ट्रम्प की ग्रीनलैंड को लेकर दूसरे देशों को खुली धमकी:कहा- कब्जे से रोका तो टैरिफ लगाऊंगा; हम NATO से भी बात कर रहे हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने को लेकर खुली धमकी दी है। BBC के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर किसी देश ने ग्रीनलैंड पर कब्जे वाले प्लान में उनका साथ नहीं, दिया तो वे उन देशों पर टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान यह बयान दिया। हालांकि, ट्रम्प ने साफ नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और इसके लिए वह किस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर NATO से भी बातचीत कर रहा है। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि NATO को अमेरिका का साथ देना चाहिए। अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कंट्रोल नहीं किया, तो रूस या चीन वहां अपना असर बढ़ा सकते हैं, जो किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए भी अहम बताया है। गोल्डन डोम अमेरिका का मिसाइल रक्षा प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है। गोल्डन डोम का मकसद चीन, रूस जैसे देशों से आने वाले खतरे से अमेरिका को बचाना है। अमेरिकी संसद की टीम ग्रीनलैंड पहुंची ट्रम्प के बयान के वक्त अमेरिकी संसद का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ग्रीनलैंड के दौरे पर था। इस 11 सदस्यीय टीम का नेतृत्व डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स कर रहे हैं। इसमें रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और लिसा मर्कोव्स्की भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीनलैंड के सांसदों के अलावा डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन से मुलाकात की। टीम का मकसद स्थानीय लोगों की बात सुनना और वाशिंगटन में तनाव कम करना है। सीनेटर कून्स ने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड के लोगों की सुन रहे हैं और उनकी राय लेकर वापस जाएंगे, ताकि स्थिति शांत हो।’ ग्रीनलैंड की सांसद आजा चेमनित्ज ने कहा, 'हमें दोस्तों और सहयोगियों की जरूरत है। अमेरिका 2019 से दबाव बना रहा है। यह एक लंबी दौड़ है, जो अभी खत्म नहीं हुई। जितना ज्यादा समर्थन मिले, उतना अच्छा।" उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मुलाकात फायदेमंद साबित होगी। ग्रीनलैंड को लेकर दो गुट में बंटे अमेरिकी सांसद अमेरिकी सीनेटर मर्कोव्स्की ने ग्रीनलैंड को जबरन लेने के खिलाफ संसद में एक बिल पेश किया है। वहीं, एक रिपब्लिकन सांसद ने ग्रीनलैंड को जोड़ने के पक्ष में दूसरा बिल पेश किया। ट्रम्प के विशेष दूत जेफ लैंड्री ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका को ग्रीनलैंड के नेताओं से सीधे बात करनी चाहिए, न कि डेनमार्क से। उन्होंने कहा, ‘ट्रम्प गंभीर हैं। जल्द ही सौदा हो जाएगा।’ बुधवार को डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने व्हाइट हाउस में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। एक डेनिश अधिकारी ने BBC से कहा कि सैन्य कार्रवाई की कोई बात नहीं हुई, लेकिन ट्रम्प के बयानों को गंभीरता से लिया जा रहा है। ग्रीनलैंड पर चर्चा के लिए वर्किंग ग्रुप बनेगा व्हाइट हाउस में बुधवार को हुई बातचीत में डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। हालांकि, बैठक के बाद तीनों पक्षों ने ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई, जिसकी बैठकें आने वाले हफ्तों में होंगी। रासमुसेन ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ असहमति बनी हुई है। हमारा रुख काफी अलग है। उन्होंने ट्रम्प के ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने के विचार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘हमने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश आर्कटिक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं, जिसमें ग्रीनलैंड में और ज्यादा अमेरिकी सैन्य अड्डे बनाने की संभावना भी शामिल है। यूरोपीय देश ने डेनमार्क के समर्थन में आए, सैनिक भेज रहे यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में कदम बढ़ाए हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड में एक निगरानी मिशन के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं। जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में डेनमार्क का समर्थन करने के लिए 13 लोगों की एक टीम भेजेगा। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बुधवार को कहा कि डेनमार्क के कहने पर स्वीडिश आर्म्ड फोर्स के कई अधिकारियों को एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने के लिए ग्रीनलैंड भेजा गया है। ट्रम्प बोले- संधि या लीज नहीं, ग्रीनलैंड पर पूरा कंट्रोल चाहिए ट्रम्प का कहना है कि रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि सिर्फ संधि या लीज से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरा कंट्रोल चाहिए। इससे और सुविधाएं मिलेंगी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को कहा कि उनकी टीम ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने के कई तरीके तलाश रही है, जिनमें सैन्य बल का इस्तेमाल भी शामिल है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया तो अमेरिका को 'कुछ करना ही पड़ेगा'। ग्रीनलैंड क्यों इतना खास… ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत: कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत:कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। पूरी खबर पढ़ें…
महाकाल मंदिर पूरी तरह डिजिटल: दर्शन से लेकर भस्म आरती और दान तक, सब कुछ अब एक ही वेबसाइट पर
देशभर में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर भी इससे अछूता नहीं है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भीड़, लंबी कतारें, जानकारी की कमी और बुकिंग को लेकर भ्रम ये सभी समस्याएं लंबे समय से श्रद्धालुओं के सामने …
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