Fridge Cleaning Tips: गंदा फ्रिज मिनटों में होगा चकाचक! इन ट्रिक्स से जिद्दी दाग-धब्बे और बदबू होगी दूर
Fridge Cleaning Tips: फ्रिज की सफाई को अक्सर लोग टालते रहते हैं, लेकिन लंबे समय तक सफाई न करने पर अंदर खाने के दाग, तेल के निशान, गिरी हुई ग्रेवी और चिपचिपी परत जमने लगती है। कई बार सामान्य कपड़े से पोंछने पर भी ये दाग आसानी से नहीं निकलते। ऊपर से फ्रिज में रखी अलग-अलग चीजों की गंध आपस में मिलकर बदबू पैदा करने लगती है। ऐसे में थोड़ी-सी समझदारी और घर में मौजूद कुछ आसान चीजों की मदद से फ्रिज को कम समय में साफ किया जा सकता है।
फ्रिज की सफाई के लिए हमेशा तेज केमिकल या महंगे क्लीनर की जरूरत नहीं होती। बेकिंग सोडा, सफेद सिरका, हल्का डिशवॉशिंग लिक्विड और गुनगुना पानी जैसी चीजों से कई सामान्य दागों को साफ किया जा सकता है। हालांकि सफाई शुरू करने से पहले फ्रिज को खाली करना, बिजली से डिस्कनेक्ट करना और अलग-अलग सतहों के अनुसार सही तरीका अपनाना जरूरी है। आइए जानते हैं फ्रिज को साफ करने के कुछ आसान और असरदार तरीके।
फ्रिज को क्लीन करने के सिंपल टिप्स
सबसे पहले फ्रिज करें खाली
फ्रिज की सफाई शुरू करने से पहले उसमें रखा सारा सामान बाहर निकाल लें। एक्सपायर्ड या खराब हो चुकी चीजों को अलग कर दें। सब्जियां, फल, सॉस और अन्य खाद्य पदार्थों को कुछ समय के लिए ठंडी जगह पर रखें। इसके बाद रैक और ड्रॉअर निकालकर अलग से साफ करें। इससे फ्रिज के कोनों और नीचे जमी गंदगी तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा।
जिद्दी दाग के लिए बेकिंग सोडा
फ्रिज के अंदर सूखे और चिपके हुए दागों पर बेकिंग सोडा और पानी का गाढ़ा पेस्ट लगाया जा सकता है। इसे कुछ मिनट दाग पर लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम स्पंज या माइक्रोफाइबर कपड़े से धीरे-धीरे साफ करें। बहुत ज्यादा जोर से रगड़ने से प्लास्टिक की सतह पर खरोंच आ सकती है, इसलिए सफाई करते समय हल्का हाथ रखें।
चिकने दाग ऐसे होंगे साफ
तेल या खाने की चिकनाई वाले निशानों के लिए गुनगुने पानी में थोड़ा-सा हल्का डिशवॉशिंग लिक्विड मिलाएं। इस घोल में माइक्रोफाइबर कपड़ा भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ें और प्रभावित जगह को पोंछें। इसके बाद साफ पानी से हल्का गीला कपड़ा चलाएं और अंत में सूखे कपड़े से सतह को पोंछ दें।
बदबू दूर करने के लिए अपनाएं ये तरीका
फ्रिज में लगातार बनी रहने वाली गंध के लिए सफाई के साथ बदबू के स्रोत को हटाना जरूरी है। खराब या ज्यादा पुराना खाना फ्रिज में न रखें। एक छोटी खुली कटोरी में बेकिंग सोडा रख सकते हैं, जो कुछ गंधों को सोखने में मदद कर सकता है। इसे समय-समय पर बदलना भी जरूरी है।
रैक और ड्रॉअर की सफाई भी जरूरी
फ्रिज के रैक और ड्रॉअर में अक्सर सब्जियों का रस, दूध या सॉस गिरकर सूख जाता है। इन्हें निकालकर हल्के साबुन और पानी से साफ करें। बहुत गर्म पानी में तुरंत ठंडे कांच के रैक न डालें, क्योंकि तापमान में अचानक बदलाव से कांच टूट सकता है। इन्हें कमरे के तापमान के करीब आने के बाद साफ करना बेहतर है।
सफाई के बाद फ्रिज को सुखाएं
सफाई पूरी होने के बाद फ्रिज के अंदर नमी न छोड़ें। सूखे और साफ माइक्रोफाइबर कपड़े से सभी सतहों को अच्छी तरह पोंछें। दरवाजे की रबर सील को भी साफ करें, क्योंकि इसमें धूल और खाने के छोटे कण जमा हो सकते हैं। इसके बाद फ्रिज को दोबारा व्यवस्थित करके खाद्य पदार्थ रखें।
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लेखक: (कीर्ति)
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सेमीकॉन 2.0: सरकार ने अधिसूचित की 1.27 लाख करोड़ रुपए की योजना, अश्विनी वैष्णव ने की उच्च स्तरीय चिप पैनल की घोषणा
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार को 1.27 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला में घरेलू क्षमताओं का विकास करना और भारत को चिप निर्माण, डिजाइन तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 को छह प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है, जिनमें भारतीय कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन, चिप निर्माण के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरणों का निर्माण, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयां, चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और संबंधित औद्योगिक गतिविधियां शामिल हैं। योजना के तहत उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल विनिर्माण क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य एक व्यापक और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिसके तहत अनुसंधान, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, पैकेजिंग और विशेष उपकरण उत्पादन जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समर्थन दिया जाएगा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार इस योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाले रणनीतिक सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) करेंगे।
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह समिति राष्ट्रीय महत्व, रणनीतिक जरूरतों और दीर्घकालिक औद्योगिक प्राथमिकताओं के आधार पर उन चिप्स और सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी, जिन्हें योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी निवेश उन क्षेत्रों में केंद्रित हो जहां देश की तकनीकी और रणनीतिक जरूरतें सबसे अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के तहत सरकार की प्राथमिकता केवल फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं है, बल्कि संपूर्ण मूल्य शृंखला में घरेलू क्षमता विकसित करना है, जिससे भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन में अधिक भागीदारी का अवसर मिलेगा और फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परीक्षण तथा विशेष मशीनरी निर्माण क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ेगा।
वैष्णव ने आगे यह भी कहा कि यह पहल भारत की विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। उन्होंने विशेष रूप से सेंसर जैसे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 100 प्रतिशत तक उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो सकता है।
गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर आज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), औद्योगिक स्वचालन और उपभोक्ता उपकरणों जैसे लगभग हर आधुनिक क्षेत्र की आधारभूत आवश्यकता बन चुके हैं। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के बाद भारत ने इस क्षेत्र को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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