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कुलंजन: अदरक जैसा दिखने वाला ये पौधा, आयुर्वेद में क्यों माना जाता है खास?

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय पौधे बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है। कुलंजन भी इन्हीं में से एक है। यह पौधा देखने में काफी हद तक अदरक जैसा दिखाई देता है और इसकी तेज सुगंध तथा तीखा स्वाद इसे दूसरी जड़ी-बूटियों से अलग पहचान देते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का इस्तेमाल कई तरह की सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है।

बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि कुलंजन का वैज्ञानिक नाम अल्पिनिया कैल्केराटा है। यह मुख्य रूप से उष्ण और नम जलवायु में अच्छी तरह उगता है। इसके पौधे में लंबी, हरी पत्तियां होती हैं, जबकि जमीन के नीचे इसका सुगंधित तना विकसित होता है। इसमें छोटे और सफेद रंग के फूल भी दिखाई देते हैं। हालांकि पौधे का ऊपरी हिस्सा भी अपनी पहचान रखता है, लेकिन औषधीय उपयोग के लिए मुख्य रूप से इसकी जड़ और जमीन के अंदर मौजूद तने को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुलंजन की सबसे खास बात इसकी गर्म तासीर और तीखी प्रकृति मानी जाती है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम और श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसकी सुगंधित प्रकृति के कारण इसे सांस से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।

पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का संबंध जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं से भी बताया जाता है। इसके अलावा पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। माना जाता है कि इसकी गर्म प्रकृति पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

कुलंजन के भले ही कई पारंपरिक लाभ बताए जाते हैं, लेकिन किसी भी बीमारी में दवा के रूप में इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है। बिना सही जानकारी के इसका उपयोग करना खतरनाक हो सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की बंपर बारिश, 281 कंपनियों ने जुटाए 1.4 अरब डॉलर

भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के सेमीकंडक्टर क्षेत्र ने अब तक 281 वित्तपोषित कंपनियों के माध्यम से कुल 1.4 अरब डॉलर की इक्विटी फंडिंग जुटाई है. इनमें से लगभग 701 मिलियन डॉलर, यानी कुल निवेश का करीब आधा हिस्सा, 2025 के बाद प्राप्त हुआ है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेशक विश्वास को दर्शाता है. ट्रैक्सन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वर्तमान में 3,557 सेमीकंडक्टर से संबंधित कंपनियां कार्यरत हैं। इनमें से 281 कंपनियों को फंडिंग मिली है, जबकि 142 कंपनियों ने इक्विटी निवेश जुटाने में सफलता हासिल की है. केवल वर्ष 2026 में अब तक इस उद्योग ने 228 मिलियन डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है.

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यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब सेमीकॉन इंडिया 2026 सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन 17 से 19 सितंबर के बीच नई दिल्ली में होने जा रहा है. इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह आयोजन भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) सबसे अधिक निवेश आकर्षित करने वाला सेगमेंट रहा है. वर्ष 2025 के बाद से इस क्षेत्र में 313 मिलियन डॉलर का निवेश आया है. इसके बाद एम्बेडेड हार्डवेयर दूसरा सबसे बड़ा निवेश प्राप्त करने वाला सेगमेंट रहा, जिसने 51.9 मिलियन डॉलर जुटाए. खास बात यह है कि यह पूरी राशि पिछले 12 महीनों के दौरान प्राप्त हुई है। इसके अलावा, पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटेड सर्किट्स और फैबलेस सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरर्स भी निवेश के लिहाज से प्रमुख श्रेणियों में शामिल रहे. भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में तेज हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, वार्षिक फंडिंग 2021 में 49 मिलियन डॉलर थी, जो बढ़कर 2025 में 473 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इस दौरान क्षेत्र ने 36 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है.

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं, सेमीकंडक्टर मिशन, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिशें और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तेजी इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं. शहरवार विश्लेषण में बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर केंद्र बनकर उभरा है, जहां 626 कंपनियां मौजूद हैं, जो देश की कुल सेमीकंडक्टर कंपनियों का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा हैं. फंडिंग के मामले में भी बेंगलुरु सबसे आगे है और अब तक जुटाई गई कुल इक्विटी फंडिंग में इसकी हिस्सेदारी 40.1 प्रतिशत रही है। इसके बाद नोएडा, गुरुग्राम, कोच्चि और हैदराबाद प्रमुख केंद्रों के रूप में उभरे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस क्षेत्र में कंपनियों के लिए अधिग्रहण सबसे लोकप्रिय निकास मार्ग बना हुआ है. अब तक 62 अधिग्रहण दर्ज किए गए हैं, जबकि 42 कंपनियां आईपीओ के जरिए सार्वजनिक बाजार तक पहुंची हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी कंपनी को पहली फंडिंग मिलने के बाद अधिग्रहण तक पहुंचने में औसतन 11.8 वर्ष लगे, जबकि आईपीओ तक पहुंचने वाली कंपनियों को औसतन 16.5 वर्ष लगे.  

Input: IANS

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  Sports

Asia cup trophy: 'मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं ले सकते'... महिला टीम के फैसले पर BCCI सचिव सैकिया का दो टूक जवाब

Devajit Saikia on Trophy Controversy: महिला एशिया कप में रविवार रात भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका महिला टीम को 72 रन से हराया। शानदार जीत के बाद भारतीय महिला टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमेन मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। ऐसा दूसरी मर्तबा हुआ। इससे पहले भारतीय पुरुष टीम ने 2025 में एशिया कप खिताब जीतने के बाद भी मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं ली थी।   

भारतीय टीम के ट्रॉफी नहीं लेने के फैसला का बीसीसीआई सचिव (bcci secretary) देवजीत सैकिया ने स्वागत किया है। 

उन्होंने कहा- कि पहलगाम हमले के बाद परिस्थितियां काफी बदल गई। देशवासियों का काफी दबाव था कि हम पाकिस्तान के साथ कोई ताल्लुक नहीं रखे। कोई क्रिकेट नहीं खेले। लेकिन भारत सरकार और भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सहमति से फैसला लिया कि हम मल्टीनेशन टूर्नामेंट में हर देश के साथ क्रिकेट खेलेंगे, लेकिन द्विपक्षीय सीरीज में पाकिस्तान के साथ नहीं खेलेंगे। 

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि मल्टीनेशन टूर्नामेंट में पाकिस्तान के साथ खेलेंगे और हर शर्त को मान लेंगे। पाकिस्तान के साथ हमारे देश का संबंध पहले से खराब है, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद ये संबंध और खराब हो चुके हैं। ऐसे में मोहसिन नकवी जो पाकिस्तान के एक प्रमुख लीडर भी हैं। जो हमारे देश के खिलाफ काम कर रहे हैं। हम उससे ट्रॉफी नहीं ले सकते। एशिया कप में मेन्स टीम ने ट्रॉफी नहीं ली थी और यही परंपरा विमेंस टीम ने भी जारी रखी। हमारी पुरुष और महिला दोनों टीमों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। पाकिस्तान को हर बार हराया है और एकतरफा तरीके से हराया है। 

गौरतलब है मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष होने के साथ-साथ एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमेन भी हैं। वह पाकिस्तान सरकार में अहम मंत्री भी हैं। 

एशिया कप ट्रॉफी का क्या हुआ? 
भारतीय पुरुष टीम के बाद महिला टीम ने भी एशिया कप जीतने के बाद ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 2025 की ट्रॉफी आखिर कहा है? तो जवाब है कि एशिया कप 2025 की ट्रॉफी एशियन क्रिकेट काउंसिल के दुबई ऑफिस में रखी हुई है। मोहसिन नकवी ACC के प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच विवाद का समाधान नहीं होने की वजह से टीम इंडिया को वो ट्रॉफी अभी तक नहीं दी गई है। इस बीच भारतीय बोर्ड ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय लौटाने को कहा था, लेकिन नकवी भी अड़े हुए हैं कि दुबई आकर ही ट्रॉफी लेनी पड़ेगी। 

Mon, 14 Sep 2026 17:15:04 +0530

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