Canada पर मिलिट्री अटैक करेगा अमेरिका? खुलासे से हिली दुनिया!
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 2026 के लिए ना जाने कौन सी कसम खा ली है। दुनिया भर में युद्ध के सायरन बजाने की तैयारी में राष्ट्रपति ट्रंप है। ऐसा लग रहा है। ट्रंप के एक के बाद एक जो फैसले सामने आ रहे हैं, जो बयान सामने आए हैं, चाहे वह वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरों को उठाना हो, ग्रीनलैंड को धमकी देकर खरीदने की बात करना हो या फिर ईरान में फैली आग में घी डालकर उकसाना हो, चीन को धमकाना हो या रूस के राष्ट्रपति पुतिन को सीधा चैलेंज देना हो, ट्रंप के इरादों ने खौफ पैदा कर दिया है। ट्रंप के फैसलों से लगातार चर्चा बढ़ गई है और डर का माहौल हो गया है कि क्या वाकई वर्ल्ड वॉर थ्री पास में है और इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ ट्रंप है।
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वेनेजुएला पर ट्रंप रुके नहीं है और अब उन्होंने अब अमेरिका ने एक नई जगह पर अटैक कर डाला है और यहां पर ट्रंप ने बता दें कि एक और देश पर टारगेट करने की बात भी कही है। सिर्फ एक देश नहीं कई देश के टारगेट पर ट्रंप है। उनकी नजरें हैं। ऐसा लगने लगा है। कहीं पर ट्रंप तख्ता पलट करके हड़कंप मचाना चाहते हैं तो किसी को खरीद कर तो किसी को डराधमका कर यूएस में शामिल करना चाहते हैं ताकि ट्रंप बाद में उसे अपने हिसाब से चला सके। ट्रंप ग्रीनलैंड के बाद अब किस देश को यूएस का स्टेट बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। दरअसल अमेरिका ने शनिवार रात सीरिया में बड़े पैमाने पर स्ट्राइक कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी कि सेंट कॉम के मुताबिक हमलों में सीरिया के अलग-अलग इलाहकों में आईएसआई के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।
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सेंट कॉम ने बताया कि इस ऑपरेशन में आईएसआईएस के ठिकाने, हथियारों और ढांचों को निशाना बनाया गया। हालांकि यह अभी तक साफ नहीं किया गया है कि किन-किन इलाकों में और कितने ठिकाने तबाह किए गए हैं और कितने आतंकी मारे गए हैं। इस बारे में अभी तक कोई भी जानकारी साफ नहीं हुई है। लेकिन रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से यह बातें सामने आई है कि अमेरिका और उसकी सहयोगी सेनाओं ने ऑपरेशन में 35 से ज्यादा ठिकानों पर 90 से ज्यादा हथियार दागे हैं। इस ऑपरेशन में 20 से ज्यादा विमानों ने हिस्सा लिया था।
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यानी कि 20 से ज्यादा विमान इस ऑपरेशन में शामिल हुए थे। इस स्ट्राइक में शामिल हुए थे। ट्रंप प्रशासन ने इस जवाबी कारवाई को ऑपरेशन हॉक आई स्ट्राइक नाम दिया है। इसकी शुरुआत 19 दिसंबर को ही हो गई थी। तब सीरिया के आईएसआई के 70 ठिकानों पर बड़े हमले किए गए थे। सेंट्रल कमांड ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को इन हमलों का निर्देश दिया था, ऐलान दिया था, आर्डर दिया था। बयान में यह भी कहा गया कि यह हमले आतंकवाद से लड़ने और इस क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं की रक्षा के प्रयास में किए गए हैं।
अमेरिका की धमकी के बाद BRICS देशों ने उतारे युद्धपोत, ट्रंप की उड़ी नींद!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गुंडागर्दी, दादागिरी और खुली सैन्य धमकियों ने दुनिया के कई देशों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि ट्रंप अगर किसी पर भी हमला करें उससे पहले ही देश अपनी जवाबी तैयारियों में जुट गए हैं और इसी कड़ी में अब जो तस्वीर सामने आई है उसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। रूस, चीन और ईरान ने अपने युद्धपथ समंदर में उतार दिए हैं और यह सच भी है। पिछले कुछ समय से डोनाल्ड ट्रंप ने जो कदम उठाए हैं, उन्होंने दुनिया को झकझोर कर रख दिया। वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अगवा कर लिया। रूसी तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया। कई देशों में तख्तापलट की तैयारी कर ली। दक्षिण चीन सागर में लड़ाकू विमान उतार दिए। परमाणु युद्धपोतों की तैनाती शुरू कर दी।
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इन सब ने मिलकर एक साफ संदेश दिया कि अमेरिका अब कूटनीति से ज्यादा ताकत और धमकी की भाषा बोल रहा है। अमेरिकी हरकतों के जवाब में रूस ने खुली चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका पर परमाणु हमला भी किया जा सकता है। चीन भी साफ शब्दों में कह चुका है कि आग से मत खेलो। नॉर्थ कोरिया ने भी अमेरिका को ललकारते हुए कह दिया है कि अगर उकसाया गया तो तबाही तय है। मतलब साफ है दुनिया एक बार फिर शीत युद्ध से सीधे गर्म युद्ध की ओर आगे बढ़ रही है। अब इसी बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने अमेरिका की टेंशन को और बढ़ा दिया। रूस, चीन और ईरान ने हिंद महासागर के पास दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तटों पर बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया।
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हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स अभ्यास नहीं कहा जा रहा लेकिन इसमें शामिल देशों की सूची इसका साफ संदेश दे रही हैं। चीन, रूस, ईरान और दक्षिण अफ्रीका यानी ब्रिक्स की सैन्य झलक। अब कहां हो रहा है यह अभ्यास? जान लीजिए। दरअसल यह युद्धाभ्यास दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तटों के पास हिंद महासागर क्षेत्र में किया जा रहा। इस क्षेत्र की अहमियत बहुत बड़ी है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स, तेल और गैस की सप्लाई लाइन एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाला रास्ता। यानी अगर यहां नियंत्रण हुआ तो वैश्विक व्यापार हिल जाएगा।
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