BRICS Summit 2026 किस देश में होगा आयोजित? प्रेसीडेंसी का लोगो, थीम और वेबसाइट लॉन्च
भारत की मेजबानी में ब्रिक्स समिट 2026 की औपचारिक शुरुआत हुई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दिल्ली में एक समारोह में सम्मेलन का लोगो, थीम और वेबसाइट लॉन्च किया। इस मौके पर ब्राजील, चीन, रूस जैसे प्रमुख ब्रिक्स देशों समेत कई देशों के एंबेसेडर मौजूद थे। जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की अध्यक्षता के तहत थीम और लोगो के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स को समावेशी और मानव केंद्रित बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा कि समूह के 20 साल पूरे होने के वर्ष में ब्रिक्स की अध्यक्षता बहुत मायने रखती है। इस यात्रा में ब्रिक्स उभर रही अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों के बीच सहयोग का एक अहम प्लैटफॉर्म बन कर उभरा है। दुनिया का वैश्विक माहौल कई चुनौतियों से घिरा हुआ है। इनमें जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं, जटिल आर्थिक लैंडस्केप, क्लाइमेट संबंधी चुनौतियां अहम है।
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उन्होंने कहा कि वर्षों से, ब्रिक्स ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपने एजेंडे और सदस्यता का विस्तार किया है, साथ ही जन-केंद्रित विकास, संवाद को बढ़ावा देने और व्यावहारिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान केंद्रित रखा है। विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिवेश जटिल और परस्पर जुड़ी चुनौतियां प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, जटिल आर्थिक परिदृश्य, जलवायु संबंधी जोखिम, तकनीकी परिवर्तन और विकास में लगातार बनी हुई कमियां विभिन्न क्षेत्रों के देशों को प्रभावित कर रही हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि इस संदर्भ में, ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकास के विभिन्न चरणों को ध्यान में रखते हुए संवाद, सहयोग और व्यावहारिक समाधानों को प्रोत्साहित करता है।
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लोगो विविधता में एकता का प्रतीक है
विदेश मंत्री ने बताया कि जारी किया गया लोगो आधुनिकता और पुरातन का संतुलन है। इसमें ब्रिक्स देशों के रंग है, जो विविधता में एकता और साझे उद्देश्य की झलक दिखाते है। ये लोगो ये विचार सामने रखता है कि जहां देश अपनी खासियत बरकरार रखते हुए देश सामूहिक तौर पर समूह में योगदान देते आ रहे है। बता दें कि इसी दौरान ब्रिक्स इंडिया इंडिया वेबसाइट भी लॉन्च हुई, ये एक साझे प्लैटफॉर्म की तरह ही काम करेगी। इससे इस समिट की इवेंट्स समेत सभी गतिविधियों की जानकारी मिलती रहेगी।
114 नए विमान, कांप उठेंगे चीन-पाकिस्तान, क्यों इसे कहा जा रहा अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा
भारत इस सप्ताह रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लगभग 32 लाख करोड़ रुपये के सौदे पर चर्चा करने जा रहा है। इन विमानों का निर्माण भारत में लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी घटकों के साथ किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने एएनआई को बताया कि प्रस्ताव के अनुसार, इस सौदे में भारतीय वायु सेना द्वारा लगभग 12-18 राफेल विमानों को उड़ान भरने की स्थिति में प्राप्त करना भी शामिल होगा। उन्होंने बताया कि अगले दो-तीन दिनों में होने वाली रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा के लिए रखे जाने वाले प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय पक्ष फ्रांस से यह भी अनुरोध कर रहा है कि वह सरकार-से-सरकार समझौते के तहत फ्रांसीसी विमानों में भारतीय हथियारों और अन्य स्वदेशी प्रणालियों के एकीकरण को सक्षम बनाए।
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यह अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील मानी जा रही है। इस डील के तहत राफेल जेट भारत में बनाए जाएंगे और इनमें करीब 30% हिस्सा स्वदेशी होगा। प्रस्ताव के मुताबिक, इनमें से 12 से 18 राफेल जेट सीधे उड़ान की स्थिति में भारत को मिलेंगे। डील को लेकर भारत और फ्रांस के बीच सरकार-से-सरकार के स्तर पर बातचीत हो रही है। अब तक 36 राफेल वायुसेना के पास हैं और पिछले साल नौसेना ने 26 मरीन वर्जन के लिए ऑर्डर दिया था। यह डील मंजूर होती है तो भारतीय सेना के पास 176 राफेल जेट हो जाएंगे।
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ऑपरेशन सिंदूर में चीनी मिसाइल को दी थी मात
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल के प्रदर्शन को देखते हुए इस डील को तेजी से बढ़ाया है। राफेल ने चीन के पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइल को अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से मात दी थी।
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