Congress सांसद Karti Chidambaram ने पूछा, क्या BRICS देश अब भी करेंगे Pakistan की मदद
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को आतंकवाद की निंदा करने वाले ब्रिक्स (BRICS) घोषणापत्र का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसकी कामयाबी इसके लागू होने और सदस्य देशों के भविष्य के कदमों पर निर्भर करेगी।
उन्होंने इसे एक सकारात्मक कदम बताया, लेकिन सवाल उठाया कि अगर कुछ सदस्य देश आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोपी देशों का समर्थन करना जारी रखते हैं, तो इस बयान का क्या असर होगा। एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि हम आतंकवाद की निंदा कर रहे हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि संघर्षों में सक्रिय रूप से शामिल दो देश - ईरान और रूस - भी बैठक में मौजूद थे। हमने गाजा के बारे में बात तो की है, लेकिन हमें यह देखना होगा कि इस विचार का कोई असर होगा या इसे लागू किया जाएगा, क्योंकि अमेरिका और इज़राइल बहुत करीबी सहयोगी हैं। मुझे नहीं पता कि क्या यह समूह, सामूहिक रूप से यह बात कहने के बावजूद, अमेरिका के साथ बातचीत करते समय व्यक्तिगत रूप से इस पर जोर देगा या नहीं।
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जहाँ तक पहलगाम घटना की निंदा करने की बात है, तो यह बहुत अच्छी बात है। हर तरह के आतंकवाद की निंदा होनी चाहिए। लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि क्या इनमें से कोई देश अब भी पाकिस्तान की मदद करेगा। क्योंकि पहलगाम के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' हुआ था। लेकिन सबूत बताते हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चीन ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी। तो, इस घोषणा का क्या मतलब है अगर आप आतंकवाद और किसी आतंकी देश के खिलाफ भारत की कार्रवाई की निंदा तो करते हैं, लेकिन संगठन का ही कोई दूसरा सदस्य हमारे साथ टकराव में उस आतंकी देश की खुलकर मदद कर रहा हो? इसलिए, भले ही यह घोषणा स्वागत योग्य है, हमें यह देखना होगा कि इसका नतीजा क्या निकलता है और क्या सदस्य देशों के व्यवहार में कोई बदलाव आता है कि वे हालात पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। सितंबर 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन सर्वसम्मति से अपनाई गई 'नई दिल्ली घोषणा' को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। इस घोषणा में संगठन ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की साफ तौर पर निंदा की है और सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रुख अपनाया है। इसके अलावा, चिदंबरम ने कहा कि ब्रिक्स बैठकों के नतीजों का विश्लेषण किया जाना चाहिए और उनकी तुलना पिछले शिखर सम्मेलनों में लिए गए फैसलों से की जानी चाहिए।
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भारत ने 12-13 सितंबर को अपनी अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की, जिसमें ब्रिक्स नेताओं ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया। उन्होंने कहा, "ब्रिक्स का विचार 25 साल से भी पहले आया था। इसकी सदस्यता का विस्तार हुआ है। हम केवल पश्चिमी देशों द्वारा बनाए गए संगठनों पर निर्भर नहीं रह सकते। दुनिया में एक काउंटर-ब्लॉक (प्रति-समूह) होना चाहिए... ब्रिक्स, अर्थव्यवस्था और अन्य पहलुओं के माध्यम से, एक काउंटर-ब्लॉक बनने की भी उम्मीद कर रहा है, और इसे मजबूत किया जाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "हमें यह भी देखना चाहिए कि इन बैठकों के वास्तविक परिणाम क्या हैं, और हमें यह भी मापना चाहिए कि पिछली बार क्या तय किया गया था, और क्या उसे लागू किया जा रहा है। जब यह शिखर सम्मेलन हो रहा है और आगे चलकर, जब ब्रिक्स में अगली बैठक होगी, तो मुझे लगता है कि अगली बैठक से पहले दिल्ली के बाद क्या हुआ, इसका विश्लेषण भी किया जाना चाहिए।
कर्नाटक में 100 तालुकों में सूखा घोषित, DK Shivakumar ने बिजली और पानी संकट पर जताई चिंता
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने सोमवार को राज्य में गंभीर सूखे तथा पेयजल और बिजली की संभावित किल्लत को लेकर चिंता जताई। शिवकुमार ने कहा कि सरकार ताप विद्युत उत्पादन बढ़ाने और राष्ट्रीय ग्रिड के जरिये अतिरिक्त बिजली हासिल करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। शिवकुमार ने अपने गृहनगर कनकपुरा में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि 100 तालुकों में पहले ही सूखा घोषित किया जा चुका है और निर्धारित मानदंडों के आधार पर अन्य क्षेत्रों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है और फसलें बर्बाद हो गई हैं। कई जगहों पर तो फसल की बुवाई भी नहीं हो सकी। आगे की स्थिति संकेत देती है कि पेयजल और बिजली की गंभीर कमी हो सकती है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह बिजली की मांग 19,000 मेगावाट को पार कर गई थी, जिसके चलते सरकार को शाम के व्यस्त समय में 11 से 13 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपने ऊर्जा मंत्री के जे जॉर्ज से इस बारे में विस्तृत चर्चा करने और पड़ोसी राज्यों से बात करने को कहा है कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं।’’ शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में निवेशकों की ओर से पानी, बिजली और जमीन की मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ताप विद्युत उत्पादन बढ़ाने और कोयला उत्पादक क्षेत्रों से बिजली हासिल करने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड’ व्यवस्था के तहत देश के अन्य हिस्सों में पैदा होने वाली बिजली कर्नाटक तक लाई जा सकती है, हालांकि इसके लिए पारेषण शुल्क देना होगा।
‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड’ व्यवस्था के तहत भारत के क्षेत्रीय बिजली ग्रिड को एकल राष्ट्रीय ग्रिड में जोड़ा गया है, जो एक समान फ्रीक्वेंसी पर संचालित होता है। शिवकुमार ने सूखे से हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा कि 21 से 23 सितंबर तक प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र में किसानों की सूखे से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के लिए दो दिन निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम सूखे के कारण किसानों के सामने आई समस्याओं पर चर्चा करना चाहते हैं।
इसलिए किसानों की सूखे से जुड़ी स्थिति पर चर्चा के लिए हमने विशेष रूप से दो दिन रखे हैं।’’ उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के विधायकों ने अपनी शिकायतें सामने रखी हैं और सत्र के दौरान उन्हें अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम इस मामले में दलगत राजनीति नहीं देखेंगे। जहां भी सूखा गंभीर है और जहां भी निर्धारित मानदंड पूरे होते हैं, हम उन क्षेत्रों को जल्द सूखाग्रस्त घोषित करेंगे।’’ शिवकुमार ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक 18 सितंबर को तटीय क्षेत्र के दक्षिण कन्नड़ जिले में होगी।
उन्होंने कहा कि बैठक में पलायन रोकने और क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल करके लोगों के जीवन में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘उस दिन हम कई कार्यक्रमों और नई पहलों की घोषणा करेंगे।’’ शिवकुमार ने अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के बारे में कहा कि उन्होंने एक छात्रावास का दौरा किया और छात्रों के कल्याण के संबंध में अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कलबुर्गी, रायचूर, हावेरी और बीदर के छात्र शिक्षा के लिए कनकपुरा के छात्रावासों में रह रहे हैं, हालांकि त्योहार के कारण कई छात्र अपने घर चले गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात पर नजर रखने की जरूरत है कि बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है, वार्डन अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं और बच्चे किसी गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘माता-पिता अपने बच्चों को हमारी (सरकार की) देखभाल में छोड़ते हैं और सरकार पर उसी तरह भरोसा करते हैं। हमें इस जिम्मेदारी के बारे में सोचना होगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या सभी कांग्रेस विधायक सरकार की ‘प्रजा सेवा’ पहल में हिस्सा लेंगे, शिवकुमार ने कहा कि वे ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों को कार्यक्रम और संबंधित विभाग के बारे में जानकारी देना अभी बाकी है।
इस पहल का उद्देश्य शासन को लोगों के करीब लाना, जन शिकायतों का समाधान करना और सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित करना है। मंत्रिमंडल में रिक्ति कब भरी जाएगी, इस सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि पार्टी के निर्देश मिलने के बाद फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘जब भी हमारी पार्टी (कांग्रेस) हमें बताएगी, हम ऐसा करेंगे।
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