकायत और उसके बाद हुए मौका निरीक्षण के आधार पर उठाया गया है। जांच टीम को मौके पर एक अवैध बेसमेंट के निर्माण के साथ-साथ कई अन्य तकनीकी और ढांचागत खामियां मिलीं, जिसके बाद प्रशासन ने बिना कोई मोहलत दिए तीनों दुकानों पर ताला जड़ दिया।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जोरबा इंफोटेक के भवन निर्माण और वहां चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगरपालिका से शिकायत की गई। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि जोरबा इंफोटेक के संचालकों द्वारा स्वीकृत नक्शे के विपरीत जाकर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य किया गया है। शिकायत में विशेष रूप से इस बात का जिक्र था कि वहां नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट बनाया गया है और उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। पूर्व में भी जोरबा इंफोटेक की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई थीं।
मौका निरीक्षण और अवैध बेसमेंट का खुलासा
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, नगरपालिका के अतिक्रमण निरोधक दस्ते, नगर नियोजक और भवन शाखा के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। यह टीम अचानक जोरबा इंफोटेक परिसर में निरीक्षण करने जा पहुंची।
अधिकारियों ने जब स्वीकृत नक्शे से मौके पर मौजूद निर्माण का मिलान किया, तो वे हैरान रह गए। जांच में सबसे बड़ी अनियमितता बेसमेंट के रूप में सामने आई। नगरपालिका के रिकॉर्ड के अनुसार, इस व्यावसायिक इमारत में किसी भी प्रकार के बेसमेंट के निर्माण की अनुमति विभाग द्वारा जारी नहीं की गई थी। इसके बावजूद, वहां न केवल एक विशाल बेसमेंट बना हुआ पाया गया, बल्कि वहां से व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही थीं। आगजनी या किसी आपात स्थिति के लिहाज से यह बेसमेंट बेहद खतरनाक साबित हो सकता था क्योंकि वहां वेंटिलेशन और आपातकालीन निकासी का कोई उचित प्रबंध नहीं था।
तीनों दुकानों पर जड़ा गया ताला
इन तमाम खामियों को अपनी आंखों से देखने और शिकायत को शत-प्रतिशत सही पाने के बाद, अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। जोरबा इंफोटेक के संचालकों को मौके पर कोई भी वैध दस्तावेज या संतोषजनक जवाब पेश करने का मौका नहीं मिला। नगरपालिका के अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पंचनामा तैयार किया और जोरबा इंफोटेक की तीनों दुकानों के शटर गिराकर नगरपालिका की सील चस्पा कर दी गई है। साथ ही दुकानों के बाहर एक नोटिस भी चिपका दिया गया है, जिसमें सख्त हिदायत दी गई है कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के इस सरकारी सील को खोलने या तोड़ने का प्रयास करना एक गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा।
गौरतलब है कि जोरबा इंफोटेक का नाम पूर्व में भी कुछ समाचारों और विवादों में आ चुका है। पहले भी संचालन से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर यह संस्थान चर्चा में रहा है। लेकिन इस बार मामला सीधे तौर पर नगर पालिका के कड़े नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था, जिस पर प्रशासन ने किसी तरह की नरमी नहीं बरती।
फिलहाल, जोरबा इंफोटेक के संचालकों को नगरपालिका कार्यालय में अपने सभी मूल दस्तावेज और स्पष्टीकरण पेश करने का नोटिस जारी किया गया है। जब तक प्रशासन इस मामले की पूरी कानूनी जांच नहीं कर लेता, तब तक ये तीनों दुकानें पूरी तरह से सील ही रहेंगी। यदि संचालक उचित जवाब नहीं दे पाते हैं, तो भविष्य में अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
पन्ना में ‘सूली सत्याग्रह’ को लेकर जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, कहा “ये कैसा न्याय”
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पन्ना जिले के अजयगढ़ में मझगांय बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के ‘सूली सत्याग्रह’ को लेकर सरकार से सवाल किेए हैं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर लोगों का विस्थापन हो रहा है, लेकिन उन्हें उनके हक का मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल रहा है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि आखिर यह कैसा न्याय है?
मझगांय बांध परियोजना को 15 साल से अधिक समय हो चुका है। अब बांध के डूब क्षेत्र में पानी भरने के साथ कई गांवों पर विस्थापन का खतरा बढ़ गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है और पुनर्वास की व्यवस्था भी पूरी नहीं हुई है।
जलभराव के बीच ग्रामीणों का सूली सत्याग्रह
बुधवार को आंदोलनकारियों ने बांध के किनारे जलभराव के बीच ‘सूली सत्याग्रह’ कर विरोध जताया। मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहा यह आंदोलन सितंबर में 12वें दिन तक पहुंच गया था। इससे पहले ग्रामीण चिता, फांसी, जल और मिट्टी सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक तरीकों से भी अपनी मांगें उठा चुके हैं।
पुनर्वास पूरा होने से पहले जलभराव का आरोप
प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि बांध में पानी भरने से पहले पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उनका कहना है कि संपत्तियों के सही आकलन और प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने में भी देरी हो रही है। आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों को नोटिस दिए जा रहे हैं।
जीतू पटवारी ने उठाया विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा
जीतू पटवारी ने इसी स्थिति को लेकर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा है कि अगर विकास परियोजनाओं के लिए लोगों को विस्थापित किया जा रहा है तो उनके अधिकारों के मुताबिक मुआवजा और पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने अजयगढ़ में चल रहे सूली सत्याग्रह को प्रभावित परिवारों की नाराजगी और लंबित मांगों से जोड़ते हुए सरकार की व्यवस्था पर सवाल किए हैं।
विकास के नाम पर विस्थापन, लेकिन हक़ का मुआवजा नहीं, यह कैसा न्याय?
• अजयगढ़ (पन्ना)
• अब सूली सत्याग्रह
• मझगांय बांध परियोजना@DrMohanYadav51 pic.twitter.com/PDv3MpcO6Q— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 24, 2026
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