Disha Salian केस में Uddhav Thackeray ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2020 के दिशा सालियान मौत मामले को लेकर उनके परिवार के खिलाफ चलाया जा रहा चरित्र हनन अभियान यदि नहीं रुका तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान बंबई उच्च न्यायालय द्वारा सालियान की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के कुछ दिन बाद आया है। अदालत ने सालियान के पिता की याचिका पर यह आदेश दिया था।
इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने किसी आरोपी का नाम लिए बिना मामला दर्ज किया। ठाकरे ने यहां पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, इस मामले से हमारा कोई संबंध नहीं है। आदित्य (ठाकरे) भी यह कह चुके हैं।
यह मुद्दा सिर्फ मेरे बारे में नहीं है। इस तरह का चरित्र हनन आप लोगों के साथ भी हो सकता है। ठाकरे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, यदि इस तरह के आरोप लगातार लगाए जाते हैं तो कोई कब तक इसे बर्दाश्त करेगा?
मुझे हैरानी है कि इस मामले में मोदी और ट्रंप के नाम क्यों नहीं हैं। ठाकरे ने दोहराया कि सालियान की मौत दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन उनके परिवार का इससे कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा, यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
हम चुप रहे क्योंकि एसआईटी (विशेष जांच दल) मामले की जांच कर रही थी। जो लोग जांच करना चाहते हैं, वे करते रहें। लेकिन अब बिना वजह चरित्र हनन बहुत हो चुका है, नहीं तो हम कानूनी कदम उठाएंगे।
बुधवार को उनके बेटे और विधायक आदित्य ठाकरे ने दावा किया था कि वह कभी दिशा सालियान से नहीं मिले। आदित्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, मैं कभी दिशा सालियान से नहीं मिला और न ही उन्हें जानता था। इस दुखद मामले में मेरा नाम जोड़ना कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक और निजी हितों के कारण लगभग छह साल से किया जा रहा एक जानबूझकर और बिना सबूत वाला चरित्र हनन अभियान है।
दिशा सालियान (28) बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं। उनकी 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
इसके करीब एक सप्ताह बाद 14 जून, 2020 को राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास में मृत पाए गए थे, जिसके बाद दोनों मौतों के बीच संबंध को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थीं। बंबई उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को सालियान की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
UPI MDR Charge: ग्राहकों की जेब नहीं होगी ढीली, Govt की निगरानी में Merchants उठाएंगे पूरा खर्च
कुछ खास UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को वापस लेने की विपक्ष की मांग के बीच, गुरुवार को सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह फैसला पूरी सोच-समझकर लिया गया है। सरकार इसके लागू होने पर बारीकी से नज़र रखेगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि मर्चेंट ये चार्ज ग्राहकों पर न डालें। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि इसे लागू करने में आ रही कमियों को दूर करने की कोशिश की जाएगी। सरकार ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत की है। सरकार इसके सही तरीके से लागू होने पर बारीकी से नज़र रखेगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि मर्चेंट ये चार्ज ग्राहकों पर न डालें।
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सूत्रों ने यह भी कहा कि शेयर बाज़ार में 0.02 प्रतिशत MDR चार्ज लगाने का फैसला SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के बाद लिया गया। सूत्रों ने फिर से कहा कि सरकार पर चुनिंदा UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगाने का कोई दबाव नहीं है और उन्होंने यह भी कहा कि UPI पर GST लगने की बात महज एक अफवाह है। सूत्रों ने कहा कि इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट में एडजस्ट कर लिया जाएगा। अगर कोई समस्या आती है, तो GST काउंसिल उस पर विचार करेगी। हमें नहीं लगता कि MDR की वजह से कैश ट्रांज़ैक्शन में कोई खास बढ़ोतरी होगी। हमें भरोसा है कि कैश ट्रांज़ैक्शन में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। 15 अक्टूबर को इसे लागू किए जाने के बाद UPI ट्रांज़ैक्शन में कमी आने की उम्मीद न करें।
UPI प्लेटफ़ॉर्म चलाने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कुछ UPI ट्रांज़ैक्शन पर MDR लगाने की बात कही गई है, ताकि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक टिकाऊ ढांचा बनाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि NPCI लगातार RuPay डेबिट कार्ड को बढ़ावा दे रही है और RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को MDR से मुक्त रखा गया है। उन्होंने कहा कि RuPay कार्ड को दूसरे कार्डों के मुकाबले बढ़त मिलेगी।
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15 अक्टूबर से, 2,000 रुपये से ज़्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा। यह चार्ज ग्राहकों को नहीं, बल्कि मर्चेंट्स को देना होगा। 75,000 रुपये या उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा। लोगों के बीच होने वाले पेमेंट और रोज़मर्रा के ज़्यादातर मर्चेंट पेमेंट पहले की तरह मुफ़्त रहेंगे। ज़रूरी सेवाओं - जैसे रेलवे, टेलीकॉम, फ़्यूल और इंश्योरेंस - के लिए 2,000 रुपये से ज़्यादा के हर ट्रांज़ैक्शन पर 5 रुपये की फ़्लैट फ़ीस लगेगी।
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