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Explainer: पहले रिजॉर्ट में बंद, फिर वोट डालने से रोका! राजस्थान मेयर चुनाव में आखिर हो क्या रहा है?

राजस्थान में शहरी सरकार चुनने की प्रक्रिया इस बार सामान्य नहीं रही है. दरअसल, मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बीते कई दिनों से जो सियासी ड्रामा चल रहा था, वह सोमवार को अपने चरम पर पहुंच गया. हुआ कुछ यूं कि जब कांग्रेस पार्षद वोट डालने पहुंचे तो उन्हें वोट डालने से रोक दिया गया. हालांकि ये आरोप कांग्रेस पार्षदों का है, इस बात से बीजेपी ने अपना ऐतराज जताया है. प्रदेश के मेयर चुनाव में आखिर इतना बवाल क्यों मचा है, आइए पूरी बात सिलसिलेवार समझते हैं.

Rajasthan Mayor Election यह पूरा मामला शुरू कहां से हुआ?

राजस्थान में 9 सितंबर को हुए निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद से ही शहरों की सरकार चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. बता दें नतीजों के तुरंत बाद ही कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने अपने-अपने जीते हुए पार्षदों की 'बाड़ेबंदी' शुरू कर दी थी. उन्हें एक साथ किसी सुरक्षित जगह पर रखना शुरू कर दिया गया था ताकि कोई पार्टी पाला न बदल सके.

Rajasthan Mayor Election में जयपुर के रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की खबर कैसे आई?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नामांकन के आखिरी दिन भाजपा खेमे के 84 पार्षदों को देर रात अचानक अजमेर रोड स्थित एक रिसॉर्ट से पुष्कर शिफ्ट कर दिया गया था. दिलचस्प बात यह रही कि जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास पूरा बहुमत है. फिर भी पार्टी ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए यह कदम उठाया क्योंकि मेयर पद के लिए खुद पार्टी के भीतर ही कई दावेदार मैदान में हैं.

Rajasthan Mayor Election 2026 जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर चुनाव क्यों टाला गया था?

जानकारी के मुताबिक निकाय चुनाव नतीजों के दौरान जयपुर, जोधपुर और कोटा में इन तीनों बड़े नगर निगमों के साथ-साथ सुकेत नगर पालिका में भी EVM में तकनीकी खराबी आ गई थी. इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत में मेयर-डिप्टी मेयर और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव को स्थगित कर दिया था. अब इन जगहों पर 25 और 26 सितंबर को मतदान होना तय हुआ है जिसके लिए नामांकन 19 सितंबर से शुरू हो चुका है, ये प्रकिया 22 सितंबर तक चलेगी.

Rajasthan Mayor Election 2026 में आज क्या हुआ है?

जानकारी के मुताबिक सोमवार को राज्य के बाकी बचे 273 नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान हो रहा है. यानी जयपुर, जोधपुर और कोटा को छोड़कर बाकी सभी निकायों में आज ही जनप्रतिनिधि अपनी 'शहर सरकार' का मुखिया चुन रहे हैं. इसी दौरान कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि उनके करीब 18 पार्षदों को जानबूझकर वोटिंग स्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है. पार्टी का कहना है कि इन पार्षदों को सुनियोजित तरीके से मतदान से दूर रखा जा रहा है ताकि नतीजों को अपने पक्ष में किया जा सके. यह आरोप ऐसे वक्त पर आया है जब पहले से ही राज्यभर में निकाय चुनावों को लेकर माहौल गर्म है.

Rajasthan Mayor Election 2026 में पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर क्या विवाद हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीकानेर और हनुमानगढ़ में नवनिर्वाचित पार्षदों की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है. जिसके बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई. इससे पहले रविवार को छुट्टी के दिन भी नागौर और श्रीगंगानगर में पार्षदों की गिरफ्तारी के मामले सामने आए थे.

Rajasthan Mayor Election में हाईकोर्ट को आधी रात क्यों खुलना पड़ा?

यह वाकई राजस्थान के इतिहास में एक अनोखी घटना रही. दरअसल, बीकानेर नगर निगम के वार्ड-18 से नवनिर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद की गिरफ्तारी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट को रात करीब 12 बजे विशेष तौर पर गठित करना पड़ा था. ये सुनवाई रात दो बजे तक चली. जिसके बाद अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. यह पहली बार है जब राज्य में मेयर चुनाव से जुड़े किसी मामले में अदालत को आधी रात खोलना पड़ा था.

क्या सिर्फ बीकानेर में ही ऐसा हुआ?

बता दें बीते रविवार को छुट्टी के बावजूद नागौर और श्रीगंगानगर के पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर भी हाईकोर्ट को विशेष सुनवाई के लिए कोर्ट गठित करनी पड़ी थी और दोनों ही जगहों पर पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई. जिससे मीडिया में ऐसी रिपोर्ट हैं कि एक के बाद एक कई शहरों से मिलते-जुलते मामले सामने आ रहे हैं, जिससे ये चुनाव देशभर की मीडिया में सुर्खियों में बना हुआ है.

आखिर दोनों पार्टियां पार्षदों को लेकर इतनी सतर्क क्यों हैं?

दरअसल, मेयर और सभापति का चुनाव सीधे जनता नहीं बल्कि जीते हुए पार्षद करते हैं. ऐसे में अगर आखिरी वक्त पर कुछ पार्षद पाला बदल लें या वोटिंग में शामिल न हो पाएं तो मेयर पद का पूरा गणित ही बिगड़ जाता है. यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल अपने पार्षदों को न सिर्फ एकजुट रखने बल्कि सुरक्षित मतदान तक पहुंचाने को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं.

अजमेर में भी ये विवाद सामने आया है?

जानकारी के मुताबिक अजमेर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल पर निगम का बकाया न चुकाने का आरोप लगाते हुए उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई है. हालांकि यह फिलहाल एक पक्ष का आरोप भर है और इस पर अंतिम फैसला चुनाव अधिकारी को लेना है.

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IIT बॉम्बे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की 18 मांगों वाली लिस्ट पर डायरेक्टर ने किए साइन, अपने पद से देंगे इस्तीफा

IIT Bombay Student Protest: आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद तीन दिनों से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. अब इस मामले में छात्र छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों पर IIT बॉम्बे प्रशासन ने सहमति जताई है. छात्रों के साथ हुई लंबी बैठक के बाद आईआईटी  बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने 18 सूत्रीय चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं. इस चार्टर में साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण व्यवस्था में बदलाव और अधिकारियों की जवाबदेही जैसी कई अहम मांगें शामिल हैं. इसके साथ ही छात्रों को संबोधन करते हुए कैदारे ने एलान किया कि वो अपने पद से इस्तीफा देने वाले है. 

18 सितंबर को हुई थी आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत

दरअसल, 18 सितंबर की शाम IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत हो गई थी. IIT बॉम्बे के मुताबिक, उसी दिन मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को कथित तौर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. संस्थान का दावा है कि साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की थी. हालांकि, आईआईटी बॉम्बे का कहना है कि साहिल के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी.

आईआईटी बॉम्बे ने दी छात्र की खुदकुशी पर सफाई

इंस्ट्रक्टर और विभागाध्यक्ष ने उससे बातचीत की थी और काउंसलिंग की गई थी. संस्थान के मुताबिक, साहिल को यह भी बताया गया था कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े जाने के बाद साहिल को निलंबन की धमकी दी गई थी. इसी वजह से छात्र पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं.

प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई की मांग

18 सूत्रीय चार्टर में परीक्षा की निगरानी कर रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी शामिल है. छात्रों ने प्रोफेसर दुल्ला को तत्काल निलंबित करने की मांग की है. हालांकि, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर दुल्ला का समर्थन किया है. फैकल्टी फोरम का कहना है कि प्रोफेसर दुल्ला ने परीक्षा के दौरान अपनी जिम्मेदारी निभाई और कथित परीक्षा अनियमितता सामने आने पर संस्थान की तय प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट की.

छात्र के परिवार ने लगाया प्रोफेसर पर उत्पीड़न का आरोप

वहीं, साहिल के परिवार की शिकायत में प्रोफेसर पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं. छात्रों ने साहिल की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच के लिए कमेटी बनाने की मांग की है. इस कमेटी में प्रोफेसर, छात्र प्रतिनिधि और बाहरी सदस्य शामिल करने की मांग है. छात्रों ने 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक जांच की प्रक्रिया और निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग भी रखी है. इसके अलावा डायरेक्टर, डीन स्टूडेंट अफेयर्स और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की गई है.

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मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही मामले की जांच

छात्रों ने साहिल को लेकर संस्थान की ओर से पहले जारी जानकारी पर सार्वजनिक माफी की मांग भी की है. वहीं, साहिल की मौत की जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है. साहिल के माता-पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धारा और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. परिवार ने संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं. हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है.

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  Sports

IPL 2027 के लिए Zaheer Khan बने CSK के नए Head Coach, Stephen Fleming की लेंगे जगह

एक बहुत बड़ी खबर में, IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) की पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL 2027 सीज़न के लिए भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ ज़हीर खान को अपना हेड कोच नियुक्त किया है। चेन्नई सुपर किंग्स ने सोशल मीडिया पर इस बात की घोषणा की, जो पूरी तरह से अप्रत्याशित थी। यह ध्यान देने वाली बात है कि ज़हीर खान, न्यूज़ीलैंड के पूर्व क्रिकेटर स्टीफन फ्लेमिंग की जगह ले रहे हैं। फ्लेमिंग 16 साल तक CSK के साथ जुड़े रहे और टीम को पांच IPL खिताब जिताने में मदद की। हालांकि, CSK में बदलाव की ज़रूरत महसूस हो रही थी।

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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ज़हीर खान पांच बार की IPL चैंपियन टीम को उनके सुनहरे दिनों में वापस ला पाते हैं और उन्हें रिकॉर्ड छठा खिताब जिताने में मदद कर पाते हैं। CSK ने ट्वीट किया कि लेफ्ट आर्म का जलवा! चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच के तौर पर ज़हीर खान का स्वागत है! चेन्नई सुपर किंग्स की बात करें तो टीम ने आखिरी बार 2023 में IPL का खिताब जीता था। MS धोनी की कप्तानी में टीम ने टूर्नामेंट के फाइनल में गुजरात टाइटन्स को हराया था। हालांकि, उसके बाद से CSK IPL का खिताब नहीं जीत पाई है। MS धोनी के कप्तानी छोड़ने के बाद ऋतुराज गायकवाड़ ने कमान संभाली है।

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए IPL 2026 का सीज़न काफी निराशाजनक रहा। अपने कैंपेन में 14 मैच खेलने के बावजूद, टीम टूर्नामेंट के नॉकआउट स्टेज के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई। 14 मैचों में छह जीत और आठ हार के साथ वे स्टैंडिंग में आठवें स्थान पर रहे। 12 पॉइंट्स के साथ, CSK एक बार फिर प्लेऑफ़ में जगह नहीं बना पाई। यह ध्यान देने वाली बात है कि पिछली बार जब पांच बार की चैंपियन टीम IPL के नॉकआउट स्टेज में पहुंची थी, तो उसने 2023 में टूर्नामेंट जीता था।

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लगातार खराब सीज़न के बाद, ज़हीर की नियुक्ति फ्रेंचाइजी के लिए एक अहम समय पर हुई है। फ्लेमिंग के अब इंचार्ज न होने से टीम में बड़ा बदलाव आ सकता है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि ज़हीर खान टीम को कैसे बदलते हैं और क्या वे उन्हें वापस टॉप पर ला पाते हैं।

Mon, 21 Sep 2026 19:12:00 +0530

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