विदिशा कृषि उपज मंडी में चोरों का धावा, चटकाए 6 दुकानों के ताले, व्यापारियों में नाराजगी
विदिशा की मिर्जापुर कृषि उपज मंडी की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, सोमवार की रात यहां मंडी में घुसे चोरों ने 6 दुकानों के ताले तोड़ दिए। मंगलवार के सुबह जब व्यापारी दुकान खोलने पहुंचे तब मामले का खुलासा हुआ।
हालांकि, गनीमत यह रही कि दुकानों के ताले तोड़ने के बावजूद भी चोर कोई भी सामान या कैश ले जाने में कामयाब नहीं हो पाए। लेकिन इस तरह की घटना ने एक बात फिर व्यापारियों में नाराजगी ला दी है। मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चोरी नहीं कर पाए चोर
दुकानदारों के मुताबिक चोरों ने दुकानों के ताले तोड़ दिए। एक लाइन में बनी हुई दुकानों पर चोरी का प्रयास किया गया। चोरों ने ताले तो तोड़ दिए लेकिन उनसे सेंटर लॉक नहीं खुल पाया। ऐसे में वो शटर नहीं उठा पाए। वहीं जिन दुकानों के शटर खुल गए वहां से सामान या कैश भी नहीं ले जा सके।
पहले भी हुई है घटना
मंडी में की गई चोरी की इस कोशिश को लेकर दुकानदार का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। जब इस तरह से चोरी करने की कोशिश की गई है। हर 5 से 6 महीने में इस तरह की घटना देखने को मिलती है। पुलिस आती है कार्रवाई की बात करती है लेकिन चोरों को पकड़ने के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आती। बेबी सामने आया है तो पिछली बार जब चोरी की गई थी तो कर से पांच दुकानों से कैश चोरी कर लिया गया था। चोर दीवार तोड़कर दुकानों में घुसे थे। इतनी बार मंडी में चोरी की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद भी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव नहीं करने का व्यापारियों ने आरोप लगाया है।
उठी कार्रवाई की मांग
व्यापारियों का कहना है की मंडी बोर्ड की तरफ से दुकानों से किराया लिया जाता है, बिल भी थमाया जाता है। लेकिन सुरक्षा के लिए गार्ड उपलब्ध नहीं है। पहले हुई चोरी की घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई करने और नियमित सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग व्यापारियों द्वारा की गई है। सूचना लगने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
MP में रोजगार के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा “रोजगार क्रांति का ढिंढोरा पीटना बंद करें”
मध्यप्रदेश में युवाओं की शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़ी स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र सरकार के जिला स्तर के श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश के कई शहरों में बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर हैं। उन्होंने इसे लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से युवाओं के भविष्य और रोजगार के अवसरों पर जवाब मांगा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश में युवा शक्ति को बेरोजगार करके भाजपा सरकार किस बात का जश्न मना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्वालियर में 29.3 प्रतिशत और राजधानी भोपाल में 29.2 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो न पढ़ाई से जुड़े हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ इन दो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी युवाओं के सामने इसी तरह की चुनौतियां हैं।
उमंग सिंघार ने रोज़गार के मुद्दे पर घेरा
उमंग सिंघार ने सरकार के रोजगार संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बड़ी संख्या में युवा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण से बाहर हैं तो सरकारी मंचों से रोजगार क्रांति की बात करने के बजाय जमीन पर अवसर पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सिर्फ आयोजनों और घोषणाओं से युवाओं की रोजगार संबंधी समस्याएं दूर नहीं होंगी।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार कब मिलेगा और उनकी मौजूदा स्थिति की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने सरकार से युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
एनईईटी दर को लेकर सामने आई जिला-स्तरीय तस्वीर
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने पिछले दिनों पहली बार संशोधित पद्धति के आधार पर जिला-स्तरीय श्रम बाजार से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं। इसमें 15 से 29 वर्ष के युवाओं के लिए एनईईटी यानी ऐसे लोगों का अनुपात दर्ज किया गया है जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के 76.2 प्रतिशत जिलों में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की एनईईटी दर 30 प्रतिशत से कम रही, जबकि 23.7 प्रतिशत जिलों में यह दर 30 प्रतिशत से अधिक थी। 45.9 प्रतिशत जिलों में यह अनुपात 20 से 30 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया।
यहां बेरोजगारी और एनईईटी के बीच अंतर समझना जरूरी है। बेरोजगारी दर उन लोगों को दर्शाती है जो श्रमबल का हिस्सा हैं, लेकिन उनके पास काम नहीं है और वे काम की तलाश में हैं या काम करने के लिए उपलब्ध हैं। इसके विपरीत एनईईटी दर में वे युवा भी शामिल हो सकते हैं जो फिलहाल न पढ़ाई कर रहे हैं, न काम और न ही प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस लिहाज से यह आंकड़ा सिर्फ बेरोजगारी को नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी बताता है कि युवा पढ़ाई और कौशल प्रशिक्षण से कितने जुड़े हुए हैं। जिला स्तर पर इन आंकड़ों का इस्तेमाल पहली बार संशोधित सर्वेक्षण पद्धति के तहत किया गया है।
मध्य प्रदेश में 'युवा शक्ति' को बेरोजगार करके भाजपा सरकार किस बात का जश्न मना रही है?
केंद्र सरकार के आंकड़े चीख-चीख कर मप्र सरकार की नाकामी की गवाही दे रहे हैं। ग्वालियर में 29.3% और राजधानी भोपाल में 29.2% युवा बिना पढ़ाई, रोजगार और ट्रेनिंग के घर बैठने को मजबूर हैं। यही हाल…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 22, 2026
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News







