कश्मीर के बाद राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर दिखा ड्रोन,VIDEO:एक घंटे तक उड़ने के बाद गायब, सीमा में घुसपैठ की आशंका, एजेंसियां अलर्ट
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई है। घुसपैठियों के साथ बढ़ती ड्रोन एक्टिविटी ने भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को भी जैसलमेर के रामगढ़ में थर्मल पावर प्लांट के ऊपर सेंसेटिव एरिया में ड्रोन नजर आया। एक घंटे तक दिखने के बाद ये गायब हो गया। आशंका है ये पाकिस्तान की साजिश हो सकती है। एक दिन पहले कश्मीर में भी पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक ऐसे ही ड्रोन नजर आए थे। रात 10 बजे दिखा था ड्रोन रामगढ़ थाना प्रभारी भूटाराम विश्नोई ने बताया कि- स्थानीय निवासियों के अनुसार रात करीब 10 बजे बिजलीघर के ऊपर चमकती हुई रोशनी दिखाई दी। आशंका है कि ये ड्रोन था। यह करीब एक घंटे तक प्लांट और आसपास के आसमान में मंडराता रहा। करीब 11 बजे के बाद यह अचानक गायब हो गया। प्रशासनिक प्रतिबंध की अनदेखी जैसलमेर जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और सीमावर्ती स्थिति के चलते जिले भर में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद थर्मल पावर प्लांट के ऊपर ड्रोन का उड़ना सुरक्षा में सेंध माना जा रहा है। पूर्व में जैसलमेर सेक्टर में भी पाकिस्तानी ड्रोन सीमा उल्लंघन कर चुके हैं, जिन्हें भारतीय सेना ने नष्ट किया था। विशेषज्ञों के अनुसार, पावर प्लांट जैसे 'सॉफ्ट टारगेट' पर ड्रोन का दिखना किसी बड़ी साजिश की तैयारी की ओर इशारा हो सकता है। ग्रामीणों में दहशत, रेकी की आशंका ड्रोन देख ग्रामीणों में चिंता और डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि अगर यह ड्रोन हमले या रेकी के उद्देश्य से आया था, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा है। बिजलीघर न केवल बिजली उत्पादन का केंद्र है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें। यदि यह ड्रोन किसी स्थानीय या पर्यटक द्वारा अनजाने में उड़ाया गया पाया गया, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हथियार भेजने की आशंका देश में गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन ड्रोन्स का इस्तेमाल सीमा पर सेना की पोजिशन जानने या फिर आतंकियों के लिए हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ में पाकिस्तान से लगी सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास रविवार शाम करीब 5 ड्रोन दिखाई दिए। पिछले साल राजस्थान में सबसे ज्यादा ड्रोन की घुसपैठ रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में पाकिस्तान से लगते अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर पर अवैध ड्रोन एक्टिविटी के 791 केस सामने आए थे। इनमें सबसे ज्यादा राजस्थान में 782 शामिल हैं। बाकी घटनाएं पंजाब व अन्य एरिया में हुईं। अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों ने कुल 237 ड्रोन मार गिराए। इनमें पांच ड्रोन युद्ध जैसी सामग्री के साथ, 72 ड्रोन नशीले पदार्थों के साथ और 161 ड्रोन बिना किसी पेलोड के थे। राजस्थान में की थी हमले की कोशिश मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान राजस्थान में ड्रोन्स से हमले की कोशिश की थी। जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर से लगती सीमा पर उस दौरान पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे थे। जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने आसमान में मार गिराया था। दरअसल, पाकिस्तान के बड़े एयरबेस और आतंकी ठिकानों को राजस्थान से ही टारगेट बनाया गया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान राजस्थान से लगते बॉर्डर को ज्यादा टारगेट कर रहा है। अभी खत्म नहीं हुआ है ऑपरेशन सिंदूर- सीडीएस सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के 8 महीने बाद ड्रोन पर अटैक किया। ऑपरेशन सिंदूर भारत का सैन्य अभियान था जो 7 मई 2025 को चलाया गया, जिसमें पाकिस्तानी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक/एयर स्ट्राइक्स की गईं। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया था। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। लगभग 25 मिनट के अंदर पाकिस्तान में बहावलपुर, मुरीदके जैसे जैश और लश्कर के 9 ठिकानों को स्ट्राइक करके ध्वस्त किया गया था। हाल ही में पुणे में एक इवेंट के दौरान CDS अनिल चौहान ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसे रोका गया है। पाकिस्तान अगर आतंकी हमले या घुसपैठ करेगा तो ऑपरेशन सिंदूर दोबारा एक्टिव कर दिया जाएगा। .... बॉर्डर पर ड्रोन से घुसपैठ की आशंका से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... सांबा, राजौरी और पुंछ में LoC पर दिखे 5 ड्रोन:दावा- पाकिस्तान घुसपैठ की कोशिश में; सेना का काउंटर अटैक, सर्चिंग जारी न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक राजौरी में नौशेरा सेक्टर में तैनात जवानों ने शाम करीब 6.35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर ड्रोन देखा। इसके बाद मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की। पूरी खबर पढ़िए...
न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट-ड्यूटी 25% करने पर भड़के बागवान:CM से की मुलाकात, भारत-न्यूजीलैंड FTA रद्द करने, PM से अपना वादा निभाने की मांग
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से हिमाचल के बागवानों में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश है। प्रदेश के सेब बागवान आज (मंगलवार को) हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने शिमला पहुंचे। इस दौरान बागवानों ने न्यूजीलैंड के सेब पर केंद्र द्वारा घटाई गई इम्पोर्ट ड्यूटी का विरोध किया। बागवानों ने इस मसले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की मांग की और इम्पोर्ट ड्यूटी 100 प्रतिशत करने का PM मोदी का वादा पूरा करने की मांग की। बागवानों ने बताया कि यदि इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई तो हिमाचल का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा। सीएम के साथ बागवानों की मीटिंग के बाद मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा- बागवानों की डिमांड को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। यदि फिर भी इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई तो बागवानों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा। दरअसल, PM बनने से पहले साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने हमीरपुर के सुजानपुर में सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 प्रतिशत करने का वादा किया था। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई तो नहीं गई, लेकिन कम जरूर की जा रही है। पहले वाशिंगटन एप्पल पर 75 से 50 फीसदी की गई। अब न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50% से घटाकर 25% कर दी है। इससे देश में सस्ते आयातित सेब की बाढ़ आने का बागवानों को डर सता रहा है। 5500 करोड़ के सेब उद्योग पर पड़ेगी मार इसका सीधा असर हिमाचल प्रदेश के करीब 5500 करोड़ रुपए के सेब उद्योग और तीन लाख से अधिक बागवान परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा। इससे बागवान चिंतित है। सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर कहा कि, देश की एपल इंडस्ट्री को बचाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 फीसदी करनी चाहिए थी, ताकि वे सस्ते आयातित सेब से प्रतिस्पर्धा कर सकें। मगर भारत सरकार उल्टा शुल्क कम कर रही है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड की आड़ में दूसरे देश भी सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का दबाव बनाएंगे। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग भी बर्बाद हो जाएगा। हिमाचल के बागवानों पर पड़ेगी ज्यादा मार: दीपक स्टोन फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष और सेब बागवान दीपक सिंघा ने बताया कि, भारत-न्यूजीलैंड के बीच हुए करार के बाद देश में सेब का आयात बढ़ेगा। इसका सीधा असर कीमत पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि, यह कहना गलत है कि अप्रैल से अगस्त के बीच हिमाचल का सेब बाजार में नहीं आता। जबकि हिमाचल का सेब जून में मार्केट में आ जाता है और अगस्त में सेब सीजन पीक पर होता है। इस फैसले की सबसे ज्यादा मार हिमाचल के सेब बागवानों पर पड़ने वाली है। बागवानों के विरोध की एक ओर वजह हिमाचल में अभी प्रति हैक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब की पैदावार होती है, जबकि न्यूजीलैंड में प्रति हैक्टेयर 60 से 70 मीट्रिक टन सेब पैदा हो गया है। इस वजह से हिमाचल में प्रति किलो सेब तैयार करने पर लगभग 27 रुपए की लागत आती है। इससे हिमाचल के सेब बागवानों को तभी फायदा हो पाता है जब यहां के बागवानों का सेब कम से कम 50 से 60 रुपए बिके। ऐसे में यदि भारत सरकार अधिक पैदावार वाले देशों के सेब इम्पोर्ट पर ड्यूटी कम कर देता है तो हिमाचल का सेब मार्केट में कम्पीट नहीं कर पाएगा। इससे हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा।
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