Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन ऐसे करें बप्पा की पूजा, चढ़ाएं दूर्वा-सिंदूर और लगाएं मोदक का भोग
Ganesh Chaturthi 2026 Second Day Puja: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना के बाद अगले दिन भी घर में बप्पा की पूजा का सिलसिला जारी रहता है। कुछ लोग गणपति को डेढ़ दिन के लिए रखते हैं, जबकि कई घरों में तीन, पांच, सात या पूरे 10 दिनों तक भगवान गणेश विराजमान रहते हैं। इस दौरान सुबह और शाम उनकी पूजा और आरती की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ बप्पा की पूजा करते हैं। दूसरे दिन भी पूजा करते समय साफ-सफाई से लेकर भोग तक का विशेष ध्यान रखा जाता है।
दूसरे दिन ऐसे करें गणेश जी की पूजा
सुबह उठकर स्नान करें और सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान गणेश के सामने दीपक जलाएं और उनका ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
इसके बाद गणेश जी को जल अर्पित करें। अगर घर में स्थापित मूर्ति पर जल चढ़ाना उचित हो, तो परंपरा के अनुसार अभिषेक भी किया जा सकता है। इसके बाद बप्पा को साफ वस्त्र, लाल या पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें।
गणेश पूजा में सिंदूर चढ़ाने की भी परंपरा है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान गणेश की आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।
बप्पा को कौन-कौन सी सामग्री चढ़ाएं?
धार्मिक परंपरा में गणेश जी की पूजा के लिए कई सामग्रियों का उल्लेख मिलता है। हालांकि पूजा में सामग्री से अधिक श्रद्धा और भाव को महत्व दिया जाता है।
पूजा में आप ये चीजें अर्पित कर सकते हैं:
- दूर्वा
- सिंदूर
- लाल फूल
- अक्षत
- फल
- धूप
- दीप
- नैवेद्य
- मोदक या लड्डू
इन सामग्रियों को श्रद्धा के साथ भगवान गणेश को अर्पित किया जा सकता है।
मोदक का भोग लगाना माना जाता है शुभ
भगवान गणेश की पूजा में मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मोदक बप्पा को प्रिय हैं। इसलिए गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन भी भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाया जा सकता है।
अगर घर में मोदक तैयार नहीं किए गए हैं तो बाजार से लाए गए मोदक या अन्य मिठाई का भी भोग लगाया जा सकता है। इसके साथ केला, सेब और नारियल जैसे फल भी भगवान को अर्पित किए जा सकते हैं।
भोग के बाद प्रसाद बांटें
भोग लगाने के बाद कुछ समय के लिए मोदक और अन्य नैवेद्य भगवान गणेश के सामने रखें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट दें।
ध्यान रखें: पूजा की विधि और अर्पित की जाने वाली सामग्री अलग-अलग परिवारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। धार्मिक मान्यताओं को आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आज का पंचांग 15 सितंबर 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, सूर्योदय-सूर्यास्त
आज की तिथि क्या है?: आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
- वार: मंगलवार
- नक्षत्र: स्वाती, दोपहर 3:21 बजे तक
- योग: इंद्र योग, दोपहर 12:20 बजे तक
शुभ मुहूर्त
- अभिजीत: दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक
- ब्रह्म: सुबह 4:52 से 5:39 बजे तक
- विजय: दोपहर 2:36 से 3:25 बजे तक
राहुकाल
- दिल्ली: दोपहर 3:21 से शाम 4:54 बजे तक
- मुंबई: दोपहर 3:37 से शाम 5:09 बजे तक
- चंडीगढ़: दोपहर 3:23 से शाम 4:56 बजे तक
- लखनऊ: दोपहर 3:06 से शाम 4:39 बजे तक
- भोपाल: दोपहर 3:19 से शाम 4:52 बजे तक
- कोलकाता: दोपहर 2:36 से शाम 4:08 बजे तक
- अहमदाबाद: दोपहर 3:39 से शाम 5:11 बजे तक
- चेन्नई: दोपहर 3:07 से शाम 4:38 बजे तक
सूर्योदय-सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 6:05 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:26 बजे
आज के व्रत
विनायक गणेश चतुर्थी व्रत
आज का पर्व
ऋषि पंचमी
आज का धार्मिक महत्व
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सप्तऋषियों मरीचि, वशिष्ठ, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु की पूजा करने की परंपरा है। दोपहर के समय सप्तऋषियों का पूजन कर उनसे क्षमा याचना करने का विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी की पूजा आत्मशुद्धि और जाने-अनजाने हुए दोषों के प्रायश्चित के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ओडिशा में इस दिन को गुरु पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है।
आज राहुकाल कब है?: भोपाल में राहुकाल दोपहर 3:19 बजे से शाम 4:52 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय अलग है।
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