कलकत्ता High Court ने बदला Mamata Banerjee की रैली का स्थल, श्रीरामपुर कोर्ट ग्राउंड में मिली अनुमति
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 26 सितंबर को श्रीरामपुर कोर्ट ग्राउंड में राजनीतिक रैली करने की अनुमति दी तथा रैली के लिए एक निजी भूमि पर पूर्व में आवंटित किए गए स्थल को बदल दिया। उच्च न्यायालय ने राजनीतिक रैली की अनुमति से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। ‘जगन्नाथ ज्यू ट्रस्टी बोर्ड’ ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के सामने 10 सितंबर को एक पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
इस याचिका में न्यायमूर्ति भट्टाचार्य द्वारा ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को हुगली जिले के श्रीरामपुर में बोर्ड की जमीन महेश जगन्नाथदेव स्नानपीरी मैदान पर जनसभा करने की अनुमति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था। बोर्ड ने दावा किया कि कि याचिकाकर्ता को औपचारिक मंजूरी मिले बिना, निजी स्वामित्व वाले मैदान पर ऐसी राजनीतिक सभा नहीं बुलाई जा सकती, जिसके आयोजन की अनुमति इस अदालत ने 11 सितंबर के लिए दी थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने भूस्वामी और पुलिस की पुनर्विचार याचिकाओं को मंजूरी देते हुए कहा कि ट्रस्टी बोर्ड की इजाजत के बिना निजी जमीन पर सभा, रैली, धरना या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने 26 सितंबर को सार्वजनिक जमीन श्रीरामपुर कोर्ट ग्राउंड पर सभा करने की अनुमति दी। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि आयोजन में ज़्यादा से ज़्यादा 1,000 लोग शामिल होंगे। राज्य सरकार और निजी जमीन के स्वामी ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें भीड़-भाड़ वीले जीटी रोड पर प्रस्तावित रैली करने के बजाय 11 सितंबर को सभा करने की इजाज़त दी गई थी।
खंडपीठ ने राज्य सरकार और निजी जमीन के स्वामी की अपील को उनके द्वारा वापस लिया जाना मानते हुए निस्तारित कर दी थी। खंडपीठ ने पिछले हफ़्ते एकल पीठ से अनुरोध किया था कि यदि पुनर्विचार याचिका दायर की जाती है, तो उस पर 25 सितंबर तक फैसला किया जाए। पश्चिम बंगाल सरकार ने खंडपीठ के सामने दलील दी कि न्यायाधीश ने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि आयोजन स्थल निजी संपत्ति है और सभा करने के लिए भूमि के मालिक की अनुमति आवश्यक है।
Disha Salian केस में Uddhav Thackeray ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2020 के दिशा सालियान मौत मामले को लेकर उनके परिवार के खिलाफ चलाया जा रहा चरित्र हनन अभियान यदि नहीं रुका तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान बंबई उच्च न्यायालय द्वारा सालियान की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के कुछ दिन बाद आया है। अदालत ने सालियान के पिता की याचिका पर यह आदेश दिया था।
इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने किसी आरोपी का नाम लिए बिना मामला दर्ज किया। ठाकरे ने यहां पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, इस मामले से हमारा कोई संबंध नहीं है। आदित्य (ठाकरे) भी यह कह चुके हैं।
यह मुद्दा सिर्फ मेरे बारे में नहीं है। इस तरह का चरित्र हनन आप लोगों के साथ भी हो सकता है। ठाकरे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, यदि इस तरह के आरोप लगातार लगाए जाते हैं तो कोई कब तक इसे बर्दाश्त करेगा?
मुझे हैरानी है कि इस मामले में मोदी और ट्रंप के नाम क्यों नहीं हैं। ठाकरे ने दोहराया कि सालियान की मौत दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन उनके परिवार का इससे कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा, यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
हम चुप रहे क्योंकि एसआईटी (विशेष जांच दल) मामले की जांच कर रही थी। जो लोग जांच करना चाहते हैं, वे करते रहें। लेकिन अब बिना वजह चरित्र हनन बहुत हो चुका है, नहीं तो हम कानूनी कदम उठाएंगे।
बुधवार को उनके बेटे और विधायक आदित्य ठाकरे ने दावा किया था कि वह कभी दिशा सालियान से नहीं मिले। आदित्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, मैं कभी दिशा सालियान से नहीं मिला और न ही उन्हें जानता था। इस दुखद मामले में मेरा नाम जोड़ना कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक और निजी हितों के कारण लगभग छह साल से किया जा रहा एक जानबूझकर और बिना सबूत वाला चरित्र हनन अभियान है।
दिशा सालियान (28) बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं। उनकी 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
इसके करीब एक सप्ताह बाद 14 जून, 2020 को राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास में मृत पाए गए थे, जिसके बाद दोनों मौतों के बीच संबंध को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थीं। बंबई उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को सालियान की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
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